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अधिकतर शहरों में क्यों होते हैं कोतवाली- सदर- मुफस्सिल थाने? ये है कारण

कोतवाली, सदर और मुफस्सिल , ये तीनों शब्द पुलिस व्यवस्था और प्रशासनिक भाषा से जुड़े हैं. भारत में खास तौर पर पुराने शहरों में अलग-अलग तरह के इलाकों के पुलिस थाने परिभाषित करने के लिए इनका इस्तेमाल होता है. चलिए आसान भाषा में समझते हैं, इन दिनों शब्द का मतलब.

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 अलग-अलग शहरों में कोतवाली, सदर और मुफस्सिल थाने का ये है मतलब (Photo - Google map)
अलग-अलग शहरों में कोतवाली, सदर और मुफस्सिल थाने का ये है मतलब (Photo - Google map)

भारत के कई शहरों में कोतवाली, सदर और मुफ्फसिल थाना होना आम है. कई शहरों में इस नाम के थाने मिल जाएंगे. अगर ध्यान दिया जाए तो इन थानों के ऐसे नाम होने के पीछे एक बड़ी वजह है.  सभी पुराने शहर में कोतवाली थाना मिल ही जाते है. वहीं कई शहरों में सदर थाना और कुछ में तो मुफस्सिल  थाना भी होता है.  इन नामों को सुनकर ऐसा लगता है, जैसे ये किसी पुरानी व्यवस्था का हिस्सा रहे हो. 

थानों के ये नाम उनके इलाके की वजह से रखा जाता था. यह पुरानी पुलिस व्यवस्था का हिस्सा है. कोतवाली आमतौर पर शहर के पुराने और मुख्य इलाके का थाना होता है, जहां बाजार, भीड़भाड़ और प्रमुख शहरी क्षेत्र होता है. वहीं सदर थाना किसी भी जिले के मुख्यालय क्षेत्र में स्थित प्रमुख थाना होता है. जबकि मुफस्सिल थाना शहर की सीमा से बाहर के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में कानून-व्यवस्था संभालता है. पुराने समय में ऐसी ही व्यस्था थी और इसी के तहत अलग-अलग इलाकों में थाने का नामाकरण किया गया था.

क्या होता इनका मतलब
पुराने समय में कोतवाल शहर का प्रमुख सुरक्षा अधिकारी होता था, उसी से शब्द 'कोतवाली' आया.  आज भी कोतवाली आमतौर पर किसी शहर या कस्बे के मुख्य और सबसे पुराने थाने को कहा जाता है.यह अक्सर शहरी इलाके में होता है. ऐतिहासिक रूप से यह सबसे अहम थाना माना जाता है.

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सदर का मतलब होता है – मुख्य या केंद्रीय. यह किसी भी जिले का प्रमुख थाना होता है. सदर थाना ज्यादातर जिला मुख्यालय के इलाके को कवर करता है. कई बार यह प्रशासनिक और सरकारी दफ्तरों वाले क्षेत्र में होता है.

मुफस्सिल थाना शहर से बाहर के ग्रामीण या कस्बाई इलाके में होता है. मुफस्सिल शब्द फारसी से आया है, जिसका मतलब होता है – शहर से बाहर का इलाका. यह ग्रामीण या अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों का थाना होता है. पुरानी पुलिस व्यवस्था के तहत शहर के बाहरी इलाकों की व्यवस्था देखने के लिए जो चौकी बनाई जाती थी, उसे मुफस्सिल कहा जाता था.बड़े जिलों में अक्सर एक शहर थाना और एक मुफस्सिल थाना होता है.

पुरानी पुलिस व्यवस्था में रखे जाते थे ऐसे नाम
पटना के पाटिलपुत्र थाना हाउस इंस्पेक्टर कम एसएचओ अतुलेश सिंह ने बताया कि कई शहरों में सदर, कोतवाली और मुफ्फसिल थाने पुरानी पुलिस व्यवस्था का प्रतीक है. क्योंकि पुराने जमाने में इलाकों के हिसाब से थाने का नामकरण होता था. मुख्य शहरी इलाके में जो थाना होता था उसे कोतवाली कहते थे और शहर से सटे जो कस्बाई इलाके में थाना होता था वो मुफ्फसिल कहलाता था. इसी तरह बड़े शहरों में इस इलाके में जिला मुख्यालय थे और जहां प्रशासनिक पदाधिकारियों के कार्यालय या आवास वगैरह थे, वहां के थाने को सदर थाना कहा जाता था. ये सभी उर्दू, अरब और फारसी शब्द हैं.   

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