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US में जॉब, मोटी सैलरी, पर बहुत तन्हा हूं... इंड‍ियन इंजीन‍ियर ने बताया अपना दर्द, लोग बोले- देर न करो!

आज के बदलते दौर में घर से बाहर नौकरी करने का ट्रेंड आम हो गया है. अपने अच्छे करियर और स्टेबल जीवन के लिए युवा घर से दूर बड़े शहरों में पैसे कमाने के लिए निकल जाते हैं. लेकिन उसके पीछे का दर्द हर कोई नहीं समझ पाता है. अकेले रहना, खाना और हर वो काम अकेले करना जो कभी वह परिवार के साथ करता था उसे कभी-कभी तकलीफ होती है. रेडिट पर वायरल हो रहे एक पोस्ट में कुछ ऐसी ही बातें सामने आई है. यूजर ने बताया कि 8 साल अमेरिका में रहने के बाद अब उसके पास हिम्मत नहीं बची है कि वह अकेले रह सके. 

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अमेरिका में 8 साल रहने के बाद भारत लौटा टेक प्रोफेशनल. (Photo : Pexels)
अमेरिका में 8 साल रहने के बाद भारत लौटा टेक प्रोफेशनल. (Photo : Pexels)

सोचिए आप अपने घर से मिलो दूर रह रहे हैं और अचानक एक दिन आपको घर की ऐसी याद आए कि आप सब कुछ छोड़कर घर वापस आ जाए. ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर वायरल हो रहा है. अमेरिका में रहने वाले 36 वर्षीय एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपने बिगड़ते मेंटल स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात की है और कहा है कि लगभग 8 साल विदेश में रहने के बाद अब वह इस्तीफा देकर भारत लौटने पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि हर सुबह जब मैं दिन की शुरुआत करता हूं, तो मुझे ऐसा लगता है कि मुझे स्ट्रोक आ जाएगा. इसके अलावा उसने वर्कप्लेस पर ज्यादा प्रेशर की बात भी कही है.

तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने के लिए और मास्टर डिग्री हासिल करने के लिए वह साल 2013 में अमेरिका आए थे जिसे पूरा करने में उन्हें सात साल लगे. ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद  उन्हें टॉप 50 कंपनियों में से एक में नौकरी मिल गई, जहां वे अभी भी काम कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि पिछले साल हालात पूरी तरह से बदल गए. 

बढ़ता जा रहा है दबाव 

यूजर ने पोस्ट कर बताया कि खराब मैनेजमेंट, एआई के बढ़ते इस्तेमाल का दबाव और ऑफिस की राजनीति की वजह से काम का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है. उनके मुताबिक, छंटनी का डर और तेजी से बदलती टेक इंडस्ट्री ने रोजमर्रा की जिंदगी को मानसिक रूप से बेहद थका देने वाला बना दिया है. उन्होंने यह भी बताया कि वह पिछले साल से हाई ब्लड प्रेशर और डिप्रेशन की दवाएं ले रहे हैं. तनाव इतना ज्यादा बढ़ गया है कि अब वह अक्सर वीकेंड पर सिर्फ मन शांत करने के लिए सिनेमाघरों में समय बिताते हैं. उनके मुताबिक, ऐसा करने से उन्हें कुछ घंटों के लिए चिंता और तनाव से राहत मिलती है. 

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नहीं रह गई है अकेले रहने की हिम्मत 

वर्कफोर्स पर काम के टेंशन के अलावा उन्होंने सालों से अपने शहर से दूर रहने का दुख भी बताया है. उन्होंने कहा कि वह जीवन में अधिकतर समय अकेले ही रहे हैं. उस व्यक्ति ने बताया कि वह लंबे समय से भावनात्मक रूप से अकेला महसूस कर रहा है. उनका कहना है कि बचपन में मां ने उनका पालन-पोषण किया और पढ़ाई के लिए उन्हें कम उम्र में ही घर से दूर भेज दिया गया जिसकी वजह से वे शुरू से ही ज्यादा अकेले रहे. उन्होंने लिखा कि अब काम के दबाव के साथ यह अकेलापन और भी भारी पड़ने लगा है और उन्हें अकेले रहने की ताकत कम होती जा रही है.

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अब टेक इंडस्ट्री से ही निराशा और नफरत जैसी फील होने लगा है. सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में शुरुआत करने और सीनियर पद तक पहुंचने के बावजूद, उन्हें ज्यादातर फ्रंटएंड UI डेवलपमेंट में लगाया गया, जिससे वे खुश नहीं हैं. उन्हें डर है कि एआई के कारण इस तरह की भूमिकाएं सबसे पहले प्रभावित हो सकती हैं. उन्होंने यह भी बताया कि भारत में कंपनी के ऑफशोर सेटअप में जाना भी समाधान नहीं लगता क्योंकि वहां भी काम का माहौल काफी दबाव वाला है. उनके अनुसार, वहां कर्मचारियों को कई बार रात 2–3 बजे तक और वीकेंड पर भी काम करना पड़ता है, ताकि डेडलाइन पूरी की जा सके. उसने आगे लिखा कि मैं थक चुका हूं... मुझे काम में कोई दिलचस्पी नहीं है. 

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भारत लौटना ही है विकल्प 

इंजीनियर ने बताया कि उनके माता-पिता उनका सपोर्ट कर रहे हैं और उन्हें वापस भारत लौटने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. बस वह इस बात को लेकर परेशान हैं कि क्या भारत में उन्हें ऐसा अवसर मिल पाएगा. उन्होंने बताया कि वह भारत में MBA करने पर भी विचार कर रहे हैं. उनका कहना है कि आर्थिक रूप से वह कुछ समय तक अपना खर्च चला सकते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर काम का माहौल बेहतर हो और वर्क-लाइफ बैलेंस अच्छा मिले, तो वह कम सैलरी वाली नौकरी भी स्वीकार करने को तैयार हैं. उन्होंने लिखा कि उन्हें बेहतर संतुलन वाली नौकरी मिलने पर सैलरी कम होना भी उनके लिए ठीक रहेगा.

लोग दे रहे हैं प्रतिक्रिया 

इस पोस्ट ने ऑनलाइन कई लोगों को प्रभावित किया. लोगों का कहना है कि विदेश में काम करने की जिंदगी बाहर से जितनी सफल दिखती है, अंदर से उतनी ही तनावपूर्ण और अकेली हो सकती है. कई लोगों ने इसे इस बात की याद दिलाने वाला बताया कि घर लौटना हमेशा असफलता नहीं होता, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य,परिवार के साथ जुड़ाव और एक संतुलित जीवन चुनने का भी तरीका हो सकता है. 

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