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भारत के इन 10 शहरों में भूकंप के आने की संभावना है सबसे ज्यादा

नेपाल के 7.9 मेग्नीटयूड के भूकंप ने दुनिया को हिला कर रख दिया है. भारत में भी काफी जगह ऐसा हैं जहां भूकंप आते रहते हैं. वर्ल्ड बैंक और यूनाइटेड नेशन की रिपोर्ट के एक अनुमान के मुताबिक 2050 तक भारत के करीब लाखों लोग भूकंप और तूफान के कारण बेघर होंगे.

नेपाल के 7.9 मेग्नीटयूड के भूकंप ने दुनिया को हिला कर रख दिया है. भारत में भी काफी जगह ऐसा हैं जहां भूकंप आते रहते हैं.  वर्ल्ड बैंक और यूनाइटेड नेशन की रिपोर्ट के एक अनुमान के मुताबिक 2050 तक भारत के करीब लाखों लोग भूकंप और तूफान के कारण बेघर होंगे.

सेस्मिक जोनिंग मैपिंग में भारत को 4 स्तरों में बांटा गया है, एक तरह से हम कह सकते हैं कि भारत 4 सेस्मिकजोन्स में बंटा हुआ है. जोन-2, जोन-3, जोन-4, जोन-5. जोन-5 ऐसा क्षेत्र है जहां भूकंप आने की आशंका सबसे ज्यादा है. वहीं जोन-2 ऐसा क्षेत्र है जहां भूकंप आने की आशंका सबसे कम होती है. इसी के आधार पर आइए नजर डालते हैं भारत के ऐसे शहरों पर जहां भूकंप आने की आशंका सबसे ज्यादा है.

जोन-5: जोन-5 ऐसा क्षेत्र होता है जहां सबसे ज्यादा भूकंप का खतरा होता है. इसमें हिमालय का केंद्र, कश्मीर और कच्छ का रन शामिल हैं.
जोन-4: इस जोन को सबसे ज्यादा नुकसान वाला इलाका कहा जाता है. इस जोन में दिल्ली, जम्मू कश्मीर और महाराष्ट्र के इलाके शामिल हैं.
जोन-3: इस जोन को मोडरेट डैमेज रिस्क जोन कहते हैं इस जोन में अंडमान निकोबार, बेस्टर्न हिमालय के भाग शामिल हैं.
जोन-2: लो डैमेज रिस्क जोन कहते हैं.

1.गुवाहाटी (असम)
गुवाहाटी (असम) जोन-5 के सेस्मिक जोन में आता है. यह ऐसा क्षेत्र है जहां भूकंप आने की आशंका सबसे ज्यादा है. इससे पहले भी यहां कई बार भूकंप आ चुके हैं. गुवाहाटी में कई बार भूकंप की भविष्यवाणी होती रहती है. यही वजह है कि नॉर्थ-ईस्ट के भाग भी इससे प्रभावित होते रहते हैं.

2.श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर)
जम्मू-कश्मीर राज्य के कई शहर सेस्मिक जोन-5 में आते हैं. कश्मीर घाटी के कई इलाके जैसे बारामुल्ला, कुपवारा, बांदीपुरा सेस्मिक जोन-5 के अंदर आते हैं. इन इलाकों में राज्य की 50 फीसदी जनसंख्या रहती है. बाकि का लद्दाख और जम्मू का क्षेत्र सेसस्मिक जोन-4 के अंदर आता है जहां पर भी भूकंप की आशंका सबसे ज्यादा होती है. श्रीनगर की बात करें तो यह इलाका हिमालय के काफी करीब है इसलिए यहां पर भी भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है.

3.दिल्ली: दिल्ली जोन-4 में आती है. 1720 के बाद से दिल्ली 5 मेग्नीट्यूड के करीब 5 भूकंपों को सह चुकी है. दिल्ली में यमुना के पास के इलाकों में भूकंप आने की आशंका सबसे ज्यादा होती है.  दिल्ली के साउथ-वेस्टर्न आउटसर्किट जैसे छतरपुर बेसिन और रिज एरिया में भूकंप आने की आशंका सबसे ज्यादा है.

4.मुंबई (महाराष्ट्र) : हम सभी जानते हैं कि मुंबई समुद्र तट के पास है इसलिए यहां सुनामी और तूफान आने की आशंका सबसे ज्यादा है. सेस्मिक जोन के हिसाब से देखें तो यह जोन-4 में आता है. गुजरात से लगते हुए हैं मुंबई के कई इलाके में हल्के भूकंप आते ही रहते हैं. आपको बता दें कि पिछले 20 सालों में मुंबई में जिन बिल्डिंग का निर्माण हुआ है वो मुंबई के सेस्मिक जोन-4 के तथ्य को ध्यान में रख कर किया गया है.

5.चेन्नई (तमिलनाडु) : चेन्नई पहले जहां सेस्मिक जोन-2 में था वही अब सेस्मिक जोन-3 में आ गया है. सेस्मिक मैपिंग के अनुसार वेस्टर्न भाग में जो केरल की सीमा से लगता हुआ है जोन-3 में आ गया है. सितंबर 2000 में 5.6 रिक्टर सेक्ल का भूकंप यहां आ चुका है. आपको बता दें कि तमिलनाडु में 2004 में सुनामी भी आया था.

6.पुणे (महाराष्ट्र)

7.कोच्चि (केरल)

8.कोलकाता (पश्चिम बंगाल)

9.तिरूवंतपुरम (केरल)

10.पटना  (बिहार)
(सौजन्य: नेश्नल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी)

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