scorecardresearch
 

Republic Day: भैरव बटालियन के जवान चेहरे पर क्या लगाते हैं? ऐसा करने के पीछे वजह क्या है, समझिए

भैरव बटालियन भारतीय सेना की अति विकसित तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस बटालियन का गठन वर्तमान समय में उभरते खतरों से निपटने के लिए और आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को पूरा करने किया गया है.

Advertisement
X
इस वजह से चेहरे को रंग लेते हैं भैरव बटालियन के जवान (Photo - PTI)
इस वजह से चेहरे को रंग लेते हैं भैरव बटालियन के जवान (Photo - PTI)

गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना ने अपनी नवगठित भैरव लाइट कमांडो बटालियन के शौर्य और स्किल का प्रदर्शन किया. आज जैसे-जैसे युद्ध की गति तेज होती जा रही है और जंग तकनीक पर ज्यादा निर्भर होते जा रहे हैं, उनसे निपटने में भैरव बटालियन पूरी तरह से सक्षम है. भैरव बटालियन के कमांडो को विशेष रूप से हाइब्रिड युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जो पारंपरिक लड़ाई, ड्रोन निगरानी, ​​इलेक्ट्रॉनिक व्यवधान और छोटी टीम की कार्रवाई का मिश्रण हैं.

आधुनिक युग के हाइब्रिड जंग की जरूरतों के हिसाब से गठित भैरव बटालियन स्ट्रैटजिक ऑपरेशंस को सीधा लीड करेती है. दुश्मन के दुर्गम इलाकों तक पहुंचने के लिए इन्हें उनके सुरक्षा घेरे, ड्रोन निगरानी और AI सेंसर को धता बताते हुए अंदर घुसना होता है. यही वजह है कि एक्शन मोड में बटालियन हमेशा कैमोफ्लाज और फेस पेंट से अपना चेहरा ढके रहते हैं. 

चेहरे पर क्या लगाते हैं भैरव बटालियन कमांडो
डिफेंस एक्सपर्ट ब्रिगेडियर अरुण सहगल ने बताया कि भैरव बटालियन के फेस रिचुअल्स उनके स्ट्रैटेजिक हिस्सा है. वे अपने फेस को काले या लाल रंग के ऑयल पेंट से रंग कर ही किसी ऑपरेशन में जाते हैं. यह काफी अहम होता है. क्योंकि आजक AI बेस्ड ऐसे सेंसर विकसित हो चुके हैं जो चेहरा ढकने पर भी आदमी की पहचान बता देते हैं. इसलिए चेहरे पर काले या लाल रंग की परत चढ़ानी पड़ती है, इससे सेंसर को फेस रिकॉगनिशन में मुश्किलें आती है.

Advertisement

भैरव बटालियन के जवान चेहरे पर मार्क्स क्यों लगाते हैं?
ब्रिगेडियर सहगल ने बताया कि फेस को कलर करना या मार्क्स लगाना भैरव बटालियन या किसी भी स्पेशल फोर्स की योजना का स्ट्रैटजिक हिस्सा होता है. ये बटालियन दुश्मनों के इलाकों में अंदर तक घुसकर ऑपरेशन को अंजाम देते हैं. ऐसे में निगरानी ड्रोन, जगह-जगह लगे सेंसर और दुश्मनों के स्नाइपर को धोखा देने में ये स्ट्रेटजी काम आती है. 

काफी मुश्किल ट्रेनिंग से गुजरते हैं कमांडो
भैरव लाइट कमांडो बटालियन का गठन पारंपरिक पैदल सेना और  पैरा स्पेशल फोर्सेज के बीच की इकाई है. गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेने से पहले भैरव कमांडो को कठोर प्रशिक्षण दिया गया था. वे 'अखंड प्रहार' अभ्यास का भी हिस्सा रहे हैं. 

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 26 जुलाई 2025 को कारगिल विजय दिवस समारोह के दौरान भैरव लाइट कमांडो बटालियन के गठन की घोषणा की थी. इसके प्रत्येक बटालियन में लगभग 250 कमांडो होते हैं - जो किसी भी बटालियन के मानक 800 सैनिकों वाली पैदल सेना इकाइयों की तुलना में काफी कम है.

इस कॉम्पैक्ट कमांडो इकाई के 15 बटालियन की उत्तरी कमान में तैनाती हो चुकी है. दुश्मन के इलाके में गहराई तक रणनीतिक मिशनों को संभालती हैं, भैरव बटालियन सीमा के करीब तैनात होती हैं. उनका काम सामरिक, तेजी से बदलती परिस्थितियों को संभालना है, ऐसी परिस्थितियां जिनमें विस्तृत योजना बनाने के बजाय तत्काल एक्शन की जरूरत होती है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement