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कौन थे जाट राजा महेंद्र प्रताप सिंह, जिनके नाम पर अलीगढ़़ में बन रही यूनिवर्सिटी, PM मोदी करेंगे शिलान्यास

1915 में अफगानिस्तान में रहकर महेंद्र प्रताप ने भारत की अंतरिम सरकार बनाई थी. राजा महेंद्र प्रताप जिन्ना के घोर विरोधी माने जाते थे. अलीगढ़़ में जिनके नाम पर यूनिवर्सिटी की नींव रखी जा रही है.

राजा महेंद्र प्रताप राजा महेंद्र प्रताप
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अफगानिस्तान में महेंद्र प्रताप ने भारत की अंतरिम सरकार बनाई थी
  • जिन्ना के घोर विरोधी माने जाते थे राजा महेंद्र प्रताप

राजा महेंद्र सिंह ने ही अलीगढ़ में विश्वविद्यालय खोलने के लिए अपनी जमीन दान की थी, लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के किसी भी कोने में उनका नाम अंकित नहीं है. इसी कारण यहां पर एएमयू यानी अलीगढ़ मुस्ल‍िम यूनिवर्सिटी का नाम बदलने के लिए काफी मांग उठती रहती है. लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके लिए रास्ता निकाला है. 

प्रदेश सरकार ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाब में महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय बनाने का निर्णय लिया. योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2019 में राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर अलीगढ़ में एक नया विश्वविद्यालय स्थापित करने का भरोसा दिलाया था. सीएम योगी आदित्यनाथ ने 14 सितंबर, 2019 को विश्वविद्यालय के निर्माण की घोषणा की थी. अब इसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 सितंबर को रखेंगे. 

कोल तहसील के लोढ़ा और मुसईपुर गांवों में विश्वविद्यालय के लिए भूमि प्रस्तावित की गई थी. जिला प्रशासन ने 37 हेक्टेयर से अधिक सरकारी भूमि देने का निर्णय किया था. इसके अलावा अन्य 10 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई थी. 

राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर एक विश्वविद्यालय की मांग 2018 में उठी थी, जब हरियाणा के बीजेपी नेताओं ने जाट राजा के नाम पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का नाम बदलने का आह्वान किया था. उस वक्त इस बात का ज़ोर दिया गया था कि महेंद्र प्रताप ने 'एएमयू के लिए भूमि दान' की थी. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सभा में बताया था कि महाराजा महेंद्र प्रताप ने ब्रिटिश को बहुत बड़ी चुनौती दी थी. वह अलीगढ़ के राजा थे, लेकिन उन्होंने अफगानिस्तान जाकर आजाद हिंद फौज की टीम गठित की थी. इससे पहले  स्थानीय राजनेताओं ने भी इसे लेकर मांग उठाई थी. हालांकि, योगी सरकार ने 2019 में राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर अलीगढ़ में एक नया विश्वविद्यालय स्थापित करने का भरोसा दिलाया था.

इस विश्वविद्यालय को बनाने की घोषणा बीजेपी सरकार बनने के एक साल बाद ही कर दी गई थी, लेकिन अब निर्माण में तेजी लाने का आदेश है ताकि 2022 से पहले यह विश्वविद्यालय बनकर तैयार हो जाए. 

राजा महेंद्र प्रताप कौन थे 

महेन्द्र प्रताप का जन्म एक दिसम्बर 1886 को एक जाट परिवार में हुआ था जो मुरसान रियासत के शासक थे. यह रियासत वर्तमान उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में थी. वे राजा घनश्याम सिंह के तृतीय पुत्र थे, जब वो तीन साल के थे तब हाथरस के राजा हरनारायण सिंह ने उन्हें पुत्र के रूप में गोद ले लिया. साल 1902 में उनका विवाह बलवीर कौर से हुआ था जो जिन्द रियासत के सिद्धू जाट परिवार की थीं. विवाह के समय वे कॉलेज की शिक्षा ले रहे थे. 

राजा महेंद्र सिंह के बारे में बताया जाता है कि मैसर्स थॉमस कुक एंड संस के मालिक बिना पासपोर्ट के अपनी कम्पनी के पी एंड ओ स्टीमर द्वारा राजा महेन्द्र प्रताप और स्वामी श्रद्धानंद के ज्येष्ठ पुत्र हरिचंद्र को इंग्लैंड ले गए. उसके बाद जर्मनी के शसक कैसर से उन्होंने भेंट की.  वहां से वो अफगानिस्तान गए. फिर बुडापेस्ट, बुल्गारिया, टर्की होकर हेरात पहुंचे जहां अफगान के बादशाह से मुलाकात की और वहीं से 1 दिसम्बर 1915 में काबुल से भारत के लिए अस्थाई सरकार की घोषणा की जिसके राष्ट्रपति स्वयं तथा प्रधानमंत्री मौलाना बरकतुल्ला खां बने.

यहां स्वर्ण-पट्टी पर लिखा सूचनापत्र रूस भेजा गया. उसी दौर में अफगानिस्तान ने अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया तभी वे रूस गए और लेनिन से मिले, लेकिन लेनिन ने कोई सहायता नहीं की. साल 1920 से 1946 विदेशों में भ्रमण करते हुए विश्व मैत्री संघ की स्थापना की. फिर 1946 में भारत लौटे. यहां सरदार पटेल की बेटी मणिबेन उनको लेने कलकत्ता हवाई अड्डे गईं. इसके बाद वो संसद-सदस्य भी रहे. 26 अप्रैल 1979 में उनका देहांत हो गया.

 

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