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Pariksha Pe Charcha 2023: पीएम मोदी के छात्रों को दिए वो 5 मंत्र, जो आपकी भी सोच बदल देंगे

Pariksha Pe Charcha 2023: शुक्रवार को दिल्ली के तालकटोरा स्‍टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों के सवालों का जवाब दिया. उन्होंने इस चर्चा को अपनी परीक्षा भी बताया और कहा कि आपके सवालों का जवाब देना मेरी भी परीक्षा जैसा है. इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने ये पांच ऐसी बातें कहीं जिसे हमें भी समझना चाहिए. ये वो मंत्र हैं जो छात्रों के साथ साथ अभ‍िभावकों और पेरेंट्स को भी सोचने पर मजबूर करते हैं.

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परीक्षा पे चर्चा 2023 में बोलते पीएम मोदी
परीक्षा पे चर्चा 2023 में बोलते पीएम मोदी

Pariksha Pe Charcha 2023: प्रधानमंत्री नरेंद्र मेादी शुक्रवार को परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में छात्रों, अभ‍िभावकों और टीचर्स को संबोध‍ित कर रहे थे. लगभग छह घंटे की इस चर्चा में उन्होंने कुछ ऐसी बातें कहीं जो आपको और हमें रुककर एक बार जरूर सोचनी चाहिए.

आप स्मार्ट हैं कि गैजेट ज्यादा स्मार्ट हैं? 

पहले तो खुद से ये सवाल कीजिए कि आप ज्यादा स्मार्ट हैं या गैजेट. कई बार आप खुद से स्मार्ट गैजेट को मान लेते हैं. आप यकीन कीजिए कि आप ज्यादा स्मार्ट हैं, गैजेट आप से स्मार्ट नहीं हो सकता है. आप जितना स्मार्ट होंगे, उसी से आप गैजेट का अपने हित में यूज कर पाएंगे. मुझे ये जानकर आश्चर्य है कि भारत में एवरेज छह घंटे लोग स्क्रीन पर लगाते हैं, जो इसका बिजनेस करते हैं, उनके लिए खुशी की बात है, लेकिन आपके लिए नहीं. 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कहीं न कहीं गैजेट आपको गुलाम बना देता है. परमात्मा ने हमें स्वतंत्र व्यक्त‍ित्व दिया है. हमें सेचत रहना चाहिए कि कहीं मैं इसका गुलाम तो नहीं हूं. आपने रेयरली मेरे हाथ में मोबाइल देखा होगा. मैंने उसके लिए समय तय कर रखा है. हमारे आरोग्य शास्त्र में फास्ट‍िंग का नियम है. आप हफ्ते में कुछ दिन या द‍िन में कुछ घंटे टेक्नोलॉजी से दूर रहिए. आप तय कीजिए कि एक दिन हमारी डिजिटल फास्ट‍िंग होगी. परिवार भी हमारे डिजिटल दुनिया मं फंस रहे. एक ही घर में सब रहे लेकिन सब मोबाइल में खोये हैं. इसलिए घर में एक एरिया तय कीजिए जो नो टेक्नोलॉजी जोन है, वहां आना है तो मोबाइल रखकर आओ. 

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जिंदगी में कदम दर कदम परीक्षा है, शार्टकट, कट यू शॉर्ट

परीक्षा में नकल पर उन्होंने कहा कि मेहनती छात्र सोचते हैं कि मैं इतनी मेहनत करता हूं लेकिन अगला चोरी करके नकल करके काम चला लेते हैं. अब तो बड़े गर्व से कहते हैं कि सुपरवाइजर को बुद्धू बना दिया. उन्होंने कहा कि ये जो मूल्यों में बदलाव आया हे वो बहुत खतरनाक है. कुछ ऐसे टीचर्स जो ट्यूशन क्लासेज चलाते हैं, वो भी मदद करते हैं ये सोचकर कि मैंने पैसे लिए हैं पेरेंट्स से मदद कर दूं. नकल करने वाले पढने में कैसे भी हों, नकल करने के तरीके ढूंढ़ने में बहुत क्र‍िएट‍िव होते हैं.

नकल की कॉपी बनाएंगे तो बहुत छोटे छोटे अक्षरों से बनाएंगे. जितना समय ये क्र‍िएट‍िविटी में लगाते हैं, उतना समय पढ़ाई में लगा देते तो अच्छा कर सकते थे. दूसरा ये सोचना चाहिए कि जिंदगी बहुत बदल चुकी है, जगत बहुत बदल चुका है. अब एक दो एग्जाम निकाल लिए और जिंदगी निकल गई, ये संभव नहीं है. आज आपको डगर-डगर एग्जाम देने हैं.कितनी जगह नकल करोगे. नकल करने वाला एकाध एग्जाम निकल जाएगा, लेकिन जिन्दगी नहीं बना पएगा. कहीं न कहीं सवाल उठेंगे. ये वातावरण बनाना होगा कि एकाध में नकल की तो निकल गए, लेकिन आगे शायद तुम जिंदगी में फंसे रहोगे. 

