दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जादूई आंकड़े को पार कर लिया है और अब धीरे-धीरे प्रचंड बहुमत की ओर बढ़ रही है. दिल्ली में बीजेपी की जीत ने 1998 में सरकार जाने के बाद 27 साल के वानवास को खत्म कर दिया है. बीजेपी की इस प्रचंड जीत में न सिर्फ बीजेपी के जमीन से जुड़े नेताओं का योगदान रहा, बल्कि अलग-अलग पार्टियों से आए नेताओं ने भी खूब वोट हासिल किए.
अरविंदर सिंह लवली
अरविंदर लवली शीला सरकार में 2003 से लेकर 2013 तक मंत्री रहे थे. कांग्रेस के दिग्गज माने जाने वाले लवली को कांग्रेस ने दो बार प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया. 2024 में हुए लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लवली ने कांग्रेस से किनारा कर लिया और बीजेपी का दामन थाम लिया. अरविंदर सिंह लवली ने इस बार गांधीनगर की अपनी परंपरागत सीट पर बड़ी जीत हासिल की है.
राजकुमार चौहान
राजकुमार चौहान भी शीला दीक्षित सरकार में दो बार मंत्री रहे. अरविंदर सिंह लवली के साथ ही उन्होंने भी कांग्रेस पार्टी छोड़ी और बीजेपी में शामिल हो गए. आम आदमी पार्टी की राखी बिड़ला से दो बार चुनाव हारने के बाद इस बार उन्होंने मंगोलपुरी में बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की है.
कैलाश गहलोत
आम आदमी पार्टी सरकार में कुछ महीने पहले तक मंत्री रहे कैलाश गहलोत ने बिजवासन विधानसभा सीट पर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और वहां से जीते भी हासिल की. कैलाश गहलोत ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी छोड़ी थी और इसका इनाम बीजेपी ने उन्हें उनकी मनपसंद सीट बिजवासन से टिकट देकर दिया था.
नीरज बसोया
नई दिल्ली की कस्तूरबा नगर सीट पर बीजेपी ने कांग्रेस छोड़कर आए नीरज बसोया को अपना उम्मीदवार बनाया. नीरज इसी सीट से पहले कांग्रेस की टिकट पर 2008 में विधायक बने थे. पिछले दो चुनावों में कांग्रेस उनके ऊपर अभिषेक दत्त को तरजीह दे रही थी और यही वजह नीरज बसोया के पार्टी छोड़ने की भी रही. नीरज ने अभिषेक दत्त को कड़े मुकाबले में हरा दिया.
तरविंदर सिंह मारवाड़
तरविंदर सिंह मारवाड़ तीन बार कांग्रेस के टिकट पर जंगपुरा से चुनाव जीते और इस बार उन्होंने बीजेपी की तरफ पाला बदला और आम आदमी पार्टी के हैवीवेट मनीष सिसोदिया को चुनाव हराया है. शीला दीक्षित जब दिल्ली की मुख्यमंत्री थी तो मारवाड़ उनके संसदीय सचिव थे.
मनजिंदर सिंह सिरसा
कभी दिल्ली में सिख पॉलिटिक्स में अकाली दल के जरिए सक्रिय रहने वाले मनजिंदर सिंह सिरसा ने कुछ साल पहले बीजेपी का दामन थामा था. अकाली दल छोड़ने के बाद सिरसा को पार्टी में काफी महत्व भी मिला और इस बार राजौरी गार्डन से मनजिंदर सिंह सिरसा विधायक बना हैं.
आम आदमी पार्टी में दल बदलुओं का क्या हुआ?
बीजेपी में दूसरी पार्टियों से आए नेताओं ने जबरदस्त कामयाबी हासिल की है तो वहीं, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में गए कई नेताओं को हर का मुंह देखना पड़ा है. किराड़ी विधानसभा सीट से भाजपा छोड़कर आम आदमी पार्टी में गए अनिल झा तो चुनाव जीत गए, लेकिन बाकी नेता इतने लकी साबित नहीं हुए. जबकि कांग्रेस छोड़कर आप में शामिल हुए चौधरी जुबेर अहमद सीलमपुर से चुनाव जीत गए है.
बीजेपी से आम आदमी पार्टी में गए बीबी त्यागी लक्ष्मी नगर से अभय वर्मा से चुनाव हार गए. जितेंद्र सिंह शंटी ने भाजपा छोड़ी थी और आम आदमी पार्टी का दामन थामा था. इसके बाद उन्हें शाहदरा विधानसभा से टिकट भी दिया गया, लेकिन वहां से बीजेपी के संजय गोयल के हाथों चुनाव हार गए. कांग्रेस और फिर भाजपा में रहे सुरेंद्र पाल सिंह बिट्टू को आम आदमी पार्टी ने तिमारपुर से चुनाव लड़ाया, लेकिन वहां वह काफी करीबी मुकाबले में बीजेपी के सूर्य प्रकाश खत्री से चुनाव हार गए. कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए मुकेश गोयल और विनय मिश्रा भी आदर्श नगर और द्वारका सीट से चुनाव हार गए.
कांग्रेस में भी पिटी दूसरी पार्टी से आए नेताओं की भद्द
कांग्रेस में भी दूसरी पार्टी छोड़कर आए नेताओं का हाल-बेहाल रहा. कांग्रेस इस बार भी दिल्ली में अपना खाता नहीं खोल पाई है. सीलमपुर से मौजूदा विधायक अब्दुल रहमान ने आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में वापसी की थी, लेकिन वो चुनाव हार गए. आम आदमी पार्टी से कांग्रेस में हाजी इशराक का भी कुछ यही हाल हुआ. वह बाबरपुर से गोपाल राय के सामने चुनाव लड़े और हार गए. बिजवासन सीट पर आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में आए कर्नल देवेंद्र सहरावत को भी हार का मुंह देखना पड़ा.