बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आ रहे हैं. जेडीयू और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ आने के बाद फारबिसगंज विधानसभा सीट पर क्या समीकरण बनेगा, ये देखना दिलचस्प होगा. इस बार यहां 54% वोटिंग हुई है.
अररिया जिले का फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र एक वक्त कांग्रेसियों का गढ़ था, लेकिन 1985 के बाद से कांग्रेस यहां से जीत नहीं पाई है. वहीं बीजेपी लगातार तीन बार से अपना परचम लहरा रही है.
इन उम्मीदवारों पर रहेगी नजर
1- विद्या सागर केशरी (भाजपा)
2- जाकिर हुसैन (कांग्रेस)
17 चुनाव में 9 बार कांग्रेस जीती
इस सीट पर 15 बार विधानसभा के मुख्य चुनाव और 2 बार उपचुनाव हुए हैं. इसमें 9 बार कांग्रेस और 6 बार बीजेपी जीती है. वहीं, पीएसपी और बीएसपी ने भी एक-एक बार जीत का स्वाद चखा है. पिछले चुनाव में आरजेडी और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला था, जिसमें बीजेपी ने बाजी मारी थी.
2015 चुनाव का समीकरण
2015 के चुनाव में बीजेपी के विद्या सागर केसरी ने आरेजडी के कीर्तियानंद बिस्वास को मात दी थी. इस चुनाव में विद्या सागर केसरी को 85929 (46.21%) जबकि आरेजडी कीर्तियानंद को 60691 (32.64 %) वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर JAPL के जाकिर हुसैन (वोट- 18894, 10.16 %) और चौथे पर बीएसपी के लक्ष्मी नारायण (वोट- 4262, 2.29 %) थे.
विधानसभा की आबादी
2015 विधानसभा चुनाव के मुताबिक, यहां वोटरों की संख्या 186032 थी. इसमें 53.15 फीसदी पुरुष और 46.84 फीसदी महिलाएं शामिल थीं. बीते चुनाव में यहां करीब 62 फीसदी मतदान हुआ था, जबकि पोलिंग स्टेशन 287 बनाए गए थे. वैसे 2011 की जनगणना के अनुसार, अररिया जिले की लगभग आबादी 28,11,569 है.
फारबिसगंज नाम कैसे पड़ा?
73वीं मूल इन्फैंट्री के विद्रोहियों से लड़ते हुए एजे फोर्ब्स भागलपुर के आयुक्त युल की टीम में भी शामिल थे. एजे फोर्ब्स ने सुल्तानपुर एस्टेट की स्थापना की और इस जिले के विभिन्न स्थानों पर स्थित कई इंडिगो कारखानों की स्थापना की. बताया जाता है कि फारबिसगंज का नाम उनके नाम पर ही पड़ा था.