ढींग विधानसभा सीट असम के नगांव जिले में है और नगांव लोकसभा सीट के आठ हिस्सों में से एक है. इसमें मोरियाबारी पुलिस स्टेशन डेवलपमेंट ब्लॉक, ढींग टाउन कमेटी और बटाद्रबा और जुरिया डेवलपमेंट ब्लॉक के कुछ हिस्से शामिल हैं. ढींग ज्यादातर ग्रामीण इलाका है और यहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है, जो इसकी राजनीति और सामाजिक ताने-बाने को आकार देता है.
1957 में अपनी शुरुआत के बाद से ढींग सीट ने 14 असेंबली चुनाव में हिस्सा लिया है. कांग्रेस पार्टी ने आठ जीत के साथ दबदबा बनाया, जिसमें 1957 और 1972 के बीच पहले चार चुनावों में लगातार चार जीत और 1991 और 2001 के बीच लगातार तीन जीत शामिल हैं. ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) 2006 से लगातार चार बार से जीत रहा है. CPI से अलग हुए एक गुट, रिवोल्यूशनरी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने 1978 में इसे एक बार जीता था, और 1985 में एक इंडिपेंडेंट लीडर जीता था. चाहे वे किसी भी पार्टी के हों, मुस्लिम मेजॉरिटी वाली इस सीट पर सिर्फ मुस्लिम लीडर ही जीते हैं.
AIUDF की जीत का सिलसिला 2006 में शुरू हुआ जब उसके कैंडिडेट मुबारक अली पठान ने कांग्रेस पार्टी के मौजूदा MLA इदरीस अली को 2,543 वोटों से हराया. AIUDF ने 2011 में यह सीट बरकरार रखी, जब उसके कैंडिडेट अमीनुल इस्लाम ने कांग्रेस के इदरीस अली को 19,172 वोटों से हराया. 2016 में AIUDF की जीत का अंतर बढ़कर 24,553 वोट हो गया, जिसमें अमीनुल इस्लाम ने अपने कांग्रेस पार्टी के विरोधी अनवर हुसैन को हराया. इस्लाम ने 2021 में अपनी जीत की हैट्रिक पूरी की, जब उन्होंने निर्दलीय नेता महबूब मुख्तार को 102,967 वोटों के बड़े अंतर से हराया, क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाजोत (महागठबंधन) में शामिल होने के फैसले के बाद यह सीट AIUDF को दे दी थी.
कांग्रेस पार्टी और AIUDF के बीच एक ट्रेड-ऑफ देखा गया, जिसके तहत AIUDF ने ढींग विधानसभा क्षेत्र और कांग्रेस पार्टी ने संसदीय चुनाव लड़ा. ढींग विधानसभा क्षेत्र में AIUDF ने 2009 में कांग्रेस पार्टी को 33,321 वोटों और 2014 में 24,925 वोटों से हराया था. AIUDF के महाजोत में शामिल होने से कांग्रेस पार्टी अगले दो लोकसभा चुनावों में 2019 में AGP से 160,486 वोटों के मार्जिन से आगे रही और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी अपनी बढ़त बनाए रखी.
10 फरवरी, 2026 को चुनाव आयोग द्वारा जारी फाइनल वोटर लिस्ट में ढींग विधानसभा क्षेत्र में 235,418 योग्य वोटर हैं, जो 2024 में 220,477 रजिस्टर्ड वोटरों से 14,941 ज्यादा है. ढींग में पिछले कुछ सालों में वोटरों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है. 2021 में वोटरों की संख्या 231,325, 2019 में 212,192, 2016 में 188,167 और 2011 में 157,327 थी.
ढींग चुनाव क्षेत्र में 94.40 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों का दबदबा है, जो पूरी तरह से ग्रामीण इलाका है, जिसमें 95.97 प्रतिशत वोटर गांवों में रहते हैं और 4.63 प्रतिशत शहरी इलाकों में रहते हैं. 2011 में 83.89 प्रतिशत, 2016 में 92.08 प्रतिशत, 2019 में 91.45 प्रतिशत और 2021 में 89.91 प्रतिशत वोटिंग हुई है.
