समागुरी विधानसभा सीट, सेंट्रल असम के नागांव जिले में एक जनरल अनारक्षित सीट है. यह नागांव लोकसभा सीट के आठ हिस्सों में से एक है. 1951 में बनी समागुरी सीट ने अब तक 14 विधानसभा चुनाव लड़े हैं, जिसमें 2024 का उपचुनाव भी शामिल है. ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे पर उपजाऊ ब्रह्मपुत्र घाटी के मैदानों में बसी इस सीट पर चाय के बागानों, धान के खेतों और कभी-कभी वेटलैंड्स के साथ समतल जलोढ़ जमीन है. यह इलाका अपने ग्रामीण माहौल, खेती की समृद्धि और आपस में जुड़े गांवों में रहने वाले मिले-जुले समुदायों के लिए जाना जाता है.
कांग्रेस 10 बार समागुरी सीट जीतकर सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनी हुई है, जबकि BJP, AGP, जनता पार्टी और एक निर्दलीय ने एक-एक बार सीट जीती है. कांग्रेस के रकीबुल हुसैन, जिन्होंने 2001 और 2006 में यह सीट जीती थी, ने 2011 में AGP के पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत को 19,860 वोटों से हराकर अपना तीसरा कार्यकाल पक्का किया. हुसैन ने 2016 में यह सीट बरकरार रखी, BJP के अपने प्रतिद्वंद्वी जीतू गोस्वामी को 14,515 वोटों से हराया. उन्होंने 2021 में लगातार पांचवीं बार यह सीट अपने नाम की, BJP के अनिल सैकिया को 26,098 वोटों से हराया.
2024 के आम चुनावों में धुबरी सीट से हुसैन के लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए उपचुनाव ने BJP को 2024 में यह सीट जीतने में मदद की, जब उसके उम्मीदवार डिप्लू रंजन सरमा ने कांग्रेस के तंजिल हुसैन को 24,501 वोटों से हराया.
लोकसभा चुनावों के दौरान सामगुरी विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी को लगभग कोई चुनौती नहीं मिली. 2009 में इसने AGP को 19,277 वोटों से हराया और 2014 में BJP पर 27,225 वोटों से अपनी बढ़त बनाए रखी. AGP ने 2019 में इस सीट पर चुनाव लड़ा, जिसमें कांग्रेस ने AGP को 24,858 वोटों से हराया. BJP ने 2024 में नागांव लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा, लेकिन नतीजा बदले बिना, क्योंकि कांग्रेस BJP से 21,846 वोटों से आगे थी.
2026 के विधानसभा चुनावों के लिए फाइनल रोल में सामागुरी के 224,826 वोटर थे, जो 2024 में 211,956 थे. 2023 के डिलिमिटेशन के बाद सामागुरी में 54,166 वोटर जुड़े, जिसमें कई नए इलाकों को शामिल करके सामागुरी चुनाव क्षेत्र की सीमाएं फिर से बनाई गईं. इससे पहले 2021 में यह 157,790, 2019 में 155,481, 2016 में 141,483 और 2011 में 128,642 था. 2023 के डिलिमिटेशन से पहले, मुस्लिम 55.90 परसेंट वोटरों के साथ सबसे ज्यादा असरदार ग्रुप थे, जबकि अनुसूचित जातियों के 12.36 परसेंट और अनुसूचित जनजातियों के 1.23 परसेंट वोटर थे. यह पूरी तरह से ग्रामीण सीट थी, जिसके रोल में कोई शहरी वोटर नहीं था, जो अब बदल सकता है. समागुरी में वोटर टर्नआउट 80 परसेंट से ज्यादा, ज्यादा और काफी हद तक स्थिर रहा है. 2011 में यह 83.48 परसेंट, 2016 में 85.77 परसेंट, 2019 में 86.20 परसेंट, 2021 में 85.70 परसेंट और 2024 में 83.22 परसेंट रहा.
समागुरी चुनाव क्षेत्र नागांव जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है, जिसके पास उत्तर में ब्रह्मपुत्र नदी बहती है. यहां की जमीन समतल है, ब्रह्मपुत्र घाटी के जलोढ़ मैदान हैं जिनमें हल्की लहरें और कभी-कभी बील भी हैं. यह इलाका धान की खेती और चाय के बागानों के लिए अच्छा है, लेकिन यहां मौसमी बाढ़ का खतरा रहता है. मुख्य नदियों में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां, जैसे कि कलंग, शामिल हैं, जो नदी के किनारे को उपजाऊ बनाती हैं.
समागुरी में रोजी-रोटी मुख्य रूप से धान की खेती, चाय की खेती, छोटे व्यापार और खेती से जुड़े कामों पर निर्भर करती है. बड़े-बड़े धान के खेत और मौसमी फसलें गांव के परिवारों के लिए रीढ़ की हड्डी हैं, जबकि चाय के बागान अतिरिक्त रोजगार देते हैं. उपजाऊ मिट्टी और भरपूर बारिश इन कामों को बनाए रखती है. इंफ्रास्ट्रक्चर में नेशनल हाईवे 37 के जरिए रोड कनेक्टिविटी और नागांव और तेजपुर को जोड़ने वाली स्टेट रोड शामिल हैं. आस-पास के स्टेशनों जैसे अमोनी या चपरमुख से रेल एक्सेस उपलब्ध है, जो लगभग 15-25 km दूर हैं. शहर और गांवों में बेसिक सुविधाएं हैं, साथ ही ग्रामीण सड़कों और बाढ़ मैनेजमेंट में लगातार डेवलपमेंट हो रहा है.
