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इतनी कठिन ट्रेनिंग लेकर मीराबाई चानू बनीं 'GOLD' मेडेलिस्ट

मीराबाई चानू के बचपन में उनके गांव में कोई वेटलिफ्टिंग सेंटर नहीं था. लेकिन अपने मेहनत के दम पर उन्होंने भारत के लिए गोल्ड हासिल कर दिखाया.

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मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में पिछले दो दशक से अधिक समय में गोल्ड पदक जीतने वाली पहली भारतीय हो गईं. मणिपुर की राजधानी इंफाल में 8 अगस्त 1994 को पैदा हुई मीराबाई चानू का पूरा नाम 'साइखोम मीराबाई चानू' है.

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भारतीय रेलवे में कार्यरत चानू ने स्नैच में 85 किलो और क्लीन एंड जर्क में 109 किलो वजन उठाया. उन्होंने 48 किलो वर्ग में कुल 194 किलो वजन उठाकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया.

मेहनत में नहीं छोड़ी कोई कोर-कसर...

मणिपुर की रहने वाली चानू के लिए ये मुकाम हासिल करना इतना आसान नहीं था. इसके लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिए. एक अखबार में दिए इंटरव्यू के मुताबिक उन्होंने बताया कि 'मैंने जो भी हासिल किया है, वह मेरे कोच विजय शर्मा की मेहनत का नतीजा है. मार्गदर्शन के बिना गोल्ड हासिल करना संभव नहीं हो सकता. उन्होंने बताया कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी. वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट के जरिए उन्हें बधाई दी है.

जब देखना पड़ा नाकामयाबी का मुंह...

चानू रियो ओलंपिक में तीनों प्रयासों में नाकाम रही थीं और 12 भारोत्तोलकों में वह स्पर्धा पूरी नहीं कर पाने वाली दो में से एक थीं. खबरों के मुताबिक, मीराबाई चानू के बचपन में उनके गांव में कोई वेटलिफ्टिंग सेंटर नहीं था. इसलिए वे ट्रेन से 60 किमी दूर ट्रेनिंग लेने जाया करती थीं.

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