सरकारी जॉब में आवेदन करते वक्त अभ्यर्थियों को रिजर्व्ड श्रेणी का लाभ पाने के लिए अपनी जाति के हिसाब से अपनी कैटेगरी से आवेदन करना पड़ता है. वहीं कई लोग रिजर्व श्रेणी से होते हुए भी इसका लाभ नहीं लेते. अपनी श्रेणी का लाभ नहीं लेने वालें लोगों और बाकी वैसी जातियों से आने वाले अभ्यर्थी जो किसी भी बेनिफिशरी कैटेगरी में नहीं आते हैं, उन्हें जेनरल कैटेगरी में गिना जाता है. ऐसे में समझते हैं सरकारी नौकरियों की बहाली में जेनरल और रिजर्व कैटेगरी क्या होता है और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर क्या कहा है.
अलग-अलग जाति समूह को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है. ये श्रेणियां एससी, एसटी, ईबीसी आदि हैं. इन्हीं श्रेणियों के आधार पर उन विशेष समूहों के उम्मीदवारों को बहाली प्रक्रिया में विशेष छूट दी जाती है. एक और श्रेणी EWS भी होता है, यानी वैसे अभ्यर्थी जिन्हें आर्थिक आधार पर छूट मिलती है, इसमें भी सभी जाति समूहों के उम्मीदवार शामिल होते हैं.
अब बारी आती है अनरिजर्व्ड श्रेणी की, जिसे जेनरल या ओपन टू ऑल कैटेगरी भी कहा जाता है. इसे भी अब तक जाति आधारित समझा जाता था. माना जाता रहा है कि ये वैसे जाति समूह के उम्मीदवारों के लिए है, जो रिजर्व कोटे में नहीं आते हैं. इन्हें सामान्य वर्ग कहा जाता है, लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में इस पूरी धारणा और दावे को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अनरिजर्व्ड या जेनरल या ओपेन टू ऑल कैटेगरी जाति आधारित नहीं होती है, बल्कि मेरिट आधारित होती है.
क्या है राजस्थान ज्यूडिशियल असिस्टेंट बहाली मामला
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए, जनरल कैटेगरी को ओपन टू ऑल बताया है. यानी जेनरल कैटेगरी का मतलब है, सभी वर्गों के लिए, न की कुछ जातीय समूह के लिए.
राजस्थान में जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क के लिए 2022 में परीक्षा हुई थी. 2023 में इसके परिणाम आए. इसमें कुछ रिजर्व कैटेगरी का कट-ऑफ जेनरल से ज्यादा हो गया. ऐसे में रिजर्व कैटेगरी को वैसे अभ्यर्थी जिनके अंक जेनरल के कट-ऑफ से तो ज्यादा थे, लेकिन उनके रिजर्व श्रेणी से कम थे, उनका चयन नहीं हुआ. फिर ये मामला राजस्थान हाईकोर्ट में पहुंचा.
राजस्थान हाईकोर्ट में अभ्यर्थियों ने दावा किया कि उनका रिजेक्शन गलत है. उनके कट-ऑफ जेनरल के कट ऑफ से ज्यादा थे. ऐसे में उन्हें उनके रिजर्व श्रेणी में ही रखा गया और उनका चयन नहीं हुआ. इस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि जो भी अभ्यर्थी रिजर्व श्रेणी में होते हुए भी अगर बिना कोई छूट लिए जेनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से ज्यादा लाते हैं तो उन्हें जेनरल में ही गिना जाएगा और उनका चयन होगा. इस पर अपीलकर्ताओं ने डबल बेनिफिट का तर्क देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसे एससी ने खारिज कर दिया और राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.
क्या है सुप्रीम कोर्ट का इस मामले को लेकर आदेश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक जेनरल कैटेगरी का मतलब ही है, हर किसी के लिए ये श्रेणी है. इस श्रेणी का आधार मेरिट है. मतलब रिजर्व कैटेगरी के वैसे अभ्यर्थी जिनका कट ऑफ जेनरल कोटे के कट ऑफ से ज्यादा है और उन्होंने ऐसा रिजर्व कोटे के तहत दी जाने वाली छूट लिए बिना किया है तो उनकी सामान्य वर्ग में होगी.
अब इसे ऐसे समझें. दो दोस्त एक ही सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करते हैं. एक रिजर्व कैटेगरी से हैं और दूसरा जेनरल कैटेगरी से हैं. दोनों की उम्र एक है. रिजर्व कैटेगरी वाला दोस्त वाजिब उम्र का है और उसने इसमें कोई रियायत नहीं ली है. जब परीक्षा हुई और इसके परिणाम आए तो रिजर्व कैटेगरी का कट ऑफ जेनरल से ज्यादा हो गया. ऐसे में जिस दोस्त की जाति रिजर्व कैटेगरी से थी, उसके अंक उसकी कैटेगरी के कट ऑफ से तो कम थे, लेकिन जेनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से ज्यादा थे. तब उसने जेनरल कैटेगरी से खुद के सेलेक्शन का दावा किया. लेकिन, उसे रिजर्व कैटेगरी के तहत उसके कैटेगरी के कट ऑफ से कम अंक आने की वजह से रिजेक्ट कर दिया गया.
अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि चूंकि जेनरल कैटेगरी का कट ऑफ रिजर्व कैटेगरी से कम था. ऐसे में रिजर्व कैटेगरी के वैसे अभ्यर्थी जिन्होंने बहाली के लिए बिना किसी रियायत के आवेदन किया, लेकिन उसके कट ऑफ रिजर्व कैटेगरी के कट-ऑफ से तो कम हैं, लेकिन जेनरल के कट ऑफ से ज्यादा हैं. वैसे अभ्यर्थियों को जेनरल कैटेगरी के तहत चयनित माना जाएगा. क्योंकि वो आते रिजर्व कैटेगरी से हैं, लेकिन उस कैटेगरी के किसी छूट का लाभ लिए बगैर उन्होंने जेनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से ज्यादा नंबर लाए.