आज यानी 15 फरवरी 1903 को एक ऐसे खिलौने का ईजाद हुआ जो आने वाले समय में बचपन का प्रतीक बनने वाला था. आज इस खिलौने को बच्चे और बड़े दोनों का प्यार मिलता है. इस खिलौने का नाम टेडी बियर है. आज ही खिलौनों की दुकान के मालिक और आविष्कारक मॉरिस मिक्टोम ने अपनी दुकान की अलमारी में दो भरवां भालू रखे और उनका टेडी बियर के रूप में प्रचार किया. मिक्टोम ने इससे पहले राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट से उनके उपनाम, टेडी, के इस्तेमाल की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी. राष्ट्रपति सहमत हो गए और जल्द हीअन्य खिलौना निर्माता भी मिक्टोम के टेडी बियर की नकल बनाने लगे.
थियोडोर रूजवेल्ट के शिकार अभियानों में से एक ने टेडी बियर के लिए प्रेरणा प्रदान की. विडंबना यह है कि वो एक उत्साही संरक्षणवादी भी थे, फिर भी रूजवेल्ट के नेतृत्व वाले शिकार अभियानों में अक्सर अत्यधिक वध होता था. इसमें अफ्रीका का एक दौरा भी शामिल है, जिसके दौरान उनके दल ने खेल और ट्रॉफी के लिए 6,000 से अधिक जानवरों को मार डाला था. हालांकि, टेडी बियर का विचार संभवतः रूजवेल्ट के किसी दयालु कार्य से ही उत्पन्न हुआ था.
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टेडी बियर के पीछे की प्रेरणा के सटीक विवरण को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें हैं, लेकिन ऐसा माना जाता है कि 1902 में मिसिसिपी में शिकार करते समय , रूजवेल्ट को एक बूढ़ा घायल काला भालू मिला जिसे उनके गाइडों ने एक पेड़ से बांध रखा था. भालू की उम्र, लिंग और स्वास्थ्य की स्थिति अभी भी विवादित है. कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रूजवेल्ट ने उसकी पीड़ा पर दया करके उसे गोली मार दी थी, जबकि अन्य का कहना है कि उन्होंने भालू को आज़ाद कर दिया था.
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बाद में राजनीतिक कार्टूनिस्टों ने भालू के बच्चे के रूप में भालू को चित्रित किया, जिसका अर्थ यह था कि रूजवेल्ट की कठोर, साहसी और मर्दाना छवि के पीछे एक बहुत ही कोमल और संवेदनशील आंतरिक व्यक्तित्व छिपा था. यहीं से मिक्टोम को टेडी बियर बनाने की प्रेरणा मिली और उसने भालू को क्यूट बच्चे के तौर पर एक सॉफ्ट टॉय तैयार किया.