scorecardresearch
 

जींस-टीशर्ट, टाइट कपड़े पहनकर बच्चों को पढ़ाने न आएं टीचर, यूपी के इस जिले में निर्देश लागू

स्कूल में पढ़ाने आ रहे टीचर जींस, टी-शर्ट या टाइट कपड़े पहनकर न आएं. ये निर्देश हैं उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के डीआईओएस के. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर कक्षा 6 से इंटर तक के किसी भी स्कूल-कॉलेज में कोई भी अध्यापक अगर जींस टी-शर्ट या फिर टाइट कपड़े पहनकर स्कूल में आता है तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी.

Advertisement
X
क्लासरूम की तस्वीर (aajtak.in)
क्लासरूम की तस्वीर (aajtak.in)

जींस टीशर्ट पहनकर स्कूलों में शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षकों को मुजफ्फरनगर जनपद में मुश्किलें उठानी पड़ सकती हैं. जिले के डीआईओएस ने चेतावनी दी है कि अगर कक्षा 6 से 12वीं तक के किसी भी स्कूल कॉलेज में कोई भी अध्यापक अगर जींस टीशर्ट या फिर टाइट कपड़े पहनकर स्कूल में आता है तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी. 

दरअसल, आपको बता दें कि विद्यालयों में अनुशासन को लेकर मुजफ्फरनगर के जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र कुमार ने यह आदेश जारी किया है. उनका कहना है कि स्कूलों में अब शिक्षक शालीन कपड़े पहनकर आएंगे. टीचर स्कूलों में चटकीले टाइट और जींस टीशर्ट पहन कर नहीं आएंगे. अगर कोई शिक्षक इन आदेशों का पालन नहीं करेगा तो उसपर कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही साथी महिला शिक्षिकाओं को भी चेताया गया है कि अगर वो साड़ियां सूट पहनकर अगर वो स्कूलों में आती हैं तो वो भी शालीन होनी चाहिए, बहुत टाइट नहीं, क्योंकि स्कूलों में बच्चे अध्यापकों का अनुसरण करते हैं जिसके चलते उन पर इन सब का गलत प्रभाव पड़ता है. 

इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए मुजफ्फरनगर के जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र कुमार ने बताया कि यह अनुशासन का मामला है और विद्यालयों में अनुशासन बहुत जरूरी है. हमें  अनुशासन की केवल बच्चों से ही अपेक्षा नहीं करनी चाहिए. अनुशासन की अपेक्षा हम शिक्षकों से भी करें क्योंकि जब वह अनुशासित होंगे तो जाहिर सी बात है इसका बच्चों पर भी असर अच्छा ही जाएगा. इसलिए यह अपेक्षा की गई है कि सभी शिक्षक शालीन कपड़े पहनकर अपने अध्यापन के लिए विद्यालय में आएं. 

Advertisement

कैसे होंगे टीचर्स के लिए शालीन कपड़े
शालीन का अर्थ है कि आप सादी शर्ट और पैंट पहनें. चटकीले-भड़कीले कपड़े जैसे जींस-टीशर्ट आदि न पहनें. इस तरह के लुक बच्चों पर गलत प्रभाव डालते हैं. इसमें टीचर की पर्सनैलिटी भी बहुत अच्छी नहीं लगती है. अगर आपको पहनना है तो आप इन्हें अपने पर्सनल यूज़ के लिए घर पर पहनें, अपने पर्सनल कार्यक्रमों में पहनें लेकिन स्कूल में हर एक टीचर को यह अनिवार्य होगा कि वह अपनी शर्ट और पैंट पहनकर आएगा. इसी तरह से हमारी जो महिला शिक्षक हैं वह भी शालीन कपड़ों में रहें. वो साड़ी पहने या सलवार कुर्ता जो भी पहनें, वो भी बहुत शालीन होना चाहिए. बहुत ज्यादा तड़क-भड़क या टाइट कपड़े ना हों.

इसका भी ध्यान रखा जाना बहुत जरूरी है कि अधिकतर जो शिक्षक हैं वह इस को फॉलो भी कर रहे हैं. लेकिन कुछ ही ऐसे शिक्षक और प्रिंसिपल हैं जो अभी भी टी-शर्ट और जींस पहने दिखाई देते हैं. मेरा यह अनुरोध है कि वह इस तरीके के कपड़े स्कूल में पहनकर ना आएं. वो इसे अपने घर पर पहनें और अगर आदेश का पालन सही प्रकार से नहीं होगा तो हम लोग इसमें पहले उसके लिए चेतावनी जारी करेंगे.

होगी बैड एंट्री, प्रमोशन या बोनस पर पड़ सकता है असर 
उसके बाद जो अनुशासनात्मक करवाई है जो विभाग द्वारा नियत है. आचरण संहिता के अंतर्गत आचरण नियमावली है, सभी के लिए इसका पालन करना बहुत जरूरी है. वरना हम कार्रवाई करने को विवश होंगे. इसमें पहले चेतावनी देकर उसको एक मौका दिया जाता है कि अपनी गलती सुधार ले. अगर वह सुधार नहीं करता है तो उसकी बैड एंट्री होगी. बैड एंट्री का आचरण निश्चित रूप से उसके प्रमोशन इंक्रीमेंट और बोनस इन सब चीजों पर उसका असर पड़ता है. अगर शैक्षिक संस्थाओं का प्रवेश अच्छा रहेगा तो उसका असर बहुत लंबे समय तक रहता है. 

Advertisement

प्रिंसिपल बोले, टीचर्स के लिए ड्रेस कोड जरूरी 
वहीं,  इस बारे में डीएवी इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल सुनील शर्मा का कहना है कि यह बहुत अच्छी बात है. एक अध्यापक के लिए ड्रेस कोड होना बहुत जरूरी है. वैसे ड्रेस कोड पहले भी था. मैं अपने विद्यालय की बात बता रहा हूं. हमारे यहां तो ड्रेस कोड पहले से ही लागू है. कोई भी शिक्षक जींस टीशर्ट में नहीं आता. सब पहले से ही प्रॉपर एड्रेस में आते हैं. शिक्षक एक आदर्श होता है बच्चों के लिए अध्यापक से बहुत अपेक्षाएं होती हैं,  इसलिए यह बहुत जरूरी है. बच्चे अध्यापक का अनुसरण करते हैं इसलिए अध्यापक को ऐसे कपड़े स्कूल में नहीं पहनने चाहिए, वो अपने घर में पहन सकते हैं. 

 

Advertisement
Advertisement