एक समय ऐसा था जब बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी को सफलता का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता था और ये करियर की सफलता के रूप में देखा जाता था. रिज्यूमे पर FAANG यानी कि Facebook/Meta, Apple, Amazon, Netflix, Google जैसी कंपनी का नाम होना का मतलब था अच्छी सैलरी, शानदार ऑफिस और करियर की गारंटी. लेकिन समय के साथ ये भ्रम टूट रहा है.
सिलिकॉन वैली से लेकर बेंगलुरु तक, इंजीनियर और प्रोडक्ट लीडर अब यह सोचने लगे हैं कि असली सफलता क्या है. जो कभी सिर्फ पैसा और ब्रांड नाम देखते थे, अब वे स्थिरता और बैलेंस को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. आज कई लोग साफ कह रहे हैं कि मुझे FAANG कंपनियों का पैसा नहीं चाहिए.
सबसे सुरक्षित नौकरियां भी अब असुरक्षित
पहले बिग टेक कंपनियों को आर्थिक संकट से बचाव का सबसे भरोसेमंद मीडियम माना जाता था लेकिन अब यह धारणा टूट रही है. हाल ही में अमेजन ने दुनिया भर में लगभग 16,000 पदों को खत्म करने का ऐलान किया गया, जो पिछले साल की छंटनी के बाद हुआ. कुछ ही महीनों में कुल 30,000 कर्मचारियों की छंटनी की गई. कंपनी का कहना है कि इसका मकसद संचालन को आसान बनाना, नौकरशाही कम करना और आंतरिक नियंत्रण को बढ़ाना है. लेकिन कर्मचारियों के लिए ये सीधा सा मतलब है कि अब कोई डेजिग्नेशन, बैज या सैलरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. अमेजन अकेली नहीं है. आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में 1,12,000 से ज्यादा तकनीकी नौकरियां को खत्म कर दिया गया है. Meta, Google, Microsoft, Pinterest और Autodesk जैसी कंपनियों ने भी छंटनी की है.
नाम और प्रतिष्ठा से ज्यादा जरूरी स्थिरता
एक तकनीकी कर्मचारी का अनुभव बताता है कि अब केवल कंपनी का नाम या ज्यादा सैलरी भरोसे का पैमाना नहीं है. दो साल तक रोज नौकरी पर जाने से लोग थक गए हैं. आज के दौर पर ज्यादा सैलरी भी सुरक्षा नहीं दे पा रही है. कई लोग कम सैलरी लेकर भी सुरक्षित नौकरी पसंद कर रहे हैं.
क्यों FAANG खो रहा है अपनी पकड़?
महामारी के दौरान टेक कंपनियों में डिजिटल मांग में अचानक बहुत बढ़ देखने को मिली. इसे पूरा करने के लिए कंपनियों ने तेजी से भर्तियां की. लेकिन जैसे-जैसे हालात सामान्य हुआ कर्मचारियों की संख्या ज्यादा होने के कारण कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ गया और स्थिति अस्थिर लगने लगी और कंपनियों ने छंटनी का रास्ता चुना.
पैसा ना दे सका सुरक्षा
इसको कुछ इस तरह से समझते हैं. बेंगलुरु के 35 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर संजय का अनुभव इसे अच्छे से बताता है. FAANG कंपनी में नौकरी मिलने के बाद उनका वेतन दो साल के अंदर ही दोगुना हो गया. उन्होंने आलीशान अपार्टमेंट खरीद लिया, नई SUV खरीदी और शानदार जीवनशैली अपनाई. लेकिन फिर एक दिन अचानक कंपनी ने संजय को कुछ ही हफ्तों की सैलरी के साथ नौकरी से निकाल दिया. उस समय तो उन्हें समझ नहीं आया कि उनके साथ क्या हुआ लेकिन उन्होंने इसे लेकर कहा कि पैसा तो अच्छा था लेकिन नौकरी की सुरक्षा नहीं रही. परिवार की जिम्मेदारियों की वजह से अब उनके लिए स्थिरता सबसे बड़ी जरूरी है. जो लोग कभी FAANG में नौकरी पाने के लिए उत्साहित थे, अब वे लोग TCS, Infosys, HCLTech जैसी सुरक्षित कंपनियों या बैंकिंग या हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों को चुन रहे हैं. यहां पर आपके करियर की ग्रोथ धीमी हो सकती है लेकिन नौकरी सुरक्षित रहती है.
एक नया बदलाव
टीमलीज डिजिटल की CEO नीति शर्मा ने बताया कि यह बदलाव किसी भी तरह की महत्वाकांक्षा की कमी नहीं है, बल्कि मूल्यों और प्राथमिकताओं का नया इवेलुएशन है. वे बताती हैं कि युवा FAANG कंपनियों में नौकरी से इसलिए नहीं डर रहे, क्योंकि वे मेहनत नहीं करना चाहते बल्कि अब उन्हें बड़े ब्रांडों के फायदे और ऑफर काफी नहीं लगते. हालांकि, आज के युवा चाहते हैं कि उनका काम का असर दिखे, उनका योगदान महत्वपूर्ण हो और वे जल्द से जल्द सीखकर आगे बढ़ सकें. इसके चलते कई लोग अब स्टार्टअप, डीप-टेक कंपनियां, GCCs या अपने खुद के काम को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं, जहां सीखने की स्पीड काफी तेज है, जिम्मेदारी असली है और काम का असर साफ दिखता है.
अब भी कायम है FAANG का कमाल
बता दें कि FAANG कंपनियों का आकर्षण अब भी बना हुआ है. करियर की शुरुआत कर रहे युवाओं के लिए ये कंपनियां बेहतर सीखने के मौके, ग्लोबल अनुभव और रिज्यूमे में यूज होती है. जिन पर ज्यादा फाइनेंशियल या व्यक्तिगत दबाव नहीं है, उनके लिए कुछ समय के लिए यहां काम करना फायदेमंद हो सकता है. साल 2026 के बाद से तकनीकी उपलब्धि केवल ऑफर लेटर पर लिखे नाम या ब्रांड से नहीं बल्कि स्थिरता, मेहनत और असली योगदान से मापी जाएगी.