Bihar Board 12th 2023 Topper: बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) द्वारा आयोजित बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट की परीक्षा में सारण के तरैया में नेवारी की रहने वाली अदिति ने पूरे बिहार में साइंस फैकल्टी में तीसरा स्थान प्राप्त किया है. उनकी इस उपलब्धि से पूरे परिवार में उत्सव का माहौल है और उनके घर शुभचिंतकों का जमावड़ा लगा है. अदिती सहित सभी परिजन आने-जाने वालों का मुंह मीठा करवाने में ही लगे हैं.
सेल्फ स्टडी को बताया जरूरी
अदिति बिहार टॉपर से महज 3 नंबर पीछे रह गई हैं. इंटर साइंस टॉपर आयुषि नंदन के 474 नंबर हैं, जबकि अदिति को 471 नंबर मिले हैं. उनके पिता शिक्षक और मां गृहणी हैं. हाईस्कूल की परीक्षा में भी अदिति ने पूरे बिहार में 7वां स्थान प्राप्त किया था. वह आगे पढ़कर UPSC क्रैक कर आईएएस बनना चाहती हैं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सेल्फ स्टडी भी एक बड़ा फैक्टर है. अदिति ने 94.2 प्रतिशत नंबर प्राप्त किए हैं.
बोर्ड ने की थी गहन जांच
अदिति के साथ ही उनकी बहन अंकिता ने भी अच्छे नंबरों से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की है. उन्हें यह पूरा विश्वास था कि उन्हें परीक्षा का रिजल्ट कुछ ऐसी ही सूरत में मिलेगा. अदिति ने बताया कि बोर्ड द्वारा उसे पटना बुलाकर लगभग 45 मिनट तक उसे हर कसौटी पर जांचा गया कि जो नंबर उसने पाए हैं, वह उसके लायक है भी या नहीं. जब बोर्ड के अधिकारी अदिति के जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट हो गए तब जाकर यह परिणाम घोषित किया गया.
गौरतलब है कि बिहार विद्यालय समिति टॉपर घोटाले का दंश झेल चुकी है, जिसके बाद यह व्यवस्था बनाई गई है कि जिस भी परीक्षार्थियों के नंबर ज्यादा आएंगे, उनको बोर्ड ऑफिस बुलाकर गहन पूछताछ कर पढ़ाई की हर कसौटी पर जांचा जाएगा, तब जाकर टॉपर का नाम अंतिम रूप से घोषित किया जाएगा.
जुड़वा बहन से थी प्रतिस्पर्धा
अदिति 3 बहनें और एक भाई हैं. अदिति की जुड़वा बहन अंकिता ने भी साथ मे ही इंटर साइंस की परीक्षा दी थी लेकिन परीक्षा के समय अंकिता की तबियत ज्यादा खराब होने के काऱण उसके नंबर महज 87 प्रतिशत ही आए. अदिति और अंकिता पढ़ाई में एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा भी करती थीं, जिसका परिणाम यह हुआ था कि 2021 की हाई स्कूल परीक्षा में अदिति की पूरे बिहार में 7वीं रैंक थी जबकि अंकिता की 13वीं रैंक थी.
खुशी से फूली नहीं समा रही हैं मां
अदिति की मां पुष्पा देवी ने कहा कि उन्होंने कभी भी अपनी बेटियों को घर का काम करने के लिये नहीं कहा. उनका कहना है कि घर का काम तो मैं कर ही रही हूं, बेटियों को जितना भी पढ़ना है, उतना पढ़ें. पिता सुभाष ने कहा कि बेटे और बेटियों में कभी कोई फर्क नहीं किया. मेरी बेटी ने पढ़ाई में जो लगन लगाई है, उसका परिणाम मिला है. उनके घर मे आज दुहरी खुशी है. दोनों बेटियां अच्छे नंबरों से पास हुई हैं.