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एक तिहाई बच्चों को नहीं पता, देश की राजधानी क्या है?

शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली गैर सरकारी संस्था(NGO) प्रथम ने देश में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा का हाल बताने वाली सलाना रिपोर्ट जारी की है.

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प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो

शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली गैर सरकारी संस्था (NGO) प्रथम ने देश में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा का हाल बताने वाली सलाना रिपोर्ट जारी की है. यह संस्था वर्ष 2005 से हर साल, एन्युअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) जारी करती आ रही है. असर में बच्चों के स्कूल में नामांकन, बुनियादी पढ़ाई-लिखाई की क्षमता और बेसिक गणित करने की क्षमता के बारे में बताया जाता है.

हालांकि इस बार की रिपोर्ट में ऐसे युवाओं की बात की गई है जो 14 से 18 आयु वर्ग के बीच आते हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक इस वक्त देश में इस आयु वर्ग के दस करोड़ युवा हैं. 156 पेज की इस रिपोर्ट में कई अहम जानकारियां दी गई हैं.

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- असर 2017 के मुताबिक इस आयु वर्ग (14-18) के 86 प्रतिशत युवा स्कूल या कॉलेज से जुड़े हुए हैं. इसका मतलब हुआ है कि 14 प्रतिशत युवा अभी भी स्कूल-कॉलेज से दूर हैं.

- इस ऐज ग्रुप के आधे से ज्यादा युवा (54 प्रतिशत) क्लास दस या उससे नीचे के क्लास में पढ़ते हैं. बाकि के 25% कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं में पढ़ रहे हैं. 6 प्रतिशत युवा किसी अंडरग्रेजुएट या अन्य डिग्री कोर्स में इन्रौल हैं. साथ ही 14 प्रतिशत युवा ऐसे हैं जो फिलहाल किसी भी क्लास में नहीं हैं.

- रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि 36 फीसदी लोगों को देश की राजधानी के बारे में पता नहीं है.

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- करीब 25 फीसदी युवा ऐसे हैं, जो अपनी भाषा में एक सरल पाठ को धारा प्रवाह रूप में नहीं पढ़ सकते. इसके अलावा आधे से ज्यादा युवा ऐसे हैं, जो गणित का भाग करने में कठिनाई का सामना करते हैं.

- केंद्र सरकार ने 2015 में बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ योजना शुरू की थी लेकिन पिछले साल की यह रिपोर्ट बताती है कि बढ़ती उम्र के साथ ज्यादातर लड़कियां, लड़कों की तुलना में स्कूली सिस्टम से बाहर हो जाती हैं. 18 वर्ष की आयु वर्ग की 32 प्रतिशत लड़कियां स्कूल से बाहर रह जा रही हैं जबकि इस एज ग्रूप के 28 प्रतिशत लड़के स्कूल से बाहर रह रहे हैं. 14 वर्ष की आयु वर्ग में यह अंतर ज्यादा नहीं है.

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- 14 वर्ष की आयु में केवल 5 प्रतिशत युवा ऐसे हैं जो स्कूली सिस्टम से बहार हैं लेकिन 18 वर्ष की आयु तक यह आंकड़ा 30 प्रतिशत हो जाता है.

- सरकार अपनी योजनाओं में वोकेशनल कोर्सेस पर बहुत ज़ोर दे रही हैं लेकिन इस रिपोर्ट की मानें तो इस आयु वर्ग के 5 प्रतिशत युवा ही वोकेशनल कोर्स कर रहे हैं. वोकेशनल कोर्स कर रहे युवाओं में से ज्यादातर कम अवधि में होने वाले कोर्स कर रहे हैं. इस कोर्स को करने वाले युवाओं से से 34 प्रतिशत ऐसे कोर्स में इनरौल हैं जो 3 महीने या उससे कम में पूरे हो जाते हैं. 25 प्रतिशत युवा ऐसे कोर्स में इनरॉल हैं जो 4 से 6 महीने में पूरे होते हैं.

- इस रिपोर्ट से यह भी जानकारी मिली है कि इस आयुवर्ग के 42 प्रतिशत युवा पढ़ाई के साथ-साथ काम भी कर रहे हैं. जो काम कर रहे हैं उनमें से 79 प्रतिशत खेती का काम करते हैं. इसके साथ हीं 77 प्रतिशत लड़के और 89 प्रतिशत लड़कियां घर के काम भी करती हैं.

 

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