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जो कड़ी मेहनत करते हैं, उनसे कहूंगा क‍ि आपकी मेहनत आपकी जिंदगी में रंग लाएगी. हो सकता है कि कोई ऐसा एकाध आपसे दो चार नंबर ज्यादा ले आएगा लेकिन जिंदगी में आपकी रुकावट नहीं ला पाएगा. आप उसकी देखादेखी कभी उस रास्ते में मत चल पड़ना, हमें जीतते जीतते जिंदगी जीननी है, हमें शॉर्टकट की तरफ नहीं जाना चाहिए. आपने देखा होगा कि कुछ लोग ब्रिज होने के बावजूद पटरी कूदकर जाते हैं. उनके लिए लिखा रहता है कि शार्ट कट कट यू शॉर्ट. 

सामान्य लोग करते हैं असाधारण काम

पीएम मोदी ने कहा कि ज्यादातर लोग सामान्य होते हैं, असाधारण लोग बहुत कम होते हैं. अक्सर सामान्य लोग असामान्य काम करते हैं और जब सामान्य लोग असामान्य काम करते हैं तब वे ऊंचाई पर जाते हैं. उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि 2-3 साल पहले हमारी सरकार के विषय में लिखा जाता था कि इनके पास कोई अर्थशास्त्री नहीं है सब सामान्य हैं और पीएम को अर्थशास्त्र के बारे में कुछ नहीं पता. आज दुनिया में जब आर्थिक तुलना की गई तो, इसमें भारत को एक आशा की किरण के रूप में देखा जा रहा है. जिस देश को सामान्य कहा जाता था वे आज चमक रहा है. 

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पहले समझो-आलोचना कौन कर रहा है

प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों से कहा कि पहले ये समझो कि आलोचना कौन कर रहा है. जब कोई अपना किसी बात पर आपको कुछ कहता है तो यह आलोचना है, लेकिन अगर कोई दूसरा कहता है तो ये टोकाटोकी है. अगर आपका दोस्त कुछ सकारात्मक भाव से कहता है तो ये आलोचना है, लेक‍िन कोई गैर बोलता है बिना कुछ जाने बोलता है तो वो टोकाटोकी है. 

उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि आलोचना करने वाले आदतन करते रहते हैं, उनको एक बक्से में डाल दीजिए, उनका इरादा कुछ और होता है. उन्होंने आगे कहा कि घर में आलोचना नहीं होती है, क्योंकि आलोचना के लिए माता-पिता को बहुत ऑब्जर्व करना होता है. टीचर्स से मिलना होता है, आपके बारे में पूछना होता है, आपका स्क्रीन पर कितना टाइम जा रहा सब फॉलो करना हाता है. ये सब मां-बाप बारीकी से ऑब्जर्व करते हैं, फिर आप जब अच्छे मूड में होते हैं, अकेले होते हैं तो प्यार से बोलते हैं कि यहां थोड़ी सी कमी रह रही है, इसे ठीक कर लो. इसीलिए गुस्सा आपको टोकाटोकी पर आता है, आलोचना पर नहीं. 

किसी जिज्ञासु बच्चे को टोंके नहीं टीचर्स 

पीएम ने टीचर्स से कहा, हमारे शिक्षक बच्‍चों के साथ जितना अपनापन बनाएंगे, उतना बेहतर है. स्‍टूडेंट जब कोई सवाल पूछता है तो वह आपकी परीक्षा नहीं लेना चाहता, यह उसकी जिज्ञासा है. उसकी जिज्ञासा ही उसकी अमानत है. किसी भी जिज्ञासु बच्‍चे को टोकें नहीं. अगर जवाब नहीं भी आता है तो उसे प्रोत्‍साहित करें कि तुम्‍हारा प्रश्‍न बहुत अच्‍छा है. मैं अधूरा जवाब दूं तो यह अन्‍याय होगा. इसका जवाब मैं तुम्‍हें कल दूंगा और इस दौरान मैं खुद इसका जवाब ढ़ूंढूंगा. अगर शिक्षक ने कोई बात बच्‍चे को गलत बता दी, तो यह जीवनभर उसके मन में रजिस्‍टर हो जाएगा. इसलिए समय लेना गलत नहीं है, गलत बताना गलत है.

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