मेटा (Meta) ने साल 2026 की शुरुआत में अपनी सबसे बड़ी छंटनी में से एक करते हुए रियलिटी लैब्स डिवीजन के 1,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है. इस छंटनी से विभाग के करीब 10 फीसदी कर्मचारी प्रभावित हुए हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला मेटा की रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत देता है. कंपनी अब मेटावर्स और वर्चुअल रियलिटी (VR) पर कम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े प्रोडक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दे रही है.
मेटावर्स से हटकर AI पर फोकस
रियलिटी लैब्स वह डिवीजन है जो क्वेस्ट VR हेडसेट, वर्चुअल और ऑगमेंटेड रियलिटी टेक्नोलॉजी पर काम करता है. लेकिन इस डिवीजन को पिछले चार सालों में 70 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ है. इसी वजह से मेटा ने यहां खर्च घटाने और संसाधनों को दूसरी दिशा में लगाने का फैसला किया.
अब किन चीजों पर ध्यान दे रही है मेटा?
कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि मेटा इस दशक में बड़े पैमाने पर AI कंप्यूटिंग क्षमता तैयार करना चाहती है, ताकि वह OpenAI, Google और Microsoft जैसी कंपनियों से मुकाबला कर सके.
स्मार्ट ग्लास से मिली उम्मीद
हाल ही में लॉन्च हुए रे-बैन स्मार्ट ग्लास को लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. खबरों के मुताबिक, इनकी बिक्री ने कंपनी की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है. इसी वजह से मेटा मानती है कि AI से जुड़े पहनने वाले उपकरण (wearables) ज्यादा तेजी से लोगों तक पहुंच सकते हैं.
कंपनी का क्या है कहना ?
मेटा के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी मेटावर्स से कुछ निवेश हटाकर वियरेबल्स की ओर ले जा रही है और जो बचत होगी, उसे इसी साल नए प्रोडक्ट्स के विकास में लगाया जाएगा. वहीं, कंपनी के मुख्य तकनीकी अधिकारी एंड्रयू बोसवर्थ ने कहा कि मेटा अब मोबाइल और हल्के वियरेबल डिवाइस पर ज्यादा फोकस करेगी, क्योंकि यही तकनीक तेजी से लोगों द्वारा अपनाई जा रही है. यह छंटनी दिखाती है कि मेटा अब लंबे समय वाले मेटावर्स सपने से हटकर ज्यादा व्यावहारिक और जल्दी अपनाई जाने वाली AI तकनीकों की ओर बढ़ रही है. कंपनी का मानना है कि यही रास्ता भविष्य में ज्यादा टिकाऊ और मुनाफे वाला साबित हो सकता है.