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मेरठ में पलायन का आरोप, पुलिस-प्रशासन ने कहा- रास्ते का है विवाद

मेरठ पुलिस का भी यही कहना है कि यह मामला पलायन का कहीं से नहीं है. यह मामला जाम और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर है. जांच कर रहे अधिकारी दोनों पक्षों से बातचीत कर रहे हैं.

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पलायन की सूचना पर आला अधिकारी मौके पर जा पहुंचे (फोटो- उस्मान)
पलायन की सूचना पर आला अधिकारी मौके पर जा पहुंचे (फोटो- उस्मान)

यूपी में शामली के बाद अब मेरठ में पलायन का कथित मामला सामने आया है. जिसे सियासी मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है. एक समुदाय के लोग दूसरे समुदाय पर परेशान करने का आरोप लगा रहे हैं. लेकिन पुलिस प्रशासन का साफ कहना है कि पलायन जैसी कोई बात नहीं है. ये मामला आपसी विवाद का है. हालांकि वहां कई मकानों और प्लाट्स पर बिकाऊ लिखा हुआ है.  

आरोप है कि मेरठ शहर के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र अंतर्गत प्रह्लादनगर में बहुसंख्यक वर्ग के कोई 200 परिवार अपना मकान बेचकर पलायन कर चुके हैं. इस आरोप के बाद शासन-प्रशासन हरकत में आ गया. आरोप है कि इनमें से अधिकांश मकानों की खरीद-बिक्री बीते पांच-छह वर्षों के भीतर हुई है. यहां रहने वाले दूसरे समुदाय के लोगों को औने-पौने दाम पर मकान बेचकर चले गए हैं.

इलाके के कई मकानों और प्लाट्स पर बिकाऊ लिखा हुआ है. एक समुदाय का आरोप है कि प्रह्लादनगर में बहुसंख्यक समाज की महिलाओं से छेड़छाड़, पर्स, चेन, मोबाइल और कीमती सामान की लूटपाट होती है. विरोध करने पर मारपीट की नौबत आ जाती है. उन लोगों के घर के सामने आपत्तिजनक वस्तुएं मिलती हैं. ऐसी ही आपत्तिजनक हरकतों की वजह से वहां लोगों का जीना दुश्वार हो गया.

यही वजह है कि कई परिवार वहां से घर बेचकर जाने को मजबूर हैं. इस समस्या को लेकर कुछ दिनों पूर्व भारतीय जनता पार्टी के वार्ड-56 से पार्षद जितेंद्र पाहवा ने पुलिस-प्रशासनिक अफसरों को प्रार्थना पत्र देकर शरारती तत्वों पर लगाम कसने की मांग की थी. लेकिन आरोप है कि उनके खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया.

जब ये पलायन की बात सामने आई तो एडीजी जोन प्रशांत कुमार, कमिश्नर, मेरठ के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पूरे मामले की छानबीन करने मौके पर पहुंचे. शिकायतकर्ताओं ने अधिकारियों को बताया कि प्रह्लादनगर में शरारती तत्व अराजकता फैला रहे हैं. इसके कारण लोग वहां से पलायन कर रहे हैं. पलायन करने वालों के मकान खरीदने वाले अधिकांश लोग दूसरे संप्रदाय से हैं.

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वहीं, दूसरे समुदाय के लोगों का कहना है कि यह मामला पलायन का नहीं बल्कि गेट लगाने को लेकर चल रहे विवाद का है. लिसाड़ी गेट चौराहे पर जाम लग जाता है. जिससे लोग प्रह्लाद नगर से होकर दूसरे इलाकों में जाते हैं. इसी की वजब से एक सम्प्रदाय के लोग वहां गेट लगाना चाहते हैं, जो दूसरे समुदाय के लोग लगने नहीं देते. क्योंकि इससे आम रास्ता रुक जाएगा.

एक पक्ष का कहना है कि आरोप झूठे हैं. कोई पलायन की बात नहीं है. यहां पर एक रास्ता है, जो प्रह्लादनगर से होते हुए इस्लामाबाद की तरफ निकलता है. दोनों बराबर बराबर मोहल्ले हैं. इसी बात को लेकर आपस में विवाद है. यानी विवाद गेट लगाने को लेकर है. वहां कुछ लोग अपने मकान बेचकर जा रहे थे, लेकिन उन्होंने यही बताया कि वे अपनी मर्जी से मकान बेच रहे हैं और उन पर कोई दबाव नहीं है.

वहीं, पुलिस का भी यही कहना है कि यह मामला पलायन का कहीं से कहीं तक नहीं है. यह मामला जाम और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर है. जांच कर रहे अधिकारी दोनों पक्षों से बातचीत कर रहे हैं.

वहीं, मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार का कहना है कि पलायन जैसी कोई स्थिति नहीं है. यहां पर आपसी विवाद है.  उसके लिए वहां पुलिस लगाई जाएगी. साथ ही वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. इस मामले में कार्रवाई की जा रही है, लेकिन पलायन जैसी कोई बात नहीं है. एडीजी प्रशांत के मुताबिक दोनों पक्षों से भी बात हुई है लेकिन पलायन जैसी कोई भी बात सामने नहीं आई है. एसएसपी मेरठ नितिन तिवारी का भी यही कहना है कि पलायन जैसी कोई बात नहीं मिली है.

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