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सोने से महंगा था ये रंग, सिर्फ राजाओं के घरों में था... अब हो गया कॉमन!

बैंगनी रंग को सदियों से राजाओं और रानियों का रंग माना जाता है. प्राचीन काल में यह रंग बेहद दुर्लभ और महंगा था, जिसे केवल शाही परिवार ही पहन सकते थे. टायेरियन पर्पल नामक यह रंग समुद्री घोंघों से बनाया जाता था.

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 यह रंग समुद्र में पाए जाने वाले छोटे-छोटे घोंघों से निकाला जाता था. ( Photo: Pexels)
यह रंग समुद्र में पाए जाने वाले छोटे-छोटे घोंघों से निकाला जाता था. ( Photo: Pexels)

दुनिया में हर रंग का अपना एक मतलब होता है. कुछ रंग प्यार से जुड़े होते हैं, कुछ शांति से और कुछ ताकत से. लेकिन एक रंग ऐसा है, जिसे सदियों से राजाओं, रानियों और शाही परिवारों से जोड़ा जाता रहा है. यही वजह है कि इसे राजसी रंग (Colour of Royalty) कहा जाता है. बैंगनी रंग को सदियों से 'Colour of Royalty' माना जाता है क्योंकि प्राचीन समय में यह रंग बेहद दुर्लभ और महंगा था. टायेरियन पर्पल नामक यह रंग समुद्री घोंघों से बनाया जाता था और इसे पहनने की अनुमति केवल राजाओं, रानियों और शाही परिवारों को होती थी. इसी वजह से बैंगनी रंग शक्ति, सम्मान, विलासिता और उच्च प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया.

कौन-सा है राजसी रंग?
बैंगनी (Purple) रंग को परंपरागत रूप से राजसी रंग माना जाता है. पुराने समय में यह रंग बहुत दुर्लभ और बेहद महंगा हुआ करता था. इसे पहनना आम लोगों के बस की बात नहीं थी. यही कारण है कि यह रंग अमीरी, ताकत और ऊंचे रुतबे का प्रतीक बन गया.

टायेरियन पर्पल की कहानी
बैंगनी रंग का सबसे मशहूर रूप टायेरियन पर्पल कहलाता था. यह रंग समुद्र में पाए जाने वाले छोटे-छोटे घोंघों से निकाला जाता था. थोड़ी-सी डाई बनाने के लिए हजारों घोंघों की जरूरत पड़ती थी. इस कठिन और लंबी प्रक्रिया के कारण यह रंग सोने से भी ज्यादा महंगा हो गया था.

जब रंग पहनने पर था कानून
प्राचीन रोम और बीजान्टिन साम्राज्य में बैंगनी रंग इतना खास था कि इसे पहनने पर कानून बने हुए थे. केवल राजा, सम्राट और ऊंचे अधिकारी ही इसे पहन सकते थे. आम लोगों को इसकी इजाजत नहीं थी. कुछ दौर में तो नियम तोड़ने पर कड़ी सज़ा तक दी जाती थी.

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बैंगनी कमरों में रहते थे शाही बच्चे
बीजान्टिन साम्राज्य में शाही बच्चों का जन्म एक खास बैंगनी रंग से सजे कमरे में होता था. ऐसे बच्चों को सच्चा शाही उत्तराधिकारी माना जाता था. इससे साफ होता है कि बैंगनी रंग सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं था, बल्कि सत्ता और शाही पहचान का हिस्सा था.

बैंगनी रंग इतना खास क्यों था?
इस रंग में मौजूद एक खास प्राकृतिक तत्व इसे गहरा और लंबे समय तक टिकने वाला बनाता था. जहां दूसरे रंग समय के साथ फीके पड़ जाते थे, वहीं यह रंग और भी गहरा हो जाता था. इसी वजह से इसकी कीमत और प्रतिष्ठा दोनों बढ़ गईं. खासकर रोमन साम्राज्य और मध्यकाल के कुछ हिस्सों में, आम लोगों को बैंगनी रंग पहनने पर सख्त मनाही थी क्योंकि यह रंग इतना दुर्लभ और महंगा होता था कि केवल राजा, रानी और उच्च वर्ग के लोग ही इसे खरीद और पहन सकते थे, और इसका उल्लंघन करने पर आर्थिक दंड या मौत की सज़ा भी हो सकती थी, क्योंकि यह शक्ति और धन का प्रतीक था.

धर्म और संस्कृति में बैंगनी रंग
समय के साथ बैंगनी रंग का इस्तेमाल धर्म में भी होने लगा. ईसाई धर्म में यह रंग मेडिटेशन, प्रार्थना और आत्म-संयम का प्रतीक माना जाता है. आज के समय में भी बैंगनी रंग को ज्ञान, कल्पना, क्रिएटिविटी और आध्यात्मिकता से जोड़ा जाता है.

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बैंगनी रंग से जुड़े रोचक तथ्य
एक समय यह रंग सोने से भी ज्यादा महंगा था.इसे बनाने की प्रक्रिया से बहुत तेज बदबू आती थी. आम लोगों को इसे पहनने की सख्त मनाही थी. पहला आर्टिफिशियल बैंगनी रंग 1856 में बना.यह रंग आज भी रहस्य और शान का प्रतीक है.

आज भी क्यों माना जाता है राजसी रंग?
हालांकि आज बैंगनी रंग आसानी से मिल जाता है, लेकिन इसका शाही इतिहास इसे आज भी खास बनाता है. यही वजह है कि लग्जरी ब्रांड्स, शाही डिजाइन और खास मौकों पर बैंगनी रंग को आज भी ठाठ, सम्मान और शान का प्रतीक माना जाता है.

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