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असहयोग आंदोलन की देन है जामिया यूनिवर्सिटी, जानें इतिहास

असहयोग आंदोलन की देन है जामिया यूनिवर्सिटी, जानें इतिहास
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नये नागरिकता कानून के खिलाफ उतरने के बाद से ही जामिया मिल्लिया इस्लामिया आज पूरे देश में चर्चा में है. आजादी के देशव्यापी असहयोग और खिलाफत आंदोलन से जन्मी इस यूनिवर्सिटी का आजादी की लड़ाई में बड़ा योगदान रहा है. विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो नजमा अख्तर ने सोमवार को अपील करते हुए कहा कि राष्ट्रीय आंदोलनों की ये यूनिवर्सिटी देन है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया को बदनाम न करें. आइए जानें- जामिया मिल्लिया इस्लामिया का पूरा इतिहास, ब्रिटिश काल में क्या थी इस विश्वविद्यालय को बनाने की जरूरत और क्या थी इसकी भूमिका. अभी क्यों हो रही इस विश्वविद्यालय की चर्चा.
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साल 1920 में ब्रिटिश शासन के दौरान जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नींव पड़ी थी. 1988 में भारतीय संसद के एक अधिनियम द्वारा इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया. दिल्ली के सर सरवर जंग ने इस विश्वविद्यालय को डिजाइन किया.
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया एक उर्दू नाम है जिसका हिंदी में अर्थ देखें तो जामिया यानी विश्वविद्यालय, मिल्लिया यानी राष्ट्रीय और इस्लामिया यानी इस्लामिक इस तरह ये एक राष्ट्रीय इस्लामिक यूनिवर्सिटी है जहां मुस्लिम समुदाय के लिए 70 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं.
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ये यूनिवर्सिटी साल 1920 में अलीगढ़ में स्थापित की गई थी. सरोजनी नायडू ने एक बार कहा था कि इस विश्वविद्यालय का एक-एक पत्थर बलिदान की निशानी है. इसके संस्थापक नेताओं में से मुख्य तौर पर अली ब्रदर्स के नाम से मशहूर मुहम्मद अली जौहर और शौकत अली थे.
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जामिया की नींव उपनिवेशवाद विरोधी इस्लामी सक्रियता और पश्चिमी शिक्षित भारतीय मुस्लिम बुद्धिजीवियों की आजादी की आकांक्षा जैसी दो प्रवृत्तियों को मिलाकर की गई. इन दोनों प्रवृत्तियों ने एक उत्प्रेरक के रूप में महात्मा गांधी के साथ मिलकर काम किया.
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कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया को भारत के सबसे प्रगतिशील शैक्षिक संस्थानों में से एक कहा था. गांधी जी ने उस दौरान आह्वान किया कि सभी ब्रिटिश औपनिवेशक शासन द्वारा चलाए जा रहे सभी शैक्षणिक संस्थानों का विरोध करें.
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गांधी जी की इस कॉल का जवाब देते हुए राष्ट्रवादी शिक्षकों और छात्रों ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को छोड़ दिया.
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ये सभी समर्थक ब्रिटिश झुकाव का विरोध कर रहे थे. इस आंदोलन का नेतृत्व मौलाना महमूद हसन, मौलाना मोहम्मद अली, हकीम अजमल खान, डॉ मुख्तार अहमद अंसारी और अब्दुल माजिद ख्वाजा कर रहे थे.
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इंडियन नेशनल कांग्रेस के राष्ट्रवादी नेता अबुल कलाम आज़ाद इस विश्वविद्यालय के मुख्य प्रारंभिक संरक्षकों में से एक थे. मोहम्मद अली जौहर जामिया के पहले कुलपति बने. ज़ाकिर हुसैन ने 1927 में सबसे अशांत समय में विश्वविद्यालय को संभाला. उनकी मृत्यु के बाद, उन्हें विश्वविद्यालय के परिसर में ही दफनाया गया जहां उनका मकबरा आज भी जनता के लिए खुला है.
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इसलिए हो रही चर्चा

15 दिसंबर को जामिया इलाके में सिटिजनशिप एक्ट के विरोध में हुई हिंसा में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों पर तोड़फोड़ का आरोप लगा. इसके बाद देर रात लाइब्रेरी में तोड़फोड़ और छात्रों के साथ पुलिस की झड़प का मुद्दा सामने आया. जिस पर विश्वविद्यालय ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि पुलिस बिना इजाजत लिए कैंपस में घुसी और मारपीट की. विश्वविद्यालय प्रशासन इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है.
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