बदलते दौर में जहां AI और टेक्नोलॉजी चरम पर है, वहां, करियर का मतलब भी बदल गया है. एक समय था, जब पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी मिलना और उस फील्ड में आगे बढ़ना सामान्य बात मानी जाती थी. लेकिन आज के समय में Gen Z इस बात को पीछे छोड़ रहे हैं. आज के समय में ग्रेजुएट कर रहे युवा ऐसे वर्कफोर्स में जा रहे हैं, जहां न तो कोई तय करियर है और न ही इसे लेकर पहले से कोई अंदाजा लगाया जा सकता है.
तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और टेक्नोलॉजी ने ये तो साफ कर दिया है कि आज के समय में सफल होने के लिए तय और पक्के रास्ते से ज्यादा, खुद को बदलती जरूरत के हिसाब से ढाल लेना है.
नई टेक्नोलॉजी का जन्म
आज के दौर में रोजाना नई-नई टेक्नोलॉजी आ रही है, जिसके चलते रोजगार बाजार भी लगातार बदल रहा है. इतना ही नहीं कुछ पुरानी नौकरियां खत्म हो रही हैं या तो फिर बदलाव कर नया रूप ले रही हैं. ऐसे में सिर्फ डिग्री के भरोसे करियर बनाना काफी नहीं है. भारत जैसे बड़े देश में हर साल लाखों युवा ग्रेजुएट होते हैं, लेकिन फिर भी रोजगार क्षमता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. इंडिया स्किल रिपोर्ट 2026 के अनुसार, केवल 56.35 फीसदी युवा ही नौकरी के लिए रेडी होते हैं.
इन स्किल्स की है जरूरत
रिपोर्ट बताती है कि नौकरी पाने और उसमें आगे बढ़ने के लिए डिजिटल स्किल्स,समास्याओं को सुलझाने की कला और बदलाव के साथ खुद को ढालने की क्षमता सबसे ज्यादा मायने रखती है. इसी वजह से आज के युवा करियर को किसी एक ओर नहीं बल्कि अलग-अलग फील्ड में लगातार आगे बढ़ने की तरह देखते हैं. वे यह भी समझ चुके हैं कि सीखना केवल कॉलेज तक ही सीमित नहीं है. यह एक निरंतर प्रोसेस है.
कंपनियों को क्या चहिए?
आज AI, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटिंग और नई टेक्नोलॉजी से जुड़े स्किल कंपनियों को पसंद आ रही है. कंपनी ऐसे लोगों को हायर करना चाहती है, जिनके पास एक से ज्यादा स्किल हो. अब कंपनियां भी केवल डिग्री नहीं देखती है.
इस फील्ड की बढ़ रही मांग
वहीं, आज के दौर में एंटरप्रेन्योरशिप की मांग तेजी से बढ़ी है. हर व्यक्ति अपना खुद का काम करना चाहता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में दो लाख से अधिक रजिस्टर्डस्टार्टअप हैं.