एफिल टावर के कंस्ट्रक्शन का काम 26 जनवरी 1887 को शुरू हुआ था. इस दिन नींव की खुदाई शुरू हुई थी. फिर देखते ही देखते दो साल, दो महीने और पांच दिन के निर्माण के बाद 31 मार्च 1889 को, टावर रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हो गया था. दुनिया ने पेरिस के क्षितिज में एक नए स्मारक, एफिल टॉवर का स्वागत किया.
एफिल टावर के निर्माता गुस्ताव एफिल थे. उन्होंने ही इसे डिजाइन किया था. जब गुस्ताव एफिल ने निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसके तीसरे तल पर झंडा फहराया तो यह संकेत था कि लोहे से निर्मित यह संरचना अब आम लोगों के लिए खुल चुकी है. 10,000 गैस लैंपों से जगमगाता यह टावर एक ऐसा नजारा पेश कर रहा था, जैसा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा था. आज यह दुनिया के सबसे अधिक देखे जाने वाले स्मारकों में से एक है. यहां हर साल लगभग सात मिलियन लोग आते हैं.
यह भी पढ़ें: आज ही मिला था दुनिया का सबसे बड़ा हीरा, जानें अब ये कहां है
107 प्रस्तावित डिजाइनों में से, एफिल टावर को 1889 के विश्व मेले (एक्सपोज़िशन यूनिवर्सले) का प्रतिनिधित्व करने और फ्रांसीसी क्रांति की शताब्दी मनाने के लिए चुना गया था. यह मेला प्रौद्योगिकी और इनोवेशन की प्रदर्शनी था.
एफिल टावर को किसने डिजाइन किया था?
यह टावर गुस्ताव एफिल, वास्तुकार स्टीफन सौवेस्त्रे और इंजीनियर मौरिस कोचलिन और एमिल नौगियर की कल्पना का परिणाम था. एफिल गुस्ताव काफी फेमस थे और उनका मेटल का कारोबार था. न्यूयॉर्क की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के स्टील फ्रेम के पीछे भी एफिल का ही दिमाग था, जिसका निर्माण तीन साल पहले हुआ था.
यह भी पढ़ें: आज ही के दिन कैन में बंद बीयर की हुई थी शुरुआत, यहां के लोगों ने चखा था स्वाद
एफिल टावर के निर्माण में 7,300 टन लोहे, 300 से अधिक मजदूर और विशाल गर्डरों को हिलाने-डुलाने के लिए भाप से चलने वाली क्रेनों और हाइड्रोलिक जैकों के बेड़े की जरूरत पड़ी. इसके निर्माण का काम 26 जनवरी 1887 को शुरू हुआ और मात्र 796 दिनों में पूरा हो गया. यह एक बड़ी उपलब्धि थी. टावर की ऊंचाई 300 मीटर थी. तब इसने तुरंत विश्व की सबसे ऊंची संरचना के रूप में रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया. यह रिकॉर्ड इसने 1930 में न्यूयॉर्क में क्रिसलर बिल्डिंग के अनावरण तक बनाए रखा.