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7.5 साल के इस कोर्स के बारे में सुना है? 10वीं से शुरू और फिर सीधे बनते हैं डॉक्टर

Ayurvedic Doctor Course: आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के इच्छुक उम्मीदवार अब संस्कृत में पढ़ाई करने के बाद भी डॉक्टर बन सकते हैं.

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 केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने एक कोर्स शुरू किया है. (Photo: Pexels)
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने एक कोर्स शुरू किया है. (Photo: Pexels)

अगर आप डॉक्टर बनना चाहते हैं तो आप 10वीं कक्षा के बाद ही एक ऐसा कोर्स कर सकते हैं, जिससे 7.5 साल के बाद डॉक्टर बन पाएंगे.  दरअसल, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने एक ऐसा कोर्स तैयार किया है, जिससे 7.5 साल के कोर्स के जरिए डॉक्टर बन सकते हैं. इससे  संस्कृत में पूरी पढ़ाई करने वाले भी आयुर्वेदिक चिकित्सा में स्नातक यानी BAMS डॉक्टर बन सकते हैं. 

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने इसके लिए आयुर्वेद गुरुकुलम जैसे नए कार्यक्रम और पाठ्यक्रम बनाए हैं. संस्थान के कुलपति प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेड़ी ने बताया कि आयुर्वेद गुरुकुल को नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) के प्री आयुर्वेद प्रोग्राम (बीएएमएस फ्रेमवर्क) के तहत बनाया गया है.  इसका प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय नियामक ढांचे के भीतर आयुर्वेद शिक्षा की पारंपरिक गुरुकुल प्रणाली को फिर से मजबूत करना तथा संस्कृत आधारित आयुर्वेद शिक्षा को संगठित बनाना है. 

7.5 साल का है ये कोर्स

आयुर्वेद गुरुकुलम में मैट्रिक यानी संस्कृत माध्यम से 10वीं पास करने के बाद संस्कृत बैकग्राउंड के छात्रों को 7.5 साल के एकीकृत कोर्स के माध्यम से आयुर्वेद शिक्षा और चिकित्सा में स्नातक की डिग्री पाने का अवसर मिलेगा.  इसमें संस्कृत आधारित पढ़ाई और NEET-जैसी प्रवेश परीक्षा में शामिल होने का अवसर भी मिलेगा. ताकि वे आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों को समझ सकें और वैद्य बन सकें. 

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BAMS भी है शामिल

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने आयुर्वेद गुरुकुलम शुरू किया है, जो संस्कृत के माध्यम से आयुर्वेद की पारंपरिक शिक्षा देता है. इस गुरुकुलम में 10वीं पास छात्रों के लिए एक विशेष प्रवेश परीक्षा (NEET-PAP) होती है, जो संस्कृत पृष्ठभूमि वालों के लिए है.  इसके तहत 7.5 साल के एकीकृत कोर्स में 2 साल का प्री-आयुर्वेद और फिर BAMS की पढ़ाई भी शामिल है.  साथ साथ इंटर्नशिप भी होती है.

इसका मकसद संस्कृत आधारित आयुर्वेद शिक्षा को मजबूत करना और छात्रों को पारंपरिक आयुर्वेदिक ग्रंथों (जैसे चरक संहिता, सुश्रुत संहिता) का संस्कृत में अध्ययन करने में सक्षम बनाना है. शिक्षा की यह प्राचीन भारतीय परंपरागत प्रणाली के अनुसार राष्ट्रीय नियामक ढांचे (NCISM) के तहत है. आयुर्वेद को उसके मूल स्वरूप में लौटाने का प्रयास करती है. इसके जरिए आर्ष विद्या आयुर्वेद और संस्कृत का गहरा संबंध फिर से जुड़ सकेगा. 

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