Republic Day Parade: 73वें गणतंत्र दिवस परेड में शिक्षा मंत्रालय की झांकी ने भारत के समृद्ध शिक्षा इतिहास और 'Vedas to Metaverse: National Education Policy 2020' विषय के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया. झांकी में वेदों और मेडिटेशन के साथ-साथ मेटावर्स का डिस्प्ले भी शामिल किया गया.
भारत सरकार के केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ सुभाष सरकार ने ट्वीट किया, "वेदों से लेकर मेटावर्स तक, भारतीय शिक्षा प्रणाली अतीत को वर्तमान से जोड़ रही है और भविष्य को गले लगाने वाली एक नई तकनीक का निर्माण कर रही है."
From Vedas to metaverse, the Indian education system is bridging the past with the present and creating a new future embracing technology.
The tableau of the showcasing the vision of during the 73rd parade.
— Dr. Subhas Sarkar (@Drsubhassarkar)
ऐसी रही शिक्षा मंत्रालय की झांकी
शिक्षा और कौशल विकास मंत्रालय की झांकी में आगे के हिस्से में प्रचाीन शिक्षा पद्यति को दर्शाया गया. भारत में शिक्षा को वेदों और गुरुकुल प्रणाली के तौर पर नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों से शुरू किया गया था, जहां दुनिया भर से छात्र अध्ययन करने आते थे. झांकी के पिछले हिस्से में मस्तिष्क के आकार के एक चमकते हुए बल्ब के माध्यम से नवीनता के पहलुओं को दिखाया गया है. विभिन्न उम्र के छात्रों ने मॉडल को कौशल विकास, वैज्ञानिक शिक्षा, वर्चुअल रिएलिटी जैसी नवीनतम तकनीकों के साथ दर्शाया. झांकी के डिस्प्ले में बहु-विषयक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार, स्टार्टअप, रोबोटिक्स और मेटावर्स शामिल किए गए.
क्या है मेटावर्स?
मेटावर्स (Metaverse) एक ऐसा स्थान है जिसमें वास्तविक दुनिया, आभासी दुनिया, ऑगमेंटेड वर्चुअल रिएलिटी और इंटरनेट एक साथ आते हैं. मेटावर्स में AR और VR के उपयोग के माध्यम से अधिक जीवंत बनाए गए इजिटल स्पेस शामिल हैं. यहां अपने 'अवतार' के रूप में लोग दूसरों के साथ बातचीत कर सकते हैं. भविष्य में इंटरनेट कैसा दिख सकता है, इसकी अवधारणा का वर्णन करने के लिए मेटावर्स का उपयोग किया जाता है. दिसंबर 2021 में, Meta के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा था कि भारत मेटावर्स के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिसे उन्होंने 'इंटरनेट का अगला संस्करण' भी कहा था.