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BHU Fee Hike: बढ़ी फीस को लेकर छात्रों ने किया कुलपति का घेराव, सुरक्षाकर्मियों से हाथापाई

BHU Fee Hike: कुलपति के अपने कार्यालय पहुंचते ही बवाल शुरू हो गया. छात्रों ने अपनी मांगों को रखने के लिए कुलपति का घेराव कर लिया. छात्रों के बीच से कुलपति को निकालने में सुरक्षाकर्मियों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा. इस दौरान सुरक्षाकर्मियों और छात्रों के बीच में जमकर धक्का-मुक्की और हाथापाई भी हुई.

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BHU Fee Hike:
BHU Fee Hike:
स्टोरी हाइलाइट्स
  • फीस वृद्धि के खिलाफ हो रहा प्रर्दशन
  • सुरक्षाकर्मियों के साथ हुई हाथापाई

BHU Fee Hike: एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय काशी हिंदू विश्वविद्यालय एक बार फिर से अखाड़ा बनता जा रहा है. कुलपति कार्यालय सेंट्रल ऑफिस पर फीस वृद्धि के खिलाफ ज्योग्राफी विभाग के छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच जमकर हाथापाई और धक्का-मुक्की हुई. कुलपति के अपने कार्यालय पहुंचते ही बवाल शुरू हो गया.

छात्रों ने अपनी मांगों को रखने के लिए कुलपति का घेराव कर लिया. छात्रों के बीच से कुलपति को निकालने में सुरक्षाकर्मियों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा. इस दौरान सुरक्षाकर्मियों और छात्रों के बीच में जमकर धक्का-मुक्की और हाथापाई भी हुई.

काशी हिंदू विश्वविद्यालय आज उस वक्त अखाड़ा बनता दिखा जब ज्योग्राफी विभाग के छात्र फीस वृद्धि के खिलाफ कुलपति कार्यालय पर बैठकर धरना प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान कार से पहुंचे कुलपति से मिलने के लिए छात्र जिद पर अड़ गए और कुलपति की कार के घेराव के साथ ही कार के आगे भी बैठ गए. हालात बेकाबू होता देख सुरक्षाकर्मियों के हाथ पैर फूलने लगे. कुलपति को आक्रोशित छात्रों के बीच से निकालना बड़ी चुनौती बनती जा रही थी. इस दौरान छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच में जमकर धक्का-मुक्की और हाथापाई भी हुई. कुछ छात्र और सुरक्षाकर्मी चोटिल भी हुए. 

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बड़ी जद्दोजहद के बाद किसी तरह कुलपति की कार छात्रों के घेराव से निकल पाई और बड़ी तेजी से निकलकर वहां से बच पाने में कुलपति सफल हुए. आक्रोशित छात्रों ने काफी दूर तक दौड़ती कार का पीछा भी किया, लेकिन वह असफल रहे. कई घायल छात्रों का आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने उनको अपनी बूट से पैरों पर मारा है और काफी चोटिल भी किया है. 

छात्रों की मांग यह थी कि उनके जियोग्राफी विभाग की बड़ी फीस वापस ले ली जाए. इसके संदर्भ में उन्होंने कुलपति से मिलने की कोशिश की थी. मगर लाखों कोशिशों के बाद भी वह कुलपति से मिल नहीं सके.

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