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एजुकेशन

दिल्ली में पैदा हुए मुशर्रफ, PAK में ऐसे लिया था फौज में दाखिला

दिल्ली में पैदा हुए मुशर्रफ, PAK में ऐसे लिया था फौज में दाखिला
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पाकिस्तान के 10वें राष्ट्रपति रहे परवेज मुशर्रफ को फांसी की सजा मुकर्रर की गई है. उन्हें साल 2007 में देश में इमरजेंसी लगाने के जुर्म में ये सजा दी गई है. पाकिस्तान सेना के जनरल रहे परवेज मुशर्रफ ने 2008 में अपने पद से इस्तीफा दिया था. आइए जानें- दिल्ली में जन्म लेने वाले परवेज मुशर्रफ कितना पढ़े-लिखे हैं.

Image: Reuters
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परवेज मुशर्रफ का जन्म 11 अगस्त 1943 को ब्रिटिश राज के दौरान दिल्ली में हुआ था. उनका परिवार उर्दू भाषी था. मुशर्रफ के पिता सैयद मुशर्रफुद्दीन और मां बेगम ज़रीन मुशर्रफ तब दिल्ली में ही रह रही थीं. नहर वाली हवेली में मुशर्रफ का बड़ा परिवार रहता था. सुन्नी मुसलमान सैयद मुशर्रफुद्दीन ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से स्नातक किया और सिविल सेवा में प्रवेश किया जो ब्रिटिश शासन के तहत एक अत्यंत प्रतिष्ठित करियर था.

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परवेज मुशर्रफ के पिता सरकारी अधिकारियों के परिवार से आए थे. क्योंकि उनके परदादा टैक्स कलेक्टर थे जबकि उनके नाना क़ाज़ी (न्यायाधीश) थे. 1920 के दशक में पैदा हुईं मुशर्रफ की मां ज़रीन लखनऊ में पली-बढ़ीं और वहीं से अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की थी. इसके बाद वो दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज में पढ़ीं, जहां से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की उपाधि ली. लेकिन शादी के बाद परिवार की देखभाल में लग गईं.

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मुशर्रफ अपने परिवार में तीन भाइयों में से दूसरे नंबर पर थे. उनके बड़े भाई डॉ जावेद मुशर्रफ़ एक अर्थशास्त्री हैं जो रोम में रहते हैं. वहीं छोटे भाई डॉ. नावेद मुशर्रफ इलिनोइस संयुक्त राज्य अमेरिका में एनेस्थेसियोलॉजिस्ट हैं.

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दिल्ली में मुशर्रफ के पहले घर जहां उन्होंने बचपन गुजारा उसे नहर वाली हवेली कहा जाता था, जिसका शाब्दिक अर्थ नहर-किनारे का घर है. उनके अगले ही दरवाजे पर सर सैयद अहमद खान का परिवार रहता था.

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मुशर्रफ की उम्र जब चार साल की थी, उसी वक्त भारत को आजादी मिली और साथ ही मुल्क दो हिस्सों में बंट गया. पाकिस्तान भारत के मुसलमानों के लिए नई जगह बनी. मुशर्रफ के पिता पाकिस्तान सिविल सर्विसेज में शामिल हो गए और पाकिस्तानी सरकार के लिए काम करने लगे. बाद में उनके पिता विदेश मंत्रालय में शामिल हो गए और तुर्की में कार्यभार संभाला. मुशर्रफ ने अपनी आत्मकथा इन द लाइन ऑफ फायर: ए मेमॉयर में अपने बचपन के तमाम अनुभव लिखे हैं.

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साल 1949 में मुशर्रफ का परिवार अंकारा चला गया, जब उनके पिता पाकिस्तान से तुर्की में राजनयिक प्रतिनियुक्ति का हिस्सा बने. फिर वो वापस लौट आए और कराची के सेंट पैट्रिक स्कूल में पढ़ाई की, इसके बाद लाहौर के फॉर्मन क्रिश्चियन कॉलेज विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया. मुशर्रफ का सबसे प्रिय विषय गणित था, लेकिन बाद में उन्होंने अर्थशास्त्र में रुचि लेनी शुरू की.

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1961 में 18 साल की उम्र में मुशर्रफ काकुल में पाकिस्तान सैन्य अकादमी में दाखिल हुए. पीएमए और प्रारंभिक संयुक्त सैन्य परीक्षण में अपने कॉलेज के वर्षों के दौरान मुशर्रफ ने पाकिस्तान वायु सेना के पीक्यू मेहंदी और नौसेना के अब्दुल अजीज मिर्जा के साथ एक कमरा साझा किया.

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अपने दोस्तों के साथ मुशर्रफ ने शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और अधिकारी-प्रशिक्षण पास किए. इस तरह तीनों का संयुक्त सैन्य अधिकारियों द्वारा साक्षात्कार लिया गया था, जिन्हें कमांडेंट के रूप में नामित किया गया था.

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साल 1964 में मुशर्रफ ने अली कुली खान और उनके आजीवन दोस्त अब्दुल अजीज मिर्जा के साथ 29वीं पीएमए लॉन्ग कोर्स की अपनी कक्षा में स्नातक की डिग्री हासिल की.

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यहां उन्हें दूसरे लेफ्टिनेंट के रूप में आर्टिलरी रेजिमेंट में कमीशन किया गया था और भारत-पाकिस्तान सीमा के पास तैनात किया गया था. आर्टिलरी रेजिमेंट में इस समय के दौरान मुशर्रफ ने कठिन समय में भी पत्र और टेलीफोन के माध्यम से मिर्ज़ा के साथ अपनी घनिष्ठ मित्रता और संपर्क बनाए रखा.

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