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गुजरात सरकार की घोषणा: 5वीं-8वीं में फेल होने पर दोबारा मिलेगा चांस

शिक्षामंत्री ने कहा कि बच्चों को फेल ना करने की पॉलिसी की वजह से शिक्षा का स्तर काफी नीचे चला गया है, छात्र 8वीं कक्षा तक बिना फेल हुए ही पहुंच जाते हैं, जो ठीक से पढ़ लिख भी नहीं सकते हैं, वो दसवीं कक्षा तक पहुंच जाते हैं.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

  • 5वीं-8वीं क्लास में फेल होने पर मिलेगा दोबारा चांस
  • शैक्षणिक वर्ष 2019-2020 से बदलाव लागू होगा

आरटीई शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 16 में केन्द्र सरकार के जरिये बदलाव के बाद अब गुजरात सरकार ने  भी प्रमुख बदलाव किया है. इसके तहत पढ़ाई करने वाले 5वीं और 8वीं कक्षा के बच्चों की परीक्षा ली जाएगी. अगर इनमें से कोई बच्चा परीक्षा में फेल होता है तो उसे दो महीने के भीतर दोबारा चांस दिया जाएगा.

ये परीक्षाएं GCERT यानी गुजरात काउंसिल ऑफ एजुकेशन रीसर्च एंड ट्रेनिंग के जरिये लिया जाएगा. इस बदलाव को शैक्षणिक वर्ष 2019-2020 से लागू कर दिया जाएगा. शिक्षा मंत्री भुपेन्द्र सिंह ने बताया कि पहली बार 5वीं और 8वीं कक्षा की परीक्षाएं इस बार ली जाएंगी. इससे पहले सरकार की पॉलिसी के मुताबिक बच्चों को पहली से आठवीं कक्षा तक फेल करने का प्रावधान नहीं था.

शिक्षामंत्री ने ये भी कहा कि बच्चों को फेल ना करने की पॉलिसी की वजह से शिक्षा का स्तर काफी नीचे चला गया हैं, छात्र 8वीं कक्षा तक बिना फेल हुए ही पहुंच जाते हैं, जो ठीक से पढ़ लिख भी नहीं सकते हैं, वो दसवीं कक्षा तक भी पहुंच जाते हैं.

गुजरात सरकार के इस फैसले का असर सरकारी स्कूलों के छात्रों में देखने को मिलेगा. इस नये बदलाव के तहत ये भी किया गया है कि अगर कोई बच्चा पांचवीं या आठवीं में फेल होने के बाद दूसरे स्कूल में एडमिशन के लिए जाता है तो वहां उसे उम्र के आधार पर नहीं बल्कि उसकी शिक्षा के आधार पर ही इन कक्षाओं में दाखिला मिलेगा. सरकार को उम्मीद है कि इस नये परीक्षा सिस्टम से बच्चों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा. साथ ही दसवीं बोर्ड के नतीजों में बढ़ोत्तरी होगी.

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