जिला हेडक्वार्टर, नागांव, लगभग 35-40 km पश्चिम में है. आस-पास के दूसरे शहरों में लगभग 30 km पूर्व में कालियाबोर, ब्रह्मपुत्र के पार लगभग 60 km उत्तर में तेजपुर और दक्षिण की ओर राहा शामिल हैं. राज्य की राजधानी, दिसपुर, लगभग 120-140 km पश्चिम में है.
2023 के डिलिमिटेशन के बाद सामगुरी में वोटर डेमोग्राफी में बड़े बदलावों को देखते हुए, कांग्रेस पार्टी का असेंबली इलेक्शन में तीन जीत और लोकसभा इलेक्शन में चार लीड का शानदार रिकॉर्ड गुमराह करने वाला लग सकता है. यह 2024 के उपचुनाव में दिखा, जो डिलिमिटेशन के बाद सामगुरी में हुआ पहला असेंबली इलेक्शन था, क्योंकि BJP ने पहली बार यह सीट जीती थी. इसका एक संभावित कारण मुस्लिम वोटरों की संख्या में कमी हो सकती है. डिलिमिटेशन ने सामागुरी निर्वाचन क्षेत्र को पूरी तरह से खाली कर दिया है. जो एकतरफा मुकाबला हो सकता था, वह अब 2026 के विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच एक तीखा और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा.
(अजय झा)
Anil Saikia
BJP
Abidur Rahman
ASMJTYP
Nota
NOTA
Pranjit Bhowmik
BGanP
असम पंचायत आजतक कार्यक्रम की शुरुआत असम के मशहूर सिंगर जुबिन गर्ग को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि देकर की गई. गरिमा सैकिया गर्ग ने पहले पंचायत आजतक असम के इस मंच को धन्यवाद किया. उन्होंने कहा- यह 19 सितंबर के घटना के बाद पहली बार है जब मैं कहीं पब्लिकली बाहर आई हूं. मैंने उन्हें पहली बार मेरे हॉस्टल में देखा था. 11 सितंबर 1995 का दिन था. हालांकि उनसे पहली मुलाकात से पहले 'अनामिका और माया' अल्बम रिलीज हो चुके थे. इससे पहले मैंने उनका इंटरव्यू पढ़ा था, वहां उनका एड्रेस और पिन नंबर था. मैंने उन्हें लेटर लिखा. उनके जोरहाट वाले घर मेरा लेटर पहुंचा. एक दिन वह रिकॉरिंड खत्म करके मेरे हॉस्टल में मिलने आए. 11 सितंबर 1995 से सितंबर 2025 तक 30 साल हमने साथ गुजारे. वह मेरे दोस्त थे, फिर हम लवर हुए और फिर पति-पत्नी भी बने, ये 30 साल हमारे लिए अनमोल बन गए.
असम में चुनावी माहौल के बीच पर्यटन और विकास को लेकर चर्चा तेज है. राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था सुधार, निवेश प्रोत्साहन, और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा दिया है.
असम पंचायत आजतक 2026 कार्यक्रम में मुस्लिम वोट, पहचान, एनआरसी और जनसांख्यिकी पर तीखी बहस हुई. नेताओं ने मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक दिशा, सुरक्षा चिंताएं और जनसांख्यिकीय बदलावों पर अपने विचार साझा किए.
असम चुनाव से पहले गोवाहाटी में पंचायत आजतक असम का आयोजन हुआ जिसमें राजनीतिक दलों के नेता, उद्यमी और अधिकारी शामिल हुए. कैबिनेट मंत्री रनोज पेगू और स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पहचान के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की.
असम में अवैध घुसपैठियों का मुद्दा दशकों से राज्य की राजनीति और जनसांख्यिकी को प्रभावित करता रहा है. 1985 के असम समझौते के बाद भी 1971 के बाद आए बांग्लादेशी मूल के लोगों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है.
असम चुनाव से पहले गोवाहाटी में पंचायत आजतक असम कार्यक्रम में सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने चुनावी रणनीतियों, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पंचायत असम के मंच पर आजतक से बातचीत में चुनाव और उससे जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपना मत व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि चुनाव में ओवर कॉन्फिडेंस नहीं होना चाहिए और आखिरी वोट पड़ने तक किसी नतीजे पर फाइनल फैसला नहीं देना चाहिए. इस बीच जब CM से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान जाना गुनाह है तो सीएम ने कहा कि मेरे लिए ये बहुत बड़ा गुनाह है. अगर पाकिस्तान जाना गुनाह नहीं तो कहां जाना गुनाह है.
असम चुनाव से पहले गोवाहाटी में पंचायत आजतक असम का आयोजन हुआ जिसमें राजनीतिक मुद्दों, विकास और उद्यमिता पर चर्चा हुई. कार्यक्रम में असम के उद्यमी और अधिकारी शामिल हुए.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पंचायत असम के मंच से आजतक के साथ विशेष बातचीत में कई अहम मुद्दों पर स्पष्ट और खुलकर अपने विचार साझा किए. उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता और सरकार की नीतियों के बारे में विस्तार से बताया. इस बातचीत में मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय विकास, सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा की. यह एक्सक्लूसिव इंटरव्यू असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संबंधित कई प्रश्नों के उत्तर मिलते हैं.
असम की राजधानी गुवाहाटी में आयोजित आजतक के कार्यक्रम 'पंचायत आजतक' में खास मेहमानों की मौजूदगी रही. कार्यक्रम के सत्र 'फिर एक बाद हिमंता सरकार' में खास तौर पर आमंत्रित थे- असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा. एंकर अंजना ओम कश्यप की क्या हुई उनसे खास बातचीत, जानने के लिए देखें ये वीडियो.