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नेपाल में 10 लाख बच्चे नहीं जा सकेंगे स्कूल: यूनीसेफ

बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनीसेफ ने कहा कि 25 अप्रैल को आए भूकंप के बाद नेपाल के लगभग 950,000 स्टूडेंट्स स्कूल नहीं जा सकेंगे.

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बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनीसेफ ने कहा कि 25 अप्रैल को आए भूकंप के बाद नेपाल के लगभग 950,000 स्टूडेंट्स स्कूल नहीं जा सकेंगे.

यूनीसेफ ने कहा कि उन्हें स्कूल भेजने के लिए शीघ्रता से अस्थाई जगह उपलब्ध कराई जानी चाहिए और उनके स्कूलों की क्षतिग्रस्त इमारतों की मरम्मत कराई जानी चाहिए. हिमालय की गोद में बसे नेपाल में 7.9 तीव्रता से आए इस भीषण जलजले में 24,000 कक्षाएं क्षतिग्रस्त अथवा ध्वस्त हो गई हैं. वहीं भूकंप के बाद आने वाले झटकों के कारण इमारतों को भारी नुकसान हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र की संस्था ने शुक्रवार को कहा कि आने वाले दिनों और हफ्तों में दूरदराज से अतिरिक्त सूचनाएं आएंगी जिससे शिक्षा संकट का अनुपात और बढ़ने की आशंका है. नेपाल में स्कूल 15 मई से दोबारा खुल रहे हैं.

नेपाल में यूनीसेफ के प्रतिनिधि टोमो होजुमी ने कहा,'भूकंप से पहले नेपाल के स्कूलों में दाखिला लेने वाले लगभग 10 लाख छात्रों को अब स्कूल की इमारत नजर नहीं आएगी'

उन्होंने कहा, 'भूकंप से प्रभावित हुए बच्चों को जरूरी जीवन रक्षक चीजों जैसे स्वच्छ पानी और आश्रय की आवश्यकता है। लेकिन आपात स्थिति में स्कूल (चाहे अस्थाई ढांचा हो) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.'

उन्होंने कहा, 'इससे बच्चों की शिक्षा में आया व्यवधान कम से कम हो जाएगा, शोषण और दुर्वव्यवहार से उनकी रक्षा होगी.'

बुरी तरह से प्रभावित हुए जिलों गोरखा, सिंधुपालचौक और नुवाकोट में अनुमान के मुताबिक 90 फीसदी स्कूल ध्वस्त हो गए हैं जबकि धाडिंग में 80 फीसदी स्कूलों की इमारत ढह गई हैं.

कुछ इलाकों में जैसे काठमांडू और भक्तपुर में 10 में से लगभग नौ स्कूल की इमारतों का इस्तेमाल आपातकालीन आश्रय के रूप में किया जा रहा है.

यूनीसेफ को चिंता है कि पिछले 25 सालों में नेपाल में प्राथमिक स्कूलों में दाखिले में काफी प्रगति दर्ज की गई थी लेकिन भूकंप के बाद इस संख्या में भारी कमी आ सकती है. 1990 में नेपाल में 64 फीसदी दाखिले होते थे लेकिन आज नेपाल में यह संख्या 95 फीसदी है.

नेपाल में पढ़ाई छोड़ने वालों की संख्या पहले ही एक बड़ी चिंता का विषय थी. पांच से 16 साल की उम्र के लगभग 12 लाख नेपाली बच्चे या तो कभी स्कूल ही नहीं गए या फिर उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी.

होजुमी ने कहा, 'शिक्षा के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने , इमारतों का मूल्यांकन और उनकी मरम्मत, और परिवारों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता अभियान की बहुत जरूरत है.'

यूनीसेफ के अधिकारी ने कहा, 'शिक्षा में लम्बे समय तक रुकावट बच्चों के विकास और भविष्य की संभावनाओं के लिए विनाशकारी हो सकता है.'

INPUT: IANS

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