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पुण्यतिथि: ऐसा था गांधी का जीवन, इन्होंने दी थी राष्ट्रपिता की उपाधि

आज देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है. उनकी पुण्यतिथि पर जानिए उनके जीवन से जुड़ी कई अहम बातें...

महात्मा गांधी महात्मा गांधी

आज देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है. उनकी पुण्यतिथि पर जानिए उनके जीवन से जुड़ी कई अहम बातें...

- महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में एक हिंदू-गुजराती मोध बनिया वैश्य परिवार में हुआ.

- उनके माता पिता ने उनका नाम मोहनदास करमचंद गांधी रखा था. उनके जन्म के 5 साल बाद उनका परिवार पोरबंदर से राजकोट आ गया.

- जब गांधी 9 साल के हुए तब राजकोट में उन्हें उनके घर के नजदीकी स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा गया. जब वो 11 साल के हुए तब उन्होंने राजकोट के हाई स्कूल में जाना शुरू किया.

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- महात्मा गांधी पढ़ाई में औसत थे. वो काफी शर्मीले और कम बोलने वाले बच्चों में थे. उन्हें खेलों में भी कोई दिलचस्पी नहीं थी, उनकी साथी केवल उनकी किताबें थीं.

- महात्मा गांधी उस समय केवल 13 साल के थे जब उनकी शादी कस्तूरबा माखनजी कपाडिया (कस्तूरबा गांधी) से हो गई.

- साल 1885 में महात्मा गांधी के पिता करमचंद की मृत्यु हो गई.

- जब महात्मा गांधी 16 साल और उनकी पत्नी 17 साल की थीं उस समय उनके पहले बच्चे का जन्म हुआ, लेकिन जन्म के कुछ समय बाद ही उसकी (बच्चे की) मौत हो गई. इस बात से गांधी बहुत दुखी थे.

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- इसके बाद दोनों के 4 और बेटे हुए. उनके सबसे बड़े बेटे का नाम था हीरालाल जिनका जन्म 1888 को हुआ था. उनके दूसरे बेटे का नाम मनीलाल था जिनका जन्म 1892 को हुआ, तीसरे बेटे रामदास का जन्म 1897 को हुआ जबकि चौथे बेटे देवदास का जन्म 1900 में हुआ.

- नवंबर 1887 को 18 साल की उम्र में महात्मा गांधी ने इलाहाबाद से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. जनवरी 1888 में उन्होंने भावनगर के सामलदास कॉलेज में दाखिला लिया.

- हायर एजुकेशन के लिए उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया लेकिन गरीब परिवार से आने के चलते और फीस अफोर्ड नहीं कर पाने के चलते उन्हें बीच में ही कॉलेज छोड़ना पड़ा.

- जब गांधी ने कॉलेज छोड़ा तब उनके पारिवारिक मित्र मावजी दवे जोशीजी ने उन्हें और उनके परिवार को सलाह दी कि उन्हें लंदन जाकर लॉ (वकालत) की पढ़ाई करनी चाहिए. लेकिन क्योंकि इसी साल उनके बेटे हीरालाल का जन्म हुआ था इसलिए उनकी मां नहीं चाहती थीं कि वो अपने परिवार को छोड़कर दूर जाएं.

- महात्मा गांधी चाहते थे कि वो पढ़ाई करने जाएं इसलिए अपनी पत्नी और मां को राजी करने के लिए उन्होंने कहा कि वो विदेश जाकर मीट, शराब और औरतों से दूर रहेंगे. गांधी के भाई लक्ष्मीदास, जो कि खुद भी पेशे से वकील थे उन्होंने गांधी का साथ दिया जिसके बाद उनकी मां पुतलीबाई उन्हें भेजने के लिए राजी हो गईं.

- जब वो लंदन में थे उस दौरान उनकी मां का देहांत हो गया लेकिन उनके परिवार ने इस बात की जानकारी महात्मा गांधी को नहीं दी.

- महात्मा गांधी ने अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजादी दिलाई, साथ ही संदेश दिया कि अहिंसा सर्वोपरि है. महात्मा गांधी को सुभाष चंद्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को रेडियो रंगून से 'राष्ट्रपिता' कहकर संबोधित किया था.

- महात्मा गांधी की शवयात्रा 8 किलोमीटर लंबी थी. कहा जाता है कि उनकी शव यात्रा में करीब 10 लाख लोग चल रहे थे और लगभग 15 लाख लोग रास्ते में खड़े थे.

- भारत में छोटी सड़कों को छोड़ दें तो कुल 53 बड़ी सड़कें महात्मा गांधी के नाम पर हैं, जबकि विदेश में कुल 48 सड़कों के नाम उनके नाम पर हैं.

- गांधी ने साउथ अफ्रीका के डर्बन, प्रिटोरिया और जोहांसबर्ग में कुल तीन फुटबॉल क्लब स्थापित करने में मदद की थी.

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