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एजुकेशन न्यूज़

कोरोना ने मचाई तबाही, एक लाख छात्र बोर्ड एग्‍जाम के ख‍िलाफ, क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट

प्रतीकात्‍मक फोटो (Getty)
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बेशक कोरोना अविश्वसनीय और अकल्पनीय घटना है लेकिन इसे आए हुए सालभर से ज्यादा समय बीत चुका है. ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं. कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच परीक्षा छात्रों की जान को जोखिम में नहीं डालेगा? क्या सीबीएसई या सरकार को इस खतरे का अंदेशा नहीं था? क्या परीक्षा की तारीख घोषित करते वक्त सरकार मानकर चल रही थी कि चार मई तक हालात सुधर जाएंगे? क्या कोरोना काल में पढ़ाई और परीक्षा को लेकर सीबीएसई और सरकार कोई ठोस नीति बनाने में नाकाम रही? क्या परीक्षा का कोई और भी वैकल्पिक तरीका हो सकता है?  अभी की स्थिति से साफ है फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं बनी है. लिहाजा परीक्षा टालने या फिर ऑनलाइन परीक्षा की मांग को लेकर सोशल मीडिया में मुहिम शुरू हो चुकी है. इस मुहिम में ऑनलाइन पिटीशन पर एक लाख से ज्यादा परीक्षार्थी दस्तखत कर चुके हैं.

प्रतीकात्‍मक फोटो (Getty)
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कोविड केस बढ़ते जा रहे हैं, वहीं एक बार फिर 10वीं और बारहवीं की परीक्षा को लेकर संशय की स्थिति पैदा हो गई है. कई राज्यों में अप्रैल के आखिरी हफ्ते से परीक्षाएं होनी हैं जबकि सीबीएसई की परीक्षा चार मई से होनी है. सवाल उठ रहा है कि कैसे होंगी परीक्षाएं? एक्‍सपर्ट से जानिए.

प्रतीकात्‍मक फोटो
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aajtak से बातचीत में एल्‍कॉन स्‍कूल के प्रिंसिपल व श‍िक्षाविद डॉ अशोक पांडे ने कहा क‍ि स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्‍ट‍ि से देखें तो ये बहुत बड़ा रिस्‍क है लेकिन दूसरा बहुत बड़ा रिस्‍क पढ़ाई का है. वो रिस्‍क भी हम एक साल से देख रहे हैं. लास्‍ट ईयर की तुलना करें तो उस साल पढ़ाई हुई थी लेकिन एग्‍जाम के समय दिक्‍कत आ गई. लेकिन इस साल ऑनलाइन पढ़ाई हुई अगर सेकेंड वेव न आती तो ऐसा लग रहा था कि हालात काफी सामान्‍य हो गए थे. इसी को देखते हुए परीक्षा की तारीख चार मई रखी गई थी. सरकार ने खुद इसका ध्‍यान रखते हुए ये फैसला लिया था. 

प्रतीकात्‍मक फोटो (AP)
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इन परीक्षाओं के दौरान छात्रों को व्‍यावहारिक दिक्‍कतें जैसे गर्मी का मौसम, एग्‍जाम में मास्‍क पहनकर तीन घंटे बैठना या अगर ‍कि‍सी एक को हो गया तो सभी को क्‍वारनटीन करना होगा, इसके जवाब में डॉ अशोक पांडेय का कहना है कि ये एक स्‍थ‍िति है, जिसके संकेत मिल रहे हैं, लेकिन आप देख‍िए कि नीट यूजीसी की परीक्षाएं हुईं. अगर परीक्षा न कराने का ड‍िसीजन लेना है तो इससे पहले स्‍वास्‍थ्‍य श‍िक्षा भविष्‍य को ध्‍यान में रखकर ही  निर्णय लेना चाहिए.

