NEET PG काउंसलिंग एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है. ऐसा इसलिए क्योंकि काउंसलिंग के क्वालिफाइंग कट-ऑफ में बड़े बदलाव किए गए हैं.
इस साल उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाने और खाली पड़े स्नातकोत्तर मेडिकल सीटों को भरने के लिए NEET PG की काउंसलिंग पर्सेंटाइल को बहुत घटा दिया है.
ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को यह समझना जरूरी है कि कम हो रहे पर्सेंटाइल का असली मतलब क्या है और इसकी गणना कैसे की जाती है?
परसेंटेज (Percentage) बताता है कि किसी भी उम्मीदवार को एग्जाम में कुल नंबरों में से कितने अंक मिले हैं. जैसे कि NEET परीक्षा में 800 अंको में से आपको 320 नंबर मिले हैं, जिसका प्रतिशत 40 होगा.
वहीं, अगर हम पर्सेंटाइल की बात करें तो, इसका मतलब होता है कि बाकी सभी छात्रों के मुकाबले कितना अच्छा प्रदर्शन किया है. यह इस बात को दिखाता है कि कितने प्रतिशत उम्मीदवार से ज्यादा अंक हासिल किए हैं.
पर्सेंटाइल निकालने के लिए मान लेते हैं कि NEET PG में 1,00,000 उम्मीदवार शामिल हैं जिसमें से 85,000 उम्मीदवारों को आपके बराबर या उससे कम नंबर मिले हैं. इन दोनों को डिवाइड कर 100 से मल्टीप्लाई कर दें, इसका मतलब है कि आपको कुल 85 पर्सेंटाइल मिलें हैं.
गौर करने वाली बात ये है कि NEET PG काउंसलिंग में शामिल होने वाले सभी उम्मीदवार की योग्यता पर्सेंटाइल के बेसिस पर तय की जाती है. हर साल नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस अलग-अलग श्रेणियों के लिए न्यूनतम पर्सेंटाइल तय करता है.
इस साल नीट पीजी के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल काफी कम कर दिया गया है. सामान्य और EWS उम्मीदवारों के लिए इसे 50वें से घटाकर 7वें पर्सेंटाइल पर कर दिया गया है. सामान्य दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए 45वें से कम करके 5 वें पर्सेंटाइल पर कर दिया गया है. वहीं, ST,SC और OBC उम्मीदवारों के लिए 40वें पर्सेंटाइल से घटाकर 0 कर दिया गया है.