वेनेजुएला पर हमले के बाद अमेरिका का ग्रीनलैंड पर कब्जा करना का मुद्दा काफी गरमा रहा है. ऐसी चर्चा है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के लिए हमला कर सकता है. इस पर डेनमार्क ने अमेरिका के प्रति सख्त रुख दिखाया है, क्योंकि फिलहाल ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त राज्य है. वहीं ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने भी इसे अमेरिका की काल्पनिक योजना बताई है. ऐसे में जानते हैं कि इन दो देशों के प्रधानमंत्री के बारे में कि कैसे ये ट्रंप से भिड़ने को तैयार हैं.
वेनेजुएला में अमेरिकी हमले के बाद अचानक से ग्रीनलैंड के भविष्य का मुद्दा फिर से सामने आ गया है. क्योंकि, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध में अपने प्रभाव क्षेत्र में 1823 की अमेरिकी वर्चस्व की नीति पर लौट रहा है - और उन्होंने कई देशों को चेतावनी दी कि अमेरिका अपना ध्यान उनकी ओर जा सकता है.
कैसे गरमाया ग्रीनलैंड का मुद्दा
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला में अमेरिकी हमले ने इस आशंका को फिर से हवा दे दी है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने के लिए बल प्रयोग करने पर विचार कर सकता है. क्योंकि, वेनेजुएला पर हमले के बाद , ट्रंप के एक सहयोगी की पत्नी केटी मिलर ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी ध्वज के रंगों में ग्रीनलैंड का एक नक्शा पोस्ट किया. इसके साथ "जल्द ही" शब्द लिखा था.
सोमवार को उनके पति स्टीफन मिलर ने कहा कि अमेरिकी सरकार की औपचारिक स्थिति यह है कि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा होना चाहिए. सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका नाटो की शक्ति है. अमेरिका को आर्कटिक क्षेत्र को सुरक्षित करने, नाटो और नाटो के हितों की रक्षा करने के लिए, जाहिर है कि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा होना चाहिए. ग्रीनलैंड पर बलप्रयोग के सवाल पर उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर कोई भी अमेरिका से नहीं लड़ेगा.
किस देश के नेता ने क्या कहा
डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा रखने वाले अमेरिका को चेतावनी देते हुए डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर हमला करता है तो इसका मतलब होगा कि नाटो से अमेरिका का गठबंधन खत्म हो गया है.
मंगलवार को फ्रेडरिक्सन ने जर्मनी, फ्रांस, इटली, पोलैंड, स्पेन और ब्रिटेन के नेताओं के साथ एक संयुक्त बयान जारी किया. इसमें भी वही बात दोहराई गई कि यूरोपीय सहयोगी आर्कटिक को सुरक्षित रखने और विरोधियों को रोकने के लिए कदम बढ़ा रहे हैं.
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने इस बयान का स्वागत किया. नीलसन ने कहा कि ग्रीनलैंड वासियों को घबराने की जरूरत नहीं है. हालात ऐसे नहीं हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा कर सके। ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसलिए हमें घबराना नहीं चाहिए। हमें उस अच्छे सहयोग को फिर से स्थापित करना होगा जो हमारे बीच पहले था.
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर नीलसन ने ट्रंप से ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने की काल्पनिक योजनाओं को छोड़ने का आह्वान किया. उन्होंने लिखा कि बस बहुत हो गया. अब और दबाव नहीं. अब और इशारे नहीं. अब और विलय की कल्पनाएं नहीं. हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन यह बातचीत उचित माध्यमों से और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करते हुए होनी चाहिए.
जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन... एक बेहतरीन शिकारी और खिलाड़ी
जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ग्रीनलैंड के सबसे युवा प्रधानमंत्री हैं. उन्होंने मार्च 2025 में पीएम पद की शपथ ली. उनकी उम्र सिर्फ 33 साल है. वह पहले उद्योग और खनिज मामलों के पूर्व मंत्री थे. रॉयटर्स के मुताबिक, राजनीति के अलावा नीलसन, एक बेहतरीन खिलाड़ी और शिकारी के रूप में जाने जाते हैं. नीलसन को फेसबुक पर अपने द्वारा शिकार किए गए बारहसिंगों के साथ पोज देते हुए कई फोटो में देखा जा सकता है और उन्होंने कई राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप जीती हैं. नीलसन हाई स्कूल के दिनों से ही राजनीति में शामिल रहे हैं.
ग्रीनलैंड के लिए नीलसन का दृष्टिकोण महत्वाकांक्षी है. उनका लक्ष्य है कि डेनमार्क के ब्लॉक अनुदान (लगभग 1 अरब डॉलर प्रति वर्ष जो अर्थव्यवस्था को चलाए रखता है)से ध्यान हटाकर व्यावसायिक विकास और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का निर्माण किया जाए. क्योंकि उनका अंतिम लक्ष्य यह है कि डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड आर्थिक आत्मनिर्भरता के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करे.
प्रधानमंत्री के रूप में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बाहरी दबावों का मुकाबला करने के लिए राजनीतिक एकता का आह्वान किया था. उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया था कि ऐसे समय में जब हम एक राष्ट्र के रूप में दबाव में हैं, हमें एकजुट होना होगा. पूर्व में उनका खनिज मंत्री पद का अनुभव ऐसे समय में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है जब ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड के खनिज संपदा पर है.
फोर्ब्स पावर वुमेन में शामिल रही हैं फ्रेडरिक्सन
फ्रेडरिकसेन जून 2019 से डेनमार्क के प्रधानमंत्री हैं और जून 2015 से डेनमार्क की मध्य-वामपंथी सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता हैं. वह डेनमार्क के इतिहास में सबसे कम उम्र की प्रधानमंत्री और दूसरी महिला हैं. उनकी उम्र 48 साल है.
फ्रेडरिक्सन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को यह बताकर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है. उन्होंने इस विचार को "बेतुका" बताया था. वह 2024 में फोर्ब्स की 10 शक्तिशाली महिलाओं की सूची में 78वें स्थान पर थीं.