भारतीय सेना के गौरवपूर्ण इतिहास में 24 अप्रैल 2015 का दिन वीरता और शौर्यता के नाम दर्ज हो जायेगा. क्योंकि इस दिन सबसे पुरानी गोरखा रेजिमेंट अपनी स्थापना के 200 साल पूरे करेगी.
सर रॉबर्ट कोलक्यूहोन ने 24 अप्रैल 1815 को अलमोड़ा में 1/3 गोरखा राइफल्स की स्थापना की थी. शुरुआत में इन्हें कमाऊं स्थानीय बटालियन का नाम दिया गया था. तब यह बटालियन पुलिस बल के रूप में काम करती थी, पर जल्द ही विद्रोहियों के खिलाफ अपने युद्ध में कौशल को दिखा कर उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली .
गोरखा सैनिकों को पहली बार ईस्ट इंडिया कंपनी ने नियुक्त किया था. जिसके बाद उन्होंने ब्रिटिश गर्वमेंट की ओर से कई महत्वपूर्ण युद्ध में हिस्सा लिया. 1880 के द्वितीय अफगान युद्ध में इस रेजिमेंट के शूरवीरों ने ख्याति मिली.
वर्तमान में भारतीय सेना में 30 हजार गोरखा सैनिक हैं, जिसमें 65 फीसदी सैनिक नेपाल, दार्जलिंग, देहरादून, धर्मशाला से आते हैं.
गोरखा सैनिकों की बहादुरी के लिए भारतीय सेना के फील्ड मार्शल जनरल एस.एच.एफ.जे.मानेकशॉ ने कहा था कि, यदि कोई व्यक्ति कहता है कि उसे किसी चीज से डर नहीं लगता, तो वह झूठ बोल रहा है या फिर वह गोरखा है.