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CWG 2018: देश को पहला GOLD दिलाने वाली मीराबाई चानू कभी छोड़ना चाहती थी खेल, ये थी वजह

भारत के लिए कॉमनवेल्थ 2018 में पहला गोल्ड जीतने वाली मीराबाई चानू कभी इस वजह से छोड़ना चाहती थी खेल.

मीराबाई चानू मीराबाई चानू

ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रहे 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू ने भारत के लिए पहला गोल्ड जीता. उन्होंने स्नैच में 86 का स्कोर किया और क्लीन एंड जर्क में 110 स्कोर करते हुए कुल 196 स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. बता दें, चानू का जन्म मणिपुर की राजधानी इंफाल में 8 अगस्त 1994 को पैदा हुआ. उनका पूरा नाम 'साइखोम मीराबाई चानू' है. उनकी उम्र 23 साल है.

भले ही आज चानू से गोल्ड हासिल कर देश का नाम रोशन कर दिया है लेकिन एक समय था जब वह खेल की दुनिया छोड़ना चाहती थी. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार एक समय था जब चानू डिप्रेशन में चली गईं थी और उन्हें हर हफ्ते मनोवैज्ञानिक के सेशन लेने पड़ते थे.साल 2016 में हुए विश्व चैंपियनशिप में कर्णम मल्लेश्वरी के बाद गोल्ड मेडल जीतने वाली वह दूसरी भारतीय बनी थी. जिसके बाद वह काफी हताश थी. इस निराशा से उबरने में मुझे काफी समय लगा.

मीडिया रिपोर्ट की माने तो उस दौरान चानू ने खेल को अलविदा कहने का मन बना लिया था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और फिर खेल की दुनिया में जबरदस्त वापसी की. वहीं आज गोल्ड जीतने के बाद उनके मन को तसल्ली मिली जिसका दर्द वह 2016 से झेल रही थीं.

CWG 2018: वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने भारत को दिलाया पहला गोल्ड

आपको बता दें, मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में पिछले दो दशक से अधिक समय में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय हैं. जहां उन्होंने स्नैच में 85 किलो और क्लीन एंड जर्क में 109 किलो वजन उठाया था. उन्होंने 48 किलो वर्ग में कुल 194 किलो वजन उठाकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था.

(वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के दौरान की तस्वीर)

बता दें. मीराबाई बचपन से ही काफ़ी हुनरमंद थीं. वेटलिफ्टिंग में बचपन से उन्हें खास सुविधाएं नहीं मिली थी लेकिन उनका जुनून और बुलंद हौसला गोल्ड जीतने के लिए काफी है. वहीं अगर उनकी  हॉबी की बात करें तो उन्हें डांस करना पसंद है. साथ ही उनके पसंदीदा अभिनेता सलमान खान है.

इतनी कठिन ट्रेनिंग लेकर मीराबाई चानू बनीं 'GOLD' मेडेलिस्ट

ऐसे करती थीं ट्रेनिंग

जिस गांव से मीरा है वहां कोई ट्रेनिंग सेंटर नहीं था. इसलिए ट्रेनिंग करने के लिए वह 50-60 किलोमीटर दूर जाया करती थीं. एक खिलाड़ी के तौर पर उन्हें डाइट में रोज़ाना दूध और चिकन चाहिए था, लेकिन एक मध्यम परिवार से ताल्लुक रखने वाली चानू के लिए ये बेहद मुश्किल था. वहीं सुविधाओं की कमी को भारत की इस बेटी ने अपनी तैयारियों के बीच में नहीं आने दिया.

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