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लालू यादव के पैंतरे से हुआ कांग्रेस पर कंट्रोल, तेजस्वी को मिला बड़ा रोल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने तेजस्वी को महागठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार मानने से भी इनकार कर दिया था जिसके बाद लालू पर काफी दबाव बन गया था.

स्टोरी हाइलाइट्स
  • लालू ने पर्दे के पीछे से संभाली कमान, कांग्रेस को मनाया
  • तेजस्वी को सीएम कैंडिडेट बनाने पर कांग्रेस को किया राजी
  • एक लोकसभा सीट पह होना है उपचुनाव, वह भी कांग्रेस को मिली

दो दिन पहले तक लग रहा था कि बिहार में कांग्रेस और आरजेडी में सीटों का बंटवारा नहीं हो पाएगा. कांग्रेस ज्यादा सीटें मांग रही थी लेकिन आरजेडी को मंजूर नहीं था. आरजेडी चाहती थी कि तेजस्वी महागठबंधन की तरफ से सीएम के उम्मीदवार माने जाएं लेकिन गठबंधन के कई दूसरे साथियों की तरह कांग्रेस इससे सहमत नहीं थी.

कांग्रेस नेता तो तेजस्वी के निर्णय क्षमता पर ही सवाल उठाने लगे थे. लेकिन अब सीटों का बंटवारा हो चुका है. कांग्रेस को उतनी सीटें मिल गई हैं जिसकी उसे उम्मीद नहीं थी, वहीं तेजस्वी को सीएम उम्मीदवार मानने को कांग्रेस भी तैयार हो गई है. सीटों के बंटवारे से यह बिल्कुल साफ है कि लालू प्रसाद ने तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने के लिए कांग्रेस की बल्ले बल्ले कर दी.

75 सीटें मांग रही थी कांग्रेस

दरअसल, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के महागठबंधन से निकलने के बाद आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बात बिगड़ गई थी. कांग्रेस लगातार आरजेडी के ऊपर दबाव बनाते हुए 75 सीटों की मांग कर रही थी मगर आरजेडी ने उसे केवल 58 सीट ही देने का प्रस्ताव दिया था. इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने तेजस्वी को महागठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार मानने से भी इनकार कर दिया था जिसके बाद लालू पर काफी दबाव बन गया था.

2 दिन पहले बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने तेजस्वी को अनुभवहीन और भटका हुआ राजनेता करार दे दिया था जिससे ऐसा लगने लगा था कि आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का मामला काफी बिगड़ गया है.

ऐसे में जेल में बंद लालू ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ और सोशल इंजीनियरिंग का परिचय देते हुए कांग्रेस से तेजस्वी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने के लिए मनाया जिसके बदले में आरजेडी ने कांग्रेस को 70 सीटें देने की घोषणा की. 70 विधानसभा सीटों के साथ आरजेडी ने कांग्रेस को वाल्मिकीनगर लोकसभा सीट दी जहां पर बिहार विधानसभा चुनाव के साथ उपचुनाव होना है.

इससे पहले जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा ने भी तेजस्वी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार मानने से इनकार कर दिया था मगर लालू ने इन्हें तरजीह नहीं थी जिसकी वजह से यह दोनों महागठबंधन से अलग हो गए.

अनुभवी नेता लालू प्रसाद जानते हैं कि बिहार में एनडीए को हराने के लिए कांग्रेस से गठबंधन करना बेहद जरूरी है. इसलिए तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए उन्होंने कांग्रेस को जरूरत से ज्यादा सीटें दे दीं, जिसकी शायद कांग्रेस को भी उम्मीद नहीं रही होगी.

 

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