महाराष्ट्र सरकार ने 'लड़की बहन योजना' की तीन किस्तें पात्र महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा कर दी हैं और दिवाली से पहले दो किस्तें जमा कर देगी. इस स्कीम का ऐलान उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए राज्य के बजट में किया था. वहीं, सूचना और प्रचार निदेशालय ने एक आरटीआई सवाल के जवाब में 4 अक्टूबर को बताया कि योजना के प्रचार पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए गए. अब इस मसले पर सियासी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है.
'महायुति नहीं, महाझूठी...'
महाराष्ट्र सरकार में पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा कि अगर यही पैसे बचाते और बहनों को देते, तो ज्यादा अच्छा होता. वो महाझूठी है, महायुति नहीं है.
'लोगों तक योजना पहुंचाना होता है...'
महाराष्ट्र एनसीपी (अजित पवार) चीफ सुनील तटकरे ने कहा, "मीडिया कैंपेन तो सारी सरकार चलाती है, लोगों तक योजना पहुंचाना होता है, केंद्र सरकार भी करती है. इसमें गलत क्या है, जब कोई योजना लाई जाती है, तो एड का बजट भी होता है, जिससे योजना लोगों को लोगों तक पहुंचाया जा सके. विपक्ष तो हर चीज का विरोध करती है."
बीजेपी एमएलसी प्रसाद लाड ने इस मामले पर कहा कि हर सरकार अपने बजट में विज्ञापन के लिए एक प्रावधान करती है. अगर सरकार कोई योजना ला रही है तो लोगों तक पहुंचाना भी तो होगा, वर्ना लोगों को योजना के बारे में कैसे पता चलेगा. ये तो गलत आरोप है, आदित्य ठाकरे के पिता भी सीएम रहे हैं, उनको तो पता होना चाहिए.
यह भी पढ़ें: आम चुनाव के बाद गठबंधनों की पहली फाइट... झारखंड और महाराष्ट्र के चुनाव INDIA ब्लॉक के लिए रियल टेस्ट कैसे हैं?
कैसे पता चली खर्च की रकम?
महाराष्ट्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी स्कीम 'मुख्यमंत्री लड़की बहन योजना' को लेकर जानकारी सामने आई है. अमरावती के आरटीआई कार्यकर्ता अजय बोस द्वारा मांगी गई सूचना से खुलासा हुआ है कि इस योजना के विज्ञापनों पर अब तक 200 करोड़ रुपए से ज्यादा रुपए खर्च किए जा चुके हैं. इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने ₹1500 की आर्थिक सहायता प्रदान करने का वादा किया गया है.