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कंपनी ने निकाला नहीं 'अपडेट' किया, IKEA को AI की हेल्प से हुआ ₹9,000 करोड़ का फायदा

स्वीडन की फर्नीचर कंपनी IKEA ने AI चैटबॉट 'बिली' के जरिए 57% ग्राहक सवालों का समाधान किया, जिससे कर्मचारियों पर बोझ कम हुआ. बाकी 43% मामलों में IKEA ने अपने सपोर्ट स्टाफ को प्रशिक्षित कर उन्हें डिजाइन कंसल्टेंट बनाया. अब मशीनें संभाल रही हैं ग्राहकों के सवाल और इंसान दे रहे हैं 'इंटीरियर डिजाइन' की सलाह. जानिए कैसे IKEA ने AI की मदद से अपने वर्कफोर्स को दिया एक नया और दमदार करियर.

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AI ने संभाला काम, तो बेरोजगार होने के बजाय 'करोड़पति' बन गए कर्मचारी!
AI ने संभाला काम, तो बेरोजगार होने के बजाय 'करोड़पति' बन गए कर्मचारी!

आमतौर पर जब कोई कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अपनाती है, तो लोग डर जाते हैं कि अब छंटनी होगी. लेकिन स्वीडन की मशहूर फर्नीचर कंपनी IKEA ने एक नई मिसाल पेश की है. IKEA ने न केवल अपने कर्मचारियों की नौकरी बचाई, बल्कि उन्हें 'डिजाइनर' बनाकर 9,000 करोड़ रुपये (1 बिलियन यूरो) का नया बिजनेस खड़ा कर दिया.

'बिली' (Billy) ने संभाला मोर्चा
IKEA ने ग्राहकों के शुरुआती सवालों के जवाब देने के लिए 'बिली' नाम का एक AI चैटबॉट तैनात किया. यह बॉट ऑर्डर ट्रैकिंग, प्रोडक्ट की जानकारी और सामान्य सपोर्ट जैसे बुनियादी काम संभालता है. नतीजा यह हुआ कि करीब 57% ग्राहकों की समस्याओं का समाधान अकेले इस AI बॉट ने ही कर दिया. इससे इंसानी कर्मचारियों पर बोझ कम हो गया.

बाकी 43% में छिपा था 'खजाना'
भविष्यवक्ता ब्रायन सोलिस के अनुसार, कंपनी ने उन 43% मामलों की जांच की जिन्हें AI हल नहीं कर पाया था. पता चला कि ये लोग सिर्फ जानकारी नहीं मांग रहे थे, बल्कि वे अपने घर और दफ्तर के लिए 'इंटीरियर डिजाइन' की सलाह चाहते थे. यहीं पर मशीनों की सीमा खत्म हुई और इंसानी समझ की जरूरत पड़ी.

सपोर्ट स्टाफ से 'डिजाइन कंसल्टेंट' तक का सफर
IKEA ने एक स्मार्ट कदम उठाया. उन्होंने अपने कस्टमर सपोर्ट स्टाफ को नौकरी से निकालने के बजाय उन्हें 'इंटीरियर डिजाइनिंग' की ट्रेनिंग दी. 

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नया मॉडल जब व‍िकस‍ित हुआ तो कर्मचारी अब साधारण सवालों के जवाब देने के बजाय ग्राहकों को घर सजाने की प्रोफेशनल सलाह देने लगे. कंपनी ने इस डिजाइन सलाह के लिए फीस लेना शुरू कर दिया. पहले ही साल में इस सर्विस से कंपनी को 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की अतिरिक्त कमाई हुई.

बता दें कि जहां क्लार्ना जैसी कंपनियों ने AI पर ज्यादा निर्भरता के कारण सर्विस क्वालिटी में गिरावट देखी, वहीं IKEA ने एक संतुलन बनाया है. यहां AI उन कामों को संभालता है जो रूटीन हैं, जबकि इंसान उन भूमिकाओं में आ गए हैं जहां 'क्रिएटिविटी' और 'पर्सनल टच' की जरूरत है.

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