ढींग शहर और आसपास का चुनाव क्षेत्र असम के मध्य मैदानों में नगांव जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है. इस इलाके की जमीन समतल और उपजाऊ है, जो ब्रह्मपुत्र घाटी की खासियत है. यहां निचले इलाकों में खेती के खेत हैं जहां मौसमी बाढ़ का खतरा रहता है. ब्रह्मपुत्र पास में ही उत्तर की ओर बहती है, जिसकी सहायक नदियां और बील धान की खेती और मछली पालन में मदद करती हैं. मुस्लिम-बहुमत वाला यह दर्जा ऐतिहासिक रूप से पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) से 20वीं सदी की शुरुआत में हुए माइग्रेशन से बना, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में खेती में मजदूरी और जमीन के बंदोबस्त के लिए तेज हुआ, और बंटवारे के बाद भी जारी रहा, जिससे निचले असम और नगांव जैसे मध्य जिलों में डेमोग्राफिक बदलाव हुए, जहां बंगाली मूल के मुसलमान चार जमीन और उपजाऊ मैदानों पर खेती के मौकों के लिए बड़ी संख्या में बस गए.
इकॉनमी खेती, मुख्य रूप से धान, जूट, सब्जियों और कुछ मछली पालन के आस-पास घूमती है, जिसमें सीमित छोटा व्यापार और दिहाड़ी मजदूरी का काम है. इंफ्रास्ट्रक्चर में स्टेट हाईवे और पास के नेशनल हाईवे 37 के जरिए सड़क कनेक्टिविटी शामिल है, जो मुख्य रास्तों से जुड़ती है. रेल एक्सेस नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के तहत लुमडिंग-डिब्रूगढ़ लाइन पर चपरमुख या आस-पास के स्टेशनों से उपलब्ध है.
आस-पास के शहरों में नगांव (जिला हेडक्वार्टर, लगभग 25 km दक्षिण-पूर्व में), राहा (लगभग 20-25 km पश्चिम में), बटाद्रबा और जुरिया (चुनाव क्षेत्र के अंदर), और आगे मोरीगांव (पड़ोसी जिला, लगभग 40-50 km पश्चिम में) शामिल हैं.
ढींग में कांग्रेस-AIUDF गठबंधन का पूरा दबदबा बिना किसी चुनौती के बना हुआ है, क्योंकि SIR की कोशिश का यहां लगभग कोई असर नहीं हुआ और वोटरों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी जारी है. ढींग वोटर्स के लिए BJP-AGP अलायंस अभी भी एक अलग-थलग पार्टी है, जो चुनावी समीकरण में मुश्किल से ही शामिल है. हालांकि AIUDF और कांग्रेस अब राज्य लेवल पर सहयोगी नहीं हैं, लेकिन जमीन पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए, जब तक कि कांग्रेस कोई सरप्राइज न दे और अपने पुराने सहयोगी को हरा न दे. वैसे भी, BJP-AGP अलायंस यहां हाशिये पर है क्योंकि ढींग 2026 के विधानसभा चुनावों में जा रहे हैं.