प्रतीकात्‍मक फोटो (Getty)
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रेडिक्‍स हॉस्पिटल के सीएमडी डॉ रवि मलिक ने कहा कि पिछले 8 मार्च को केवल 15 हजार कोरोना केस थे. आज 8 अप्रैल में एक लाख 26 हजार का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. हमें ध्‍यान रखना होगा कि‍ ये अनप्रिडेक्‍टबल है, अगर इतने केसेज हो रहे हैं तो इसे देखना होगा. अगर शोधों व आंकड़ों को देखें तो दूसरी लहर से ग्रसित सबसे ऊपर 16 से 17 साल के बच्‍चे हैं. 15 मार्च तक 15 हजार 388 से अब एक महीने में एक लाख 26 हजार पहुंच गए हैं. अब जब ऐसे समय में जब जानें गई हैं, ये नया स्‍ट्रेन चल रहा है ये बच्‍चों के ऊपर ही इफेक्‍ट डाल रहा है. बच्‍चों में तेजी से फैल रहा है. ये सब सोचकर विवेक के साथ हर बात संज्ञान में लेकर डिसीजन लेना चाहिए कि क्‍या हम ऑनलाइन परीक्षा नहीं ले सकते.

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जसलोक हॉस्‍प‍िटल मुंबई के डॉ राजेश पारिख कहते हैं कि यह आज हमारी सबसे बड़ी चुनौती है कि  हमारी एजुकेशन पॉलिसी धीरे से बदलती है, लेकिन वायरस तेजी से म्‍यूटेट हो रहा है. इसी तरह हमें अपनी पॉलिसी बदलनी चाहिए. उन्‍होंने बताया कि एक स्‍कूल ने अपनी पॉलिसी इतनी फ्लैक्‍स‍िबल कर रखी है कि एक हफ्ते में बदल देते हैं, सबलोगों को डर है कि ऑनलाइन में चीटिंग होगी. लेकिन फॉरेन में कई साल से ओपन बुक एग्‍जाम हो रहे हैं क्‍या हम उसकी तरफ नहीं जा सकते.

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अब सवाल ये है कि पिछले साल जब काफी कम केस में इम्तिहान नहीं हो पाए थे तो इस बार कोरोना विस्फोट की स्थिति में इम्तिहान कैसे होंगे? सवाल परीक्षा को लेकर है तो पढ़ाई के संकट का भी मामला है कि आखिर कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई लिखाई कैसे होगी? इस अहम मसले पर चर्चा करते 12वीं के छात्र आर्यन ने कहा कि 10वीं और बारहवीं के छात्र हों या अभिभावक सबका मन इन दिनों अजीब-सी चिंता में घिरा हुआ है. चिंता कठिन सवालों को लेकर नहीं है बल्कि चिंता है कोरोना के खतरों की.
 

प्रतीकात्‍मक फोटो (Getty)
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अभ‍िभावक रुचिका कोहली का कहना है कि जी हां, एक महीने से भी कम समय बाद चार मई से 10वीं और 12वीं की सीबीएसई का इम्तिहान शुरू होना है और हफ्तेभर से अचानक कोरोना के केस ने मुंबई दिल्ली समेत देश के कई शहरों में रफ्तार पकड़ ली है. ऐसे में परीक्षार्थियों और अभिभावकों के मन में चिंता ये है कि कैसे होगी परीक्षा? भविष्य की सोचें या जान की.

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बच्चों और अभिभावकों की चिंता से पीएम मोदी भी वाकिफ हैं. छात्रों से परीक्षा पर चर्चा में पीएम ने माना कि ये ऐसी स्थिति है जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं. कई बार जीवन में अचानक अकल्पनीय घटता है. इन घटनाओं पर आपका नियंत्रण नहीं होता. कोरोना में हम कह सकते हैं बच्चों का युवाओं का नुकसान बहुत बड़ा है. बड़ी इमारत की नींव में खालीपन जैसा. इस कमी को भरना आसान नहीं