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बिहारः मनचलों को पकड़ने के लिए पुलिस ने की 160 बाइक की जांच

बिहार में पटना पुलिस ने दो मनचलों को पकडने के लिए 160 मोटरसाइकिलों की जांच पड़ताल की. दरअसल ये मामला छेड़छाड़ का था. पुलिस को बाइक सवार मनचलों की तलाश थी. चार दिन की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार पुलिस ने मनचलों और बाइक के मालिक को गिरफ्तार कर ही लिया है.

इन दोनों मनचलों को पकड़ने के लिए पुलिस की विशेष टीम बनाई गई थी इन दोनों मनचलों को पकड़ने के लिए पुलिस की विशेष टीम बनाई गई थी

बिहार में पटना पुलिस ने दो मनचलों को पकडने के लिए 160 मोटरसाइकिलों की जांच पड़ताल की. दरअसल ये मामला छेड़छाड़ का था. पुलिस को बाइक सवार मनचलों की तलाश थी. चार दिन की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार पुलिस ने मनचलों और बाइक के मालिक को गिरफ्तार कर ही लिया है.

घटना 19 जनवरी की शाम 6.30 बजे की थी. दरअसल, पटना के बोरिंग रोड चौराहे के पास बाइक सवार दो मनचलों ने मेडिकल की एक छात्रा और उसकी बहन के साथ छेडखानी की थी. लडकियों ने बाइक का मॉडल और नम्बर नोट कर लिया था. बाद में उन दोनों ने एसके पुरी थाने में जाकर केस दर्ज कराने की कोशिश की थी लेकिन पुलिस वालों ने इनकार दिया था.

थाने से हताश होकर पीड़ित लडकियों ने पटना के एसएसपी मनु महाराज से गुहार लगाई. एसएसपी ने तुरंत एक्शन लेते हुए मनचलों को गिरफ्तार करने के लिए एक टीम गठित कर दी. बाइक के नम्बर से बदमाशों की खोज शुरू की गई. पुलिस के पास बाइक का केवल अंकों वाला नंबर था. लिहाजा उस नम्बर की सभी बाइकस् का इतिहास निकाला गया.

परिवहन विभाग से कागजात निकलने पर बाइक का पता चला. 2014 में खरीदी गई इस बाइक को पांच बार बेचा गया था, वो भी बिना कागजात के. 160 बाइकस् का इतिहास खंगालने के बाद जांच अधिकारी असली बाइक तक जा पहुंचे. जांच के दौरान पता चला कि सबसे पहले पटना के निवासी रामविलास महतो ने 2014 में बाइक खरीदी थी.

उसके बाद उसे मुजफ्फपुर के गौरव को बेच दिया गया था. पुलिस जब मुजफ्फपुर पहुंची तब पता चला कि गौरव ने बाइक 2016 में अतुल राज को बेच दी थी. अतुल से पता चला कि उसने इसी साल 12 जनवरी को बाइक पटना के प्रशांत कुमार को बेची है.

प्रशांत ने पुलिस को बताया कि 19 जनवरी को उसके दोस्त आशीष आनंद और स्निग्ध कश्यप उसकी बाइक मांग कर ले गए थे. और इस तरह पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई. पुलिस ने आशीष और स्निग्ध के अलावा बाइक मालिक प्रशांत को भी गिरफ्तार कर लिया है. आशीष आनंद के पिता आयकर अधिकारी हैं जबकि स्निग्ध के पिता ठेकेदार हैं.

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