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गांवों में जाकर लोगों की दिक्कतें पूछता है ये शख्स, किए 23 राज्यों में 950 नुक्कड़ नाटक

सबसे ज्यादा नुक्कड़ नाटक करने वाले शख्स हैं विपुल.. बिना पैसे और सरकारी मदद के गांव- गांव जाकर पूछ रहे हैं लोगों की दिक्कतें...चला रहे हैं बताओ क्या दिक्कत है अभियान...

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 विपुल सिंह (फोटो: फेसबुक) विपुल सिंह (फोटो: फेसबुक)

गांव हो या शहर, आम जनता की शिकायत रहती है कि उनकी दिक्कत कोई नहीं सुनता है और वे उन्हें लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन, मध्यप्रदेश में एक ऐसा शख्स है जो अपने निजी जीवन को भूलकर लोगों से उनकी दिक्कत पूछ रहा है और खास बात ये है कि वो यह बिना सरकारी मदद के कर रहा है.

इस शख्स का नाम है विपुल सिंह, जो अपने नुक्कड़ नाटक के लिए जाने जाते हैं और जगह-जगह जाकर लोगों को कई मुद्दों पर जागरूक भी करते हैं. वे जेब में महज 200-300 रुपये लेकर भी अपने अभियान के लिए चल देते हैं और नाटक करके लोगों से मिलते हैं.  विपुल ‘घुमंतू’ कलाकार के नाम से पहचाने जाते हैं. उन्होने देश का सबसे बड़ा टेडएक्स टॉक दिया था.

'बताओ क्या दिक्कत है' अभियान पर हैं विपुल

वे अभी कई प्रदेश के कई जिलों की यात्रा कर रहे हैं और वहां जाकर लोगों से बातें करते हैं. एक महीने के इस अभियान में वे कई शहरों और गांवों के हजारों लोगों से मिलेंगे और नुक्कड़ नाटक भी कर रहे हैं. इस अभियान को लेकर विपुल ने आजतक ऑनलाइन से बातचीत की और उन्होंने बताया कि गांवों में लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया, यहां गांवों में स्कूलों से लेकर अस्पतालों की हालत बहुत खराब है. वे उन गांवों में जा रहे हैं, नेता भी नहीं पहुंचते हैं. 

सबसे ज्यादा नुक्कड़ नाटक करने वाला शख्स

विपुल बताते हैं कि वो अभी तक 950 से ज्यादा नाटक कर चुके हैं और बताया जाता है कि वो ऐसा करने वाले दुनिया के पहले शख्स हैं. वे अभी तक देश के 23 राज्यों में जाकर नुक्कड़ नाटक कर चुके हैं.  बता दें, विपुल लगातार अपने फेसबुक पेज पर लोगों की दिक्कतें शेयर करते रहते हैं..

विपुल देश के अलग-अलग जगहों पर जाकर नुक्कड़ नाटक करते हैं और किसी एक मैसेज को लेकर भाषण देते हैं. पिछले पांच सालों से वे ये काम कर रहे हैं और नुक्कड़ नाटक की वजह से उनकी पढ़ाई पर भी असर पड़ा था. बता दें कि वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर इस काम में लग गए.

कई जगहों की पैदल यात्रा कर चुके हैं

विपुल ने एक बार दिल्ली से भोपाल और कोलकाता से दिल्ली तक पैदल यात्रा की थी और वहां नुक्कड़ नाटक किए थे. इसके साथ ही उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की भारत-यात्रा, यूनिसेफ आदि के साथ भी काम कर चुके हैं. वे खुद अपने नाटक लिखते हैं और कैंपेन करते हैं. कई बार उनके पास पैसे भी नहीं होते हैं और वो अपने मिशन पर चले जाते हैं. साथी ही कई बार वो एनजीओ आदि के साथ भी कर रहे हैं.

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