मोबाइल-टीवी और इंटरनेट के जमाने में लोगों की पढ़ने में रुचि काफी घट गई है. इस रुचि को लोगों में बढ़ाने के लिए तमिलनाडु सरकार ने एक नई व्यवस्था की है. इस व्यवस्था के तहत सरकार पढ़ने के इच्छुक लोगों को उनके घर तक किताबें पहुंचाएगी.
सार्वजनिक पुस्तकालय निदेशालय प्रत्येक पुस्तकालय के लिए पांच स्वयंसेवकों का चयन करेगा और स्वयंसेवक पाठकों के दरवाजे पर किताबें पहुंचाएंगे और किताबों और पढ़ने के महत्व पर जनता के बीच जागरूकता पैदा करेंगे. अगले सप्ताह जिला स्तर पर पुस्तकालयाध्यक्षों की बैठक होगी और फिर स्वयंसेवकों के चयन की अधिसूचना जारी की जाएगी.
राज्य के सार्वजनिक पुस्तकालय निदेशालय ने एक बयान में कहा है कि यह योजना राज्य के 31 जिला केंद्रीय पुस्तकालयों, 300 पूर्णकालिक शाखा पुस्तकालयों, 1463 अन्य पुस्तकालयों और 706 ग्रामीण पुस्तकालयों में लागू की जाएगी. सार्वजनिक पुस्तकालय के पुस्तकालयाध्यक्ष मुकुंदराज ने एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि नवीनतम इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आने के चलते बीते कई सालों में राज्य भर में पढ़ने में गिरावट आई है और सरकार ने यह कदम बच्चों के लिए पढ़ने में रुचि बढ़ाने के लिए उठाया है. इससे युवा पीढ़ी के अलावा बच्चों और अन्य लोगों में समान रूप से पढ़ने को लेकर रुचि पैदा होगी.
पुस्तकालय विभाग के अनुसार, चयनित स्वयंसेवकों को कोई पारिश्रमिक नहीं दिया जाएगा और यदि वे पर्याप्त रूप से अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो उन्हें प्रति वर्ष 500 रुपये प्रदान किए जाएंगे. इस योजना के साथ तमिलनाडु सरकार उम्मीद कर रही है कि बड़ी संख्या में लोग किताबों और पुस्तकालयों में शामिल होने के लिए उत्सुक होंगे.
बता दें कि तमिलनाडु सार्वजनिक पुस्तकालय निदेशालय राज्य भर के 2,500 पुस्तकालयों में नूलंगम नानबारगल यानी फ्रेंड्स ऑफ लाइब्रेरी योजना शुरू करेगा. साल 2022-23 के बजट में तमिलनाडु के स्कूल शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी ने घोषणा की कि राज्य में नूलंगम नानबारगल योजना लागू की जाएगी ताकि लोगों की रीडिंग में रुचि जगे.