दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली के लिए कुलपति की नियुक्ति के लिए चयन समिति द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है. दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि चयन समिति के द्वारा कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया में अनुच्छेद 14 का कोई उल्लंघन नहीं किया गया है.
दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका कुलपति पद के लिए आवेदन करने वालों में से एक डॉक्टर प्रशानशु द्वारा दायर की गई थी. याचिका में वीसी की नियुक्ति की प्रक्रिया को यह कहकर चुनौती दी गई थी कि ये नियमों का पालन किये बगैर मनमाने और भेदभाव पूर्ण तरीके से की गई है. इसके अलावा इसमें संविधान के अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन किया गया है
पिछले साल 11 अक्टूबर 2019 को नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली की चयन समिति के संयोजक के द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई थी जिसमें नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली (एनएलयूडी) मे वीसी के पद के लिए नामांकन आमंत्रित किए गए थे .इस साल 5 फरवरी को चयन समिति ने एक बैठक बुलाई और 25 फरवरी को सभी आवेदकों को साक्षात्कार के लिए बुलाने का निर्णय लिया गया.
याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाई कोर्ट में लगाई अपनी याचिका में कहा कि न्यूनतम पात्रता मानदंडों को पूरा करने के बावजूद उन्हें साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया गया. न ही उन्हें 5 फ़रवरी को उपस्थित होने के लिए कोई संचार मिला और न ही उन्हें कोई भी पत्र या ऐसा मैसेज दिया गया, जिसमें उनकी उम्मीदवारी की अस्वीकृति के लिए कोई आधार या कारण उजागर किया गया हो.
याचिकाकर्ता की कोर्ट में दलील थी कि गुणवत्ता के अधिकार के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया गया था जो अनुच्छेद 14 के तहत निहित है. लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को अस्वीकार करते हुए इस याचिका को खारिज कर दिया है.