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Colonel Dharamvir: 20 सिपाहियों के साथ पूरी रात ली थी पाकिस्‍तानी फौज से टक्‍कर, ऐसे बहादुर थे कर्नल धर्मवीर

Colonel Dharamvir: अपनी फौज को अलर्ट करने के साथ ही कर्नल धर्मवीर के पास 2 विकल्‍प थे- पहला, मदद आने का इंतजार करते और चौकी छोड़कर पीछे हट जाते. दूसरा, दुश्‍मनों का डटकर मुकाबला करते. उन्‍होंने बगैर सोचे दूसरा विकल्‍प चुना.

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Colonel Dharamveer Passes Away Colonel Dharamveer Passes Away

Hero Of 1971 Indo Pak War: 03 दिसंबर 1971 की रात जैसलमेर के लोंगेवाला पोस्‍ट पर पाकिस्‍तान अचानक हमला करने के लिए आगे बढ़ रहा था. हजारों जवान और टैंकों के साथ पाकिस्‍तानी फौज पूरी तैयारी से भारत में घुसने की नीयत से आगे बढ़ रही थी. उस समय ड्यूटी पर तैनात कर्नल धर्मवीर (Colonel Dharamvir) को पाकिस्‍तानी हलचल की भनक लग गई. उन्‍होंने बगैर देरी किए मेजर चांदपुरी को इसकी खबर की और भारतीय सेना को समय अलर्ट कर दिया. हालांकि, काम अभी खत्‍म नहीं हुआ था.

बॉर्डर पोस्‍ट पर उस वक्‍त केवल 20-22 जवाब थे जबकि दुश्‍मन की फौज काफी बड़ी थी. रात का समय था इसलिए वायुसेना मदद करने में असमर्थ थी. अपनी फौज को अलर्ट करने के साथ ही कर्नल धर्मवीर के पास 2 विकल्‍प थे- पहला, मदद आने का इंतजार करते और चौकी छोड़कर पीछे हट जाते. दूसरा, दुश्‍मनों का डटकर मुकाबला करते. उन्‍होंने बगैर सोचे मुकाबला करने का फैसला किया.

अपने थोड़े से सैनिकों के साथ ही उन्‍होंने पूरी रात पाकिस्‍तान की सेना को बॉर्डर पर उलझाए रखा. एंटी टैंक माइन्‍स बिछाकर दुश्‍मन के टैंक उड़ा दिए, आर्टरी फायरिंग से फौज के कदम रोक दिए, एंट्री टैंक गन से पाकिस्‍तानी टैंकों को निशाना बनाया. भारतीय जवानों ने पूरी रात पाकिस्‍तानी सेना को आगे नहीं बढ़ने दिया और सुबह होते ही वायुसेना की मदद से दुश्‍मनों को मुंहतोड़ जवाब दे दिया गया. यह युद्ध में भारतीय सेना का अदम्‍य साहस, शक्ति और पराक्रम साबित हुआ.

इस युद्ध के नायक रहे कर्नल धर्मवीर का सोमवार 16 मई को गुरुग्राम में निधन हो गया है. 1971 की इस जंग पर बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्‍म 'बॉर्डर' बनी थी जिसमें कर्नल धर्मवीर का किरदार अक्षय खन्‍ना ने निभाया था. एक इंटरव्‍यू के दौरान उन्‍होंने बताया था कि कई लोगों ने उनसे फिल्म के डायरेक्‍टर जेपी दत्‍ता के खिलाफ अपील करने की बात कही थी क्‍योंकि फिल्‍म में उनके किरदार को शहीद दिखा दिया गया था, मगर उन्‍होंने जवाब दिया, ''मैं एक फौजी था, फौजी हूं और फौजी ही रहूंगा. और फौजी कभी ऐसे काम नहीं करते."

 

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