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एक कर, एक बाजार और एक राष्ट्र: इन 10 बातों से GST को समझिए

देश अब नई कर व्यवस्था में है. आधी रात को संसद के ऐतिहासिक समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री मोदी ने जीएसटी को लॉन्च किया. पीएम मोदी ने इसे गुड एंड सिंपल टैक्स का नाम दिया तो राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे भारतीय लोकतंत्र का प्रतीक बताया.

इन 10 बातों से GST को समझें इन 10 बातों से GST को समझें

देश अब नई कर व्यवस्था में है. आधी रात को संसद के ऐतिहासिक समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री मोदी ने जीएसटी को लॉन्च किया. पीएम मोदी ने इसे गुड एंड सिंपल टैक्स का नाम दिया तो राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे भारतीय लोकतंत्र का प्रतीक बताया. जीएसटी को कर क्रांति और आर्थिक क्रांत बताया जा रहा है. नजर डालते हैं जीएसटी से जुड़े 10 तथ्यों पर...

1. जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स की शुरुआत के साथ ही भारत दुनिया के उन कुछ गिने चुने देशों में शामिल हो गया है जिनमें राष्ट्रीय स्तर पर एक बिक्री कर लागू है.

2. जीएसटी के लागू होने के साथ ही देश में केन्द्र और राज्यों के स्तर पर लगने वाले एक दर्जन से अधिक कर समाप्त हो गए हैं. अब उनके स्थान पर केवल जीएसटी लगेगा.

3. जीएसटी की चार दरें 5, 12, 18 और 28% हैं. अनाज समेत कई सामानों पर जीएसटी 0 फीसदी रहेगा यानी टैक्स मुक्त कर दी गई हैं.

4. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी से एक कर, एक बाजार और एक राष्ट्र का सपना पूरा हुआ. जेटली ने कहा कि भारत में अब केन्द्र और राज्य सरकारें मिलकर साझी समृद्धि के लिये काम करेंगे.

5. जीएसटी को आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा कर सुधार माना जा रहा है. इसे आर्थिक क्रांति का नाम दिया जा रहा है.

6. जीएसटी से देश की 2,000 अरब की अर्थव्यवस्था और 1.3 अरब लोग सभी एक साथ जुड़ जायेंगे और पूरा देश एक साझा बाजार बन जायेगा.

7. जीएसटी के आइडिया के सामने आने के बाद इस समूची प्रक्रिया को पूरा होने में 17 सालों का लंबा समय लगा.

8.जीएसटी से वर्तमान बहुस्तरीय कर व्यवस्था समाप्त होगी और कर के उपर कर लगने से माल की लागत पर बढ़ने वाला बोझ भी समाप्त होगा.

9. जीएसटी लागू होने के साथ ही 31 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश एक साथ जुड़ गए. टोल नाकाओं पर लंबी कतारें भी समाप्त हो गईं.

10. पीएम मोदी ने कहा कि जीएसटी एक पारदर्शी और साफ-सुथरी प्रणाली है जो कालेधन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाएगी और एक कार्य संस्कृति को आगे बढ़ाएगी. वहीं राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसे भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूत करने वाली प्रक्रिया बताई.

 

 

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