जामिया मिल्लिया इस्लामिया के दीक्षांत समारोह में 4280 स्टूडेंट्स को डिग्री और डिप्लोमा दिए गए. अलग-अलग कोर्सेज में टॉप करने वाले 162 स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल मिले. 223 रिसर्च स्कॉलर्स को पीएचडी भी प्रदान की गई.
दीक्षांत समारोह के चीफ गेस्ट राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस मौके पर कहा कि भारत में कई संस्थानों में क्वॉलिटी एजुकेशन की कमी के कारण छात्र विदेशों का रूख करते हैं. उन्होंने शिक्षा प्रणाली में बदलाव पर जोर दिया ताकि प्रतिभाओं को अपने देश में रोका जा सके और विदेशों से प्रतिभाओं को लाया जा सके.
उन्होंने कहा, ‘हमारी शिक्षा व्यवस्था में कई परिवर्तन करना समय की जरूरत है. कक्षाओं में बदलाव, शिक्षकों की सीट को भरने, विदेशों से प्रतिभाओं को आकर्षित करने और पाठ्यक्रम की समीक्षा एवं बदलाव सहित कुछ आधारभूत ढांचे को दुरूस्त करने की जरूरत है.’
उन्होंने कहा कि भले ही 723 से ज्यादा विश्वविद्यालय और 37 हजार कॉलेज हैं लेकिन गुणवत्ता की कमी से छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा नहीं मिल पा रही है और प्रतिभावान छात्र विदेशों में पढ़ने के लिए पलायन कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि प्रमुख संस्थानों को रेटिंग प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और सक्रिय रूप से अपनाना चाहिए क्योंकि कोई भी भारतीय संस्थान दुनिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में शामिल नहीं है जबकि वे ‘रैंकिंग परियोजना’ से बेहतर हैं.