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नहीं मिली नौकरी तो घर पर ही बनाने लगा कबाड़ से एयरक्राफ्ट

बेरोजगारी से परेशान होकर एक युवक ने घर पर ही एयरक्राफ्ट बनाने शुरू कर दिए और यह सामान जुटाया कबाड़ से. जानिए इनकी पूरी कहानी...

Abdul Wazid in His Aircraft Abdul Wazid in His Aircraft

आपने 26 जनवरी या 15 अगस्त की परेड तो देखी ही होगी. हवा से बातें करने वाले एयरक्राफ्ट जरूर आपका मन मोह लेते होंगे. लेकिन अगर कोई बेरोजगार लड़का अपने घर पर एयरक्राफ्ट बनाने लगे तो आपको हैरानी जरूर होगी. मुजफ्फरनगर के एक युवक ने देशी टू सीटर एयरक्राफ्ट बना कर सबको हैरत में डाल दिया है. उसने एक ऐसा एयरक्राफ्ट बनाया है जो हू बहू रियल एयरक्राफ्ट की तरह दिखता है. यह वैसे ही चलता है लेकिन अभी इस देशी एयरक्राफ्ट को उड़ने में कुछ समय बाकी है.

आपने देखा होगा कि बड़ी-बड़ी टेक्नोलॉजी से बनाए जाने वाले एयरक्राफ्ट आसमान में हवाओ से बातें करते हैं लेकिन मुजफ्फरनगर के इस युवक ने बेरोजगारी से परेशान होकर अपने हुनर को जिस तरह तरासा है, उससे हर कोई हैरत में पड़ जाए.

मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाना क्षेत्र के कसेरवा गांव के रहने वाले अब्दुल वाजिद नाम के एक नौजवान युवक ने बेरोजगारी से परेशान होकर अपनी देशी टेक्नोलॉजी से एक टू सीटर एयरक्राफ्ट को तैयार किया है. वाजिद की मानें तो वह इस देशी एयरक्राफ्ट को उड़ने के लिए जल्द ही जिला प्रशासन से अनुमति भी लेने वाले हैं. एयरक्राफ्ट को पूरी तरह तैयार होने में अभी कुछ दिन का समय जरूर लगेगा लेकिन ऐसा लगता है कि वाजिद की ये मेहनत एक दिन जरूर रंग लाएगी.

वाजिद ने इससे पहले भी कई छोटे मॉडल नुमा एयरक्राफ्ट बनाए हैं जो फिलहाल हवाओं से बाते भी करते हैं. ये छोटे एयरक्राफ्ट रिमोट के साथ साथ तेल से भी चलते हैं. तेल से चलने वाले इस छोटे देशी एयरक्राफ्ट को तार की बदौलत हवा में हैंडल किया जाता है. वाजिद का ये कारनामा इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है. इस बारे में वाजिद ने कहा, 'कॉलेज में एनसीसी में मैंने एयर फोर्स चुनी थी. सफदरगंज एयपोर्ट से मैंने इसकी ट्रेनिंग ली. मैंने वहां एयर मॉडलिंग चुनी थी और फिर यह मेरा शौक बन गया. मुझे लगा कि जब छोटा एयरक्राफ्ट ऐसे उड़ सकता है तो ऐसा ही बड़ा मॉडल भी बना सकते है. मुझे इसे बनाते हुए दस महीने हो गए हैं और पांच लाख रुपये का खर्चा भी हो चुका है. इसे तैयार होने में साढ़े पांच या छह लाख रुपये तक का खर्चा आएगा.'


उन्हें इस एयरक्राफ्ट के उड़ने पर पूरा भरोसा है. वो बताते हैं, 'यह जरूर उड़ेगा इसमें पहले हमने अपाची के दो इंजन लगाए थे लेकिन इसकी स्पीड बराबर नहीं हो पाई मतलब सेटिंग नहीं बन सकी. उसके बाद हमने बदल कर इसमें वैन का इंजन लगाया है. उसके अंदर भी हमने पिस्टन बदला है. उसके बाद हमने आर पी एम इसकी चेक की तब जाकर संतुष्टि हुई. इसे चलाने के लिए हम चार- पांच दिन में परमिशन लेने वाले हैं. परमिशन मिलने के बाद वो एक तारीख देंगे तब तक हम इसे पूरी तरह से तैयार कर लेंगे.'

दरअसल उन्होंने नौकरी पाने की काफी कोशिशें की लेकिन नौकरी नहीं मिली. निराश होने के बाद उन्होंने कुछ अलग करने का निश्चय किया. आज दूर-दूर से उनके इस काम को देखने के लिए लोग आते हैं. गांव वालों को भी विश्वास है कि वो गांव की तरक्की में मदद करेंगे.

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