भारतीय सेना ने पर्यावरण और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान रचा है. लद्दाख के चुशुल में दुनिया की सबसे ऊंची जगह पर ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है. यह प्रोजेक्ट भारत के पहले गांवों (सीमावर्ती क्षेत्रों) को स्वच्छ ऊर्जा देने की दिशा में सेना का महत्वपूर्ण कदम है. यह प्रोजेक्ट NTPC (नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन) के सहयोग से बनाया गया है.
चुशुल ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट क्या है?
चुशुल लद्दाख में समुद्र तल से 14500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है – यह दुनिया का सबसे ऊंचा ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट है. इसकी मुख्य विशेषताएं...
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यह प्रोजेक्ट सेना की सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊ विकास), रेजिलिएंस (मजबूती) और सेल्फ-रिलायंस (आत्मनिर्भरता) की प्रतिबद्धता को दिखाता है.
#ArmyDayParade2026
— ADG PI - INDIAN ARMY (@adgpi) January 10, 2026
05 Days to Go…
Indian Army for India’s First Villages
In Ladakh, the world’s highest Green Hydrogen Microgrid Project at Chushul reflects India’s resolve for clean energy in extreme conditions. Developed in collaboration with NTPC, the project will provide… pic.twitter.com/JXQHPDhfgn
क्यों बनाया गया यह प्रोजेक्ट?
लद्दाख में सीमा पर तैनात सैनिकों को बिजली की जरूरत लगातार रहती है. पहले डीजल से चलने वाले जनरेटर इस्तेमाल होते थे, जो... महंगे ईंधन पर निर्भर थे. प्रदूषण फैलाते थे. लॉजिस्टिक्स में मुश्किलें पैदा करते थे (ईंधन ट्रकों से लाना).
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अब ग्रीन हाइड्रोजन से...
बिजली साफ होगी. ईंधन की जरूरत कम होगी. पर्यावरण संरक्षण होगा. सेना का खर्च भी घटेगा.
प्रोजेक्ट का महत्व