Musical Torture: संगीत का मानव और मानव समाज से खास रिश्ता है. शायद ही कोई ऐसा विरला हो जिसे म्यूजिक पसंद न हो. लेकिन क्या हो अगर आप टीवी चैनल बदलने या रेडियो बंद करने की ताकत खो दें? क्या हो अगर कोई बिना रुके घंटों तक आपको म्यूजिक सुनाए. एक दिन... एक सप्ताह... या और भी लंबा? ऐसे में यह म्यूजिकल टॉर्चर बन जाएगा. पनामा के ताकतवर जनरल मैनुएल नोरिएगा को इसी म्यूजिकल टॉर्चर का शिकार बनने के लिए याद किया जाता है.
बात सन् 1990 की है. अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश सीनियर के पनामा पर आक्रमण करने के बाद दमनकारी सैन्य नेता मैनुएल नोरिएगा (Manuel Noriega) ने पनामा सिटी में वेटिकन के दूतावास में खुद को छिपा लिया था. नोरिएगा नशीले पदार्थों की तस्करी और 1989 के चुनावों में धांधली के आरोपों में अमेरिका के लिए वांटेड था. दूतावास अमेरिकी सैनिकों से घिरा हुआ था, लेकिन उसने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया.
ऐसे में अमेरिकी सेना ने मनोवैज्ञानिक युद्ध का उपयोग करने का फैसला किया. उन्होंने नॉन-स्टॉप म्यूजिक की एक दीवार खड़ी कर दी. इसके बाद लाउडस्पीकर की ऊंची कतार से दूतावास को घेर दिया गया और तेज़ आवाज में रॉक म्यूजिक बजना शुरू हो गया.
इन स्पीकर की प्लेलिस्ट दक्षिणी कमांड नेटवर्क, मध्य अमेरिका में अमेरिकी सैन्य रेडियो से संचालित हो रही थी. इसमें शानदार हेवी मेटल साउंड वाले हिट गाने एक के बाद एक बजाए गए. आखिरकार, 03 जनवरी 1990 को नोरिएगा ने आत्मसमर्पण कर दिया.
अमेरिका ने इस युद्धनीति का आगे भी इस्तेमाल किया. फरवरी 1993 में, सेना ने टेक्सास परिसर की घेराबंदी कर डेविड कोरेश को गिरफ्तार करने की कोशिश की. यह दावा किया जाता है कि 51 दिनों के गतिरोध के दौरान, उन्होंने पॉप संगीत बजाया. पूरी रात जेट विमानों की आवाज़ें बजाईं और तिब्बती मंत्रोच्चार और मारे जा रहे खरगोशों की चीखों से मनोवैज्ञानिक हमले किए.