महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का विमान दुर्घटना में निधन हो गया है. बारामती एयरपोर्ट के पास हुए इस हादसे के बाद कई चश्मदीदों के बयान सामने आ रहे हैं, जो बता रहे हैं कि आखिर हादसे के वक्त क्या हुआ? इसी बीच एक चश्मदीद का कहना है कि जिस जगह ये हादसा हुआ है, वहां पहली बार ऐसा नहीं है. यहां पहले भी प्लेन हादसे हो चुके हैं. अब सवाल ये है कि आखिर इस जगह ऐसा क्या है और क्यों कहा जा रहा है कि यहां पहले भी हादसे हुए हैं...
हादसों का कारण जानने से पहले आपको बताते हैं कि आखिर चश्मदीद का क्या कहना है... चश्मदीद ने आजतक को बताया, 'पहले तो ऐसा लग रहा था कि यहां पायलट ट्रेनिंग सेंटर पर प्लेन कई बार गिरते हैं. हमने कई बार प्लेन गिरते देखे हैं. तो हमें लगा कि ऐसा ही कुछ हुआ होगा. लेकिन, हमें ये नहीं लगा था कि ये दादा का ही विमान होगा और हमें लगा कि ये तो ट्रेनिंग वाले विमान ही होंगे.'
हादसे की जगह क्या है?
बता दें कि पुणे जिले के बारामती शहर के पास स्थित ये बारामती एयरपोर्ट एक छोटा लेकिन राजनीतिक रूप से बेहद अहम एयरपोर्ट माना जाता है. यह एयरपोर्ट भले ही बड़े महानगरों के व्यस्त एयरपोर्ट जैसा न हो, लेकिन क्षेत्रीय संपर्क, पायलट ट्रेनिंग और निजी या चार्टर्ड उड़ानों के लिए बेहद अहम है. ये ट्रेनिंग के लिए काफी फेमस है.
बारामती एयरपोर्ट का निर्माण साल 1996 में किया गया था. इसे महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल विकास निगम (MIDC) ने बनवाया था, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में इंडस्ट्रियल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया गया है. हालांकि, कुछ सालों बाद इसके संचालन और विकास की जिम्मेदारी महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी (MADC) को मिल गई थी. लगभग तीन दशक पुराना यह एयरपोर्ट राज्य के उन चुनिंदा एयरफील्ड्स में शामिल है, जिन्हें विशेष जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया था.
बारामती एयरपोर्ट को कमर्शियल पैसेंजर एयरपोर्ट का निर्माण के लिए नहीं किया गया था बल्कि पायलट ट्रेनिंग (Flying Training) के लिए सुरक्षित और कम-ट्रैफिक वाला एयरफील्ड के लिए हुआ था. यहां Academy of Carver Aviation Pvt. Ltd. (ACAPL) और the Redbird Flight Training Academy दो अहम ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन प्रेक्टिस करवाती हैं. इसके अलावा यहां कई प्राइवेट और चार्टर्ड विमान आते-जाते रहते हैं. कॉरपोरेट ट्रैवल और VIP/VVIP मूवमेंट के लिए भी इसका उपयोग किया जाता था. कम हवाई ट्रैफिक और अच्छे स्पेस की वजह से ट्रेनिंग के लिए ये बेहद अहम माना जाता था.
एयरपोर्ट कैसा है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ये एयरपोर्ट समुद्र लेवल से 604 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और 182.5 हेक्टेयर (451.11 एकड़) में फैला हुआ है. रनवे 11/29 1770 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा है, जिसके दोनों सिरों पर टर्निंग पैड हैं. रनवे की क्षमता 16 एलसीएन है. एयरपोर्ट में कुल तीन टैक्सी-वे हैं, जो दो अलग-अलग एप्रन (वे जगह जहां विमान पार्क किया जाता है) से जुड़ी हुई हैं. पहले एप्रन का शेप 180 x 100 मीटर है, जबकि दूसरे का 100 x 75 मीटर है. मुख्य एप्रन की पार्किंग क्षमता भी 100 x 75 मीटर है. परिसर में एक 112 वर्ग मीटर का टर्मिनल भवन और एक अप्रोच रोड भी मौजूद है, जो एयरपोर्ट संचालन में सहायक है.