(अजय झा)
Mehboob Muktar
IND
Sanjib Kumar Bora
BJP
Inamul Huda
RCPI(R)
Nota
NOTA
Mustafa Shahidul Islam
IND
Md. Anjar Hussain
ASMJTYP
Saiful Islam Choudhury
AJM
Shahnaz Begum
JD(U)
असम पंचायत आजतक कार्यक्रम की शुरुआत असम के मशहूर सिंगर जुबिन गर्ग को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि देकर की गई. गरिमा सैकिया गर्ग ने पहले पंचायत आजतक असम के इस मंच को धन्यवाद किया. उन्होंने कहा- यह 19 सितंबर के घटना के बाद पहली बार है जब मैं कहीं पब्लिकली बाहर आई हूं. मैंने उन्हें पहली बार मेरे हॉस्टल में देखा था. 11 सितंबर 1995 का दिन था. हालांकि उनसे पहली मुलाकात से पहले 'अनामिका और माया' अल्बम रिलीज हो चुके थे. इससे पहले मैंने उनका इंटरव्यू पढ़ा था, वहां उनका एड्रेस और पिन नंबर था. मैंने उन्हें लेटर लिखा. उनके जोरहाट वाले घर मेरा लेटर पहुंचा. एक दिन वह रिकॉरिंड खत्म करके मेरे हॉस्टल में मिलने आए. 11 सितंबर 1995 से सितंबर 2025 तक 30 साल हमने साथ गुजारे. वह मेरे दोस्त थे, फिर हम लवर हुए और फिर पति-पत्नी भी बने, ये 30 साल हमारे लिए अनमोल बन गए.
असम में चुनावी माहौल के बीच पर्यटन और विकास को लेकर चर्चा तेज है. राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था सुधार, निवेश प्रोत्साहन, और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा दिया है.
असम पंचायत आजतक 2026 कार्यक्रम में मुस्लिम वोट, पहचान, एनआरसी और जनसांख्यिकी पर तीखी बहस हुई. नेताओं ने मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक दिशा, सुरक्षा चिंताएं और जनसांख्यिकीय बदलावों पर अपने विचार साझा किए.
असम चुनाव से पहले गोवाहाटी में पंचायत आजतक असम का आयोजन हुआ जिसमें राजनीतिक दलों के नेता, उद्यमी और अधिकारी शामिल हुए. कैबिनेट मंत्री रनोज पेगू और स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पहचान के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की.
असम में अवैध घुसपैठियों का मुद्दा दशकों से राज्य की राजनीति और जनसांख्यिकी को प्रभावित करता रहा है. 1985 के असम समझौते के बाद भी 1971 के बाद आए बांग्लादेशी मूल के लोगों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है.
असम चुनाव से पहले गोवाहाटी में पंचायत आजतक असम कार्यक्रम में सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने चुनावी रणनीतियों, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पंचायत असम के मंच पर आजतक से बातचीत में चुनाव और उससे जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपना मत व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि चुनाव में ओवर कॉन्फिडेंस नहीं होना चाहिए और आखिरी वोट पड़ने तक किसी नतीजे पर फाइनल फैसला नहीं देना चाहिए. इस बीच जब CM से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान जाना गुनाह है तो सीएम ने कहा कि मेरे लिए ये बहुत बड़ा गुनाह है. अगर पाकिस्तान जाना गुनाह नहीं तो कहां जाना गुनाह है.
असम चुनाव से पहले गोवाहाटी में पंचायत आजतक असम का आयोजन हुआ जिसमें राजनीतिक मुद्दों, विकास और उद्यमिता पर चर्चा हुई. कार्यक्रम में असम के उद्यमी और अधिकारी शामिल हुए.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पंचायत असम के मंच से आजतक के साथ विशेष बातचीत में कई अहम मुद्दों पर स्पष्ट और खुलकर अपने विचार साझा किए. उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता और सरकार की नीतियों के बारे में विस्तार से बताया. इस बातचीत में मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय विकास, सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा की. यह एक्सक्लूसिव इंटरव्यू असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संबंधित कई प्रश्नों के उत्तर मिलते हैं.
असम की राजधानी गुवाहाटी में आयोजित आजतक के कार्यक्रम 'पंचायत आजतक' में खास मेहमानों की मौजूदगी रही. कार्यक्रम के सत्र 'फिर एक बाद हिमंता सरकार' में खास तौर पर आमंत्रित थे- असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा. एंकर अंजना ओम कश्यप की क्या हुई उनसे खास बातचीत, जानने के लिए देखें ये वीडियो.