ओडिशा सरकार छह साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती, नर्सिंग महिलाओं और किशोरियों को न्यूट्रीशन स्कीम के तहत छोटी मछली उपलब्ध कराने की योजना बना रही है.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि सरकार की ओर से इसके लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं.
उन्होंने कहा कि मयूरभंज जिले के 50 आंगनवाड़ी केंद्रों पर परियोजना को शुरू करने के लिए गैर-लाभकारी संस्था वर्ल्ड फिश के साथ इसका करार किया गया है. बता दें कि मछली आयरन, जिंक, कैल्शियम, विटामिन (ए, बी, डी) से भरपूर होती है. इसके अलावा मछली में मिलने वाला विटामिन (ई) और ओमेगा -3 फैटी एसिड बच्चों, गर्भवती और नर्सिंग महिलाओं और किशोर लड़कियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है.
उन्होंने कहा कि इस स्कीम के लिए महिला स्वयं-सहायता समूहों से मछली खरीदी जाएगी, जिससे उनके लिए व्यावसायिक अवसर पैदा किए जाएंगे. फिर पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों के आधार पर इसे बढ़ाया जाएगा. बता दें कि वर्तमान में जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है. ऐसे में राज्य सरकार जरूरतमंदों को घर-घर राशन दे रही है, जिसमें छुआ (भुना हुआ बंगाल चना, गेहूं, मूंगफली और चीनी का पाउडर), सूजी का हलवा, मक्का का हलवा, रास का हलवा, गुड़ का लड्डू, बेसन के लड्डू और गर्म चटनी शामिल हैं.
इसके अलावा बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं और किशोरियों को पका हुआ भोजन भी दिया जा रहा है. उन्हें फल और जामुन के अलावा हर हफ्ते चार उबले अंडे भी प्रदान किए जाते हैं. अब नई योजना के तहत पंद्रह ग्राम मछली पाउडर आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की दैनिक मेन्यू में जोड़ा जाएगा.
इस प्रोग्राम के लिए आदिवासी जिले से दस महिला स्व-सहायता समूहों को लगाया गया है. वर्ल्ड फिश के महानिदेशक गैरेथ जॉनस्टोन ने कहा कि इन महिला स्वयं सहायता समूहों को केंद्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान की मदद से मछली पाउडर तैयार करने में एनजीओ से तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा सहायता और मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